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सेहत से खिलवाड़ पर अदालत सख्त, वसूली 80 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति

Mon, 10 Jan 2022 11:46 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jan 2022 11:46 PM IST
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Court strict on playing with health, recovery of 80 thousand rupees compensation
कासगंज। जन सामान्य की सेहत से खिलवाड़ पर लोक अदालत बेहद सख्त है। अपंजीकृत लैब एवं क्लीनिक संचालकों पर कार्रवाई की गई है। बिना पंजीकरण के सिढ़पुरा में संचालित एक क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब को दो माह पहले सील करा चुकी स्थायी लोक अदालत ने अब 80 हजार रुपये की वसूली की है। यह धनराशि मुख्यमंत्री राहत कोष जमा कराई जाएगी।
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नवंबर माह में सिढ़पुरा के ओमवीर ने न्यायालय में मुकदमा दायर कराया। लिखा कि उनके पिता के इलाज में डॉ. आरके क्लीनिक एवं क्रिटिकल केयर सेंटर सिढ़पुरा ने लापरवाही की है और परख पैथोलॉजी लैब ने गलत रिपोर्ट दे दी है। सीएमओ को भी इसमें प्रतिवादी बनाया गया। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, सदस्य बसंत शर्मा, डॉ. सपना अग्रवाल की पूर्णपीठ ने सीएमओ को तलब किया। इस पर सीएमओ ने स्पष्ट किया कि यह लैब और क्लीनिक अपंजीकृत हैं।
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न्यायालय ने दोनों को ही सील करा दिया। उसके बाद मामला सुनवाई के लिए विचाराधीन किया। इस मामले में क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब संचालक न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए और 40-40 हजार रुपये मुख्यमंत्री राहतकोष में जमा करने को तैयार हुए। बीती 7 जनवरी को दोनों ने ही 40-40 हजार रुपये स्थायी लोक अदालत के बैंक खाते में जमा करा दिए। अब अदालत यह धनराशि जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराएगी। जिससे कि कोरोना की तीसरी लहर व डेंगू से निपटने के लिए सहयोग मिले।
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पीड़ित ने कर लिया फैसला, तो सीएमओ को बना दिया वादी
न्यायालय में मुकदमा दायर करने के बाद पीड़ित ने क्लीनिक व लैब संचालक से फैसला कर लिया। क्योंकि मामला जनमानस की सेहत से खिलवाड़ का था। इसलिए अदालत ने फैसला स्वीकार नहीं किया। अदालत ने इस मामले में मुकदमे के प्रतिवादी रहे मुख्य चिकित्साधिकारी को वादी बना दिया और फिर मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से मुकदमा दायर कर सुनवाई की। अदालत की सख्ती के बाद क्लीनिक व लैब संचालक मुख्यमंत्री राहत कोष में धनराशि जमा करने के लिए मजबूर हुए।
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