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Election Ground Report: लोहागढ़... लड़ रहे प्रत्याशी, दांव पर मुख्यमंत्री और राजघराने की साख

Thu, 18 Apr 2024 04:09 PM IST
भूपेन्द्र सिंह देश दीपक तिवारी, आगरा/भरतपुर
देश दीपक तिवारी, आगरा/भरतपुर Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 18 Apr 2024 04:09 PM IST
सार

Election Ground Report: भरतपुर में प्रत्याशी लोहागढ़ लड़ रहे हैं। यहां पर मुख्यमंत्री भजनलाल और जाट राजघराने की साख दांव पर हैं। 

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credibility of Rajasthan CM Bhajan Lal and Vishvendra Singh of Jat royal family stake in Bharatpur seat
भरतपुर प्रवेश द्वार (सारस चौराहा) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के जिस भरतपुर शहर को महाराजा सूरजमल ने बसाया। जहां लोहागढ़ जैसा किला बनाया। भगवान राम के भाई भरत के नाम पर जिसका नाम भरतपुर पड़ा। वहां, चुनावी रण में प्रत्याशी तो नए हैं। लेकिन, अबकी बार दांव पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल और जाट राजघराने के विश्वेंद्र सिंह की साख है।

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल के गृह जनपद भरतपुर में 19 अप्रैल को पहले चरण में मतदान है। यहां भाजपा, कांग्रेस में सीधी टक्कर है। बसपा सहित तीन निर्दलीय भी चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। सारस चौराहा पर भरतपुर का प्रवेश द्वार है। इसके सामने ही ऊ सांई मिष्ठान भंडार है। जहां कुछ लोग बस के इंतजार में टिनशेड में बैठे हैं। 58 वर्षीय श्रीनिवास अग्रवाल कचौड़ी व ब्रेड पकोड़े बेच रहे हैं। 

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वहीं, बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र नितिन कुमार नाश्ता कर रहे थे। 18 साल के नितिन इस बार पहली बार वोट डालेंगे। उनसे पूछा चुनावी ऊंट भरतपुर में किस करवट बैठेगा। वो पहले मुस्कराए और फिर बोले आएंगे तो मोदी जी है। लेकिन, मुझे भाजपा या कांग्रेस किसी पर भी एक प्रतिशत यकीन नहीं। युवा बेरोजगार हैं। बेरोजगारी भरतपुर ही नहीं, पूरे भारत में फैल रही है। लेकिन, सरकार भाजपा ही बनाएगी।
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वहीं, 21 वर्षीय राहुल चौधरी बैठे हुए थे। चर्चा सुनकर बोले- मेरा गांव यहां से आठ किमी. दूर है। वहां डिग्री कॉलेज नहीं, इसलिए रोज भरतपुर पढ़ने आता हूं। कोई विकास या काम-धंधा भरतपुर में नहीं। तभी, कचौड़ी बेच रहे श्रीनिवास अग्रवाल दुकान छोड़कर पास आकर बैठ गए। 
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उनसे पूछा- कहां रहते हो, तो बोले- यहीं जवाहर नगर में रहता हूं। मेरा और मुख्यमंत्री भजन लाल का घर पास-पास है। वोटों की राजनीति से देश में भेदभाव बढ़ रहा है। लेकिन, मैं वोट भाजपा को दूंगा। दूध और पूत से कोई नहीं झिका है...। नेता या सरकार कोई भी हो, सब अपना-अपना पेट भरते हैं। फिर बोले यहां भाजपा की टक्कर कांग्रेस से है। कांग्रेस से जाटव प्रत्याशी है और भाजपा से कोली।
 

अमर उजाला टीम आगे बढ़ गई। करीब 15 किमी. दूर कुम्हेर डीग रोड पर एक चाय की टपरी में सफेद कुर्ता-धोती पहने चार-पांच बुजुर्ग चाय की चुस्कियां ले रहे थे। चाय की टपरी पर बैठे 80 साल के प्रीतम सिंह से पूछा क्या मुद्दे हैं इस बार यहां चुनाव में। बोले- महंगाई, बेरोजगारी और जाट आरक्षण। उनके बराबर से बरताई पंचायत के 65 वर्षीय सरपंच प्रतिनिधि वेदीराम प्रीतम सिंह बैठे हुए थे। 

उनके बात की गई। वह बोले- यहां पानी की समस्या है। लोग प्यासे हैं और खेत सूखे हैं। वहीं, चाय टपरी चलाने वाले पैंगोर निवासी 42 वर्षीय योगेश कुमार खामोशी से सबकी बातें सुनते रहे। फिर बाबैन निवासी 70 वर्षीय कुंदन सिंह बोले- यहां सबसे बड़ा दुख पानी का है। तभी 60 वर्षीय जगवीर सिंह आ गए। वह बोले- मुख्यमंत्री का यह गृह जिला है, लेकिन हम राजा साहब के साथ हैं। मुख्यमंत्री तो कठपुतली हैं। हम तो हम हाथ के साथ हैं।

कमल को हैट्रिक... तो हाथ को वापसी का इंतजार

अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भरतपुर सीट पर 20 लाख से अधिक मतदाता हैं। 2014 और 2019 में यहां कमल खिला। पिछले चुनाव में भाजपा की रंंजीता कोली ने कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत कुमार जाटव को 3.18 लाख वोट से हराया था। इस बार भाजपा ने रंजीता कोली का टिकट काटकर रामस्वरूप कोली को प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस ने 26 साल की संजना जाटव को उतारा है। बसपा से अंजिला जाटव व निर्दलीयों में अनीता, पुष्पेंद्र कुमार और पुरुषोत्तम ने ताल ठोकी है।

98% हिन्दू जिनमें 25% दलित मतदाता

भरतपुर में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। 98 प्रतिशत आबादी हिन्दू है। जिनमें 25 प्रतिशत दलित हैं। 70 प्रतिशत पिछड़ा, सवर्ण मतदाता हैं। तीन प्रतिशत मुस्लिम हैं व 2 प्रतिशत अन्य जनजाति के मतदाता हैं। 1952 में भरतपुर लोकसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुआ था। गिर्राज शरण सिंह निर्दलीय जीत कर संसद पहुंचे थे। अब तक यहां 17 बार हुए लोकसभा चुनाव में 7 बार कांग्रेस, 6 बार भाजपा और चार बार अन्य को जीत मिली है।

दिल्ली से जयपुर तक रहा सीधा दखल

भरतपुर का सीधा दखल दिल्ली से जयपुर तक रहा है। यहां से जीत कर 1980 में राजेश पायलेट केंद्रीय मंत्री बने। फिर 1984 व 1998 में नटवर सिंह सांसद रहे। 2004 में वह विदेश मंत्री रहे। राजघराने के विश्वेंद्र सिंह यहां तीन बार सांसद रह चुके हैं। महारानी दिव्या सिंह, कृष्णेंद्र कौर भी राजघराने से दिल्ली तक पहुंची। लंबे समय तक इस सीट पर राजपरिवार का दबदबा रहा है।
सारस चौराहा स्थित भरतपुर का प्रवेश द्वार कुम्हेर डीग रोड स्थित चाय की टपरी में चुनाव चर्चा करते मतदाता भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप कोली, कांग्रेस प्रत्याशी संजना जाटव, बसपा प्रत्याशी अंजिला जाटव
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