फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   court

मंजूर करने से पहले रोकी गई 47 एफआर

Wed, 01 Jul 2020 05:18 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 05:18 PM IST
विज्ञापन
court
मैनपुरी। आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं होने पर पुलिस द्वारा लगाई गई आधी अधूरी 47 एफआर (फाइनल रिपोर्ट) कोर्ट में मंजूर होने से पहले रोक दी गई हैं। पीड़ित का पक्ष जानने केे लिए रिपोर्ट लिखाने वालों को नोटिस भेजे गए हैं। पीड़ित द्वारा कोर्ट में अपना पक्ष रखने केे बाद ही फाइनल रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन

आपराधिक मामलों में रिपोर्ट लिखाए जाने के बाद घटना की पुष्टि नहीं होने पर पुलिस फाइल बंद करके एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाती है। फाइल बंद करने के बाद पुलिस एफआर को कोर्ट में मंजूरी के लिए भेजती है। पुलिस द्वारा लगाई गई आधी अधूरी 47 एफआर को कोर्ट ने मंजूर करने से पहले रोक दिया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर सुनवाई करने से पहले पीड़ित पक्ष की ओर से रिपोर्ट लिखाने वालों को नोटिस भेजे हैं। नोटिस में पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर पीड़ित को कोर्ट में अपना पक्ष रखने को कहा गया है। कोर्ट द्वारा तय की गई समय सीमा में ही पीड़ित को अपना पक्ष कोर्ट में रखना होगा। पीड़ित पक्ष को सुनने के बाद ही कोर्ट पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर अंतिम निर्णय लेगी।
विज्ञापन

विवेचक से भी मांगा गया जवाब
पुलिस द्वारा लगाई गई जिन एफआर को कोर्ट में मंजूरी देने से पहले रोका गया है। उनमें विवेचक से भी जवाब मांगा गया है। विवेचक को पीड़ित द्वारा लगाई गई रिपोर्ट पर लगाई गई एफआर के कारण को कोर्ट में स्पष्ट करना है। विवेचक के जवाब के बाद ही एफआर को कोर्ट में मंजूरी दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस-एक
थाना औंछा में नवंबर 2019 में राजेंद्र सिंह ने घर में घुसकर चोरी करने की रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने चोरी का खुलांसा नहीं होनेे पर फाइल बंद करके फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट में मंजूरी के लिए भेज दी। सीजेएम कोर्ट में एफआर मंजूर करने से पहले रोक दी गई है।
केस-दो
थाना बिछवां में रामप्रकाश सिंह ने जनवरी 2020 में खेत पर लगे नलकूप का सामान चोरी होने की रिपोर्ट लिखाई। पुलिस जांच में चोरी का खुलासा नहीं कर सकी। फाइल बंद करके एफआर लगाकर कोर्ट में भेज दी। आधी अधूरी एफआर होने पर कोर्ट में एफआर रोकी गई है।

कारण स्पष्ट होना चाहिए
थाने में लिखाई गई रिपोर्ट में घटना का खुलासा नहीं होने पर पुलिस को एफआर में कारण स्पष्ट करना चाहिए। वादी और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच करनी चाहिए। पीड़ित को सुनने के बाद ही एफआर लगानी चाहिए।
सुभाषचंद्र यादव, पूर्व डीजीसी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed