{"_id":"6ab6978fc216d805430149b5","slug":"court-takes-tough-stance-on-police-arbitrariness-brother-in-law-also-named-as-an-accused-in-case-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"आगरा: पुलिस की मनमानी पर अदालत सख्त, अग्रिम विवेचना में की खानापूर्ति; कोर्ट ने जेठ को भी बनाया आरोपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा: पुलिस की मनमानी पर अदालत सख्त, अग्रिम विवेचना में की खानापूर्ति; कोर्ट ने जेठ को भी बनाया आरोपी
Fri, 25 Sep 2026 09:17 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Fri, 25 Sep 2026 09:17 PM IST
सार
अदालत ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। इसके बावजूद विवेचक ने पूर्व विवेचक के आरोपपत्र को ही सही मानते हुए वही रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी। पीड़िता ने फिर प्रार्थनापत्र दिया। अदालत ने दोबारा अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। इसके बाद भी पुलिस ने आरोपपत्र में कोई बदलाव नहीं किया और वही रिपोर्ट अदालत में पेश की।
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
अदालत की ओर से अग्रिम विवेचना के आदेश के बावजूद पुलिस बार-बार उसी आरोपपत्र को दाखिल करती रही। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-8 कन्हैया ने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप पत्र से हटाए गए जेठ धीरेंद्र के खिलाफ भी समन जारी करने के आदेश दिए। साथ ही पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं।
थाना एत्माद्दौला में पीड़िता ने वर्ष 2023 में अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट, हत्या के प्रयास और अश्लील हरकत के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तत्कालीन विवेचक ने विवेचना के दौरान अश्लील हरकत और हत्या के प्रयास की धाराएं हटा दीं। साथ ही जेठ धीरेंद्र सहित कुछ अन्य लोगों के नाम भी निकाल दिए। पति, सास और ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और डीपी एक्ट के तहत आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
पीड़िता ने अधिवक्ता के माध्यम से विवेचना पर आपत्ति जताई। अदालत ने 17 अगस्त 2024 को अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। इसके बावजूद विवेचक ने पूर्व विवेचक के आरोपपत्र को ही सही मानते हुए वही रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी। पीड़िता ने फिर प्रार्थनापत्र दिया। अदालत ने 5 मार्च, 2025 को दोबारा अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। इसके बाद भी पुलिस ने आरोपपत्र में कोई बदलाव नहीं किया और वही रिपोर्ट अदालत में पेश की।
विज्ञापन
पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व आरोपपत्र में आरोपी हरेंद्र पाल सिंह, महिपाल सिंह और गुड्डी देवी के साथ जेठ धीरेंद्र के खिलाफ खुद संज्ञान लिया। 14 अक्तूबर को पेश होने के लिए समन जारी करने के आदेश दिए। हत्या के प्रयास के आरोप के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उस धारा में संज्ञान नहीं लिया।
विज्ञापन
थाना एत्माद्दौला में पीड़िता ने वर्ष 2023 में अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट, हत्या के प्रयास और अश्लील हरकत के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तत्कालीन विवेचक ने विवेचना के दौरान अश्लील हरकत और हत्या के प्रयास की धाराएं हटा दीं। साथ ही जेठ धीरेंद्र सहित कुछ अन्य लोगों के नाम भी निकाल दिए। पति, सास और ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और डीपी एक्ट के तहत आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
विज्ञापन
पीड़िता ने अधिवक्ता के माध्यम से विवेचना पर आपत्ति जताई। अदालत ने 17 अगस्त 2024 को अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। इसके बावजूद विवेचक ने पूर्व विवेचक के आरोपपत्र को ही सही मानते हुए वही रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी। पीड़िता ने फिर प्रार्थनापत्र दिया। अदालत ने 5 मार्च, 2025 को दोबारा अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। इसके बाद भी पुलिस ने आरोपपत्र में कोई बदलाव नहीं किया और वही रिपोर्ट अदालत में पेश की।
विज्ञापन
पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व आरोपपत्र में आरोपी हरेंद्र पाल सिंह, महिपाल सिंह और गुड्डी देवी के साथ जेठ धीरेंद्र के खिलाफ खुद संज्ञान लिया। 14 अक्तूबर को पेश होने के लिए समन जारी करने के आदेश दिए। हत्या के प्रयास के आरोप के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उस धारा में संज्ञान नहीं लिया।