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पड़ोसी की नाली बंद करना पड़ा महंगा, कोर्ट ने 80 हजार रुपये देने के आदेश दिए
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कासगंज। पड़ोसी की नाली बंद करना महंगा पड़ गया। पीड़ित ने न्याय पाने के लिए स्थायी लोक अदालत का सहारा लिया। कोर्ट ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुना दिया। पीड़ित को 80 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति मिलेगी।
स्टेट बैंक कॉलोनी निवासी ललिता देवी सक्सेना के मकान की नाली उनके पड़ोसी रमेश बघेल ने बंद कर दी। नाली बंद हो जाने से पानी की निकासी बंद हो गई। जिससे उनके मकान के गिरने का खतरा पैदा हो गया। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों को डेंगू हो गया। पीड़िता ने न्याय पाने के लिए स्थायी लोक अदालत का सहारा लिया। इलाज व मकान की मरम्मत कराने में खर्च हुए 81 हजार रुपये दिलाने की मांग की। नगर पालिका के अवर अभियंता धर्मेंद्र कुमार एवं स्थायी लोक अदालत के सदस्य बसंत कुमार ने मौके का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण में नाली बंद पाई गई। इसके बाद पालिका ने नाली का निर्माण कराने के लिए ठेकेदार व लेवर को भेजा, लेकिन रमेश ने नाली का निर्माण यह कहकर नहीं होने दिया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ठेकेदार व लेवर को धमकी देकर भगा दिया। इसके बाद वे सामान लेकर वापस लौट आए। कोर्ट ने दोनों पक्षों के मध्य समझौता कराने के लिए एक प्रपत्र दिया जिस पर सहमति व असहमति मांगी गई, लेकिन आरोपी पक्ष ने इस प्रपत्र को वापस नहीं किया। वहीं प्रतिवादी पक्ष उपस्थित भी नहीं हुआ। इसके बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष एचजेएस चंद्र शेखर प्रसाद, सदस्य बसंत कुमार व डा. सपना अग्रवाल ने पीड़िता के पक्ष में एक पक्षीय फैसला सुना दिया। कोर्ट ने नगर पालिका को 30 दिन में नाली का निर्माण कराने एवं आरोपी रमेश को नाली निर्माण में बाधा उत्पन्न न करने तथा 80 हजार रुपये लोक अदालत के खाते में जमा करने के आदेश दिए। धनराशि निर्धारित समय में जमा न करने पर वादिया उक्त धनराशि को विधि प्रक्रिया से प्राप्त करने की अधिकारी होगी।
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स्टेट बैंक कॉलोनी निवासी ललिता देवी सक्सेना के मकान की नाली उनके पड़ोसी रमेश बघेल ने बंद कर दी। नाली बंद हो जाने से पानी की निकासी बंद हो गई। जिससे उनके मकान के गिरने का खतरा पैदा हो गया। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों को डेंगू हो गया। पीड़िता ने न्याय पाने के लिए स्थायी लोक अदालत का सहारा लिया। इलाज व मकान की मरम्मत कराने में खर्च हुए 81 हजार रुपये दिलाने की मांग की। नगर पालिका के अवर अभियंता धर्मेंद्र कुमार एवं स्थायी लोक अदालत के सदस्य बसंत कुमार ने मौके का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण में नाली बंद पाई गई। इसके बाद पालिका ने नाली का निर्माण कराने के लिए ठेकेदार व लेवर को भेजा, लेकिन रमेश ने नाली का निर्माण यह कहकर नहीं होने दिया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ठेकेदार व लेवर को धमकी देकर भगा दिया। इसके बाद वे सामान लेकर वापस लौट आए। कोर्ट ने दोनों पक्षों के मध्य समझौता कराने के लिए एक प्रपत्र दिया जिस पर सहमति व असहमति मांगी गई, लेकिन आरोपी पक्ष ने इस प्रपत्र को वापस नहीं किया। वहीं प्रतिवादी पक्ष उपस्थित भी नहीं हुआ। इसके बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष एचजेएस चंद्र शेखर प्रसाद, सदस्य बसंत कुमार व डा. सपना अग्रवाल ने पीड़िता के पक्ष में एक पक्षीय फैसला सुना दिया। कोर्ट ने नगर पालिका को 30 दिन में नाली का निर्माण कराने एवं आरोपी रमेश को नाली निर्माण में बाधा उत्पन्न न करने तथा 80 हजार रुपये लोक अदालत के खाते में जमा करने के आदेश दिए। धनराशि निर्धारित समय में जमा न करने पर वादिया उक्त धनराशि को विधि प्रक्रिया से प्राप्त करने की अधिकारी होगी।
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