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चंबल में 16 दिसंबर से जलीय जीवों की होगी गणना
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बाह। अगस्त माह में चंबल नदी में आई बाढ़ से बाह के 35 गांवों में भारी नुकसान हुआ था। नदी में संरक्षित घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के भी डाउन स्ट्रीम में बहकर पचनदा तक पहुंचने का अंदेशा जताया गया था। इसको पता करने के लिए वन विभाग 16 दिसंबर से होने जलीय जीवों की गणना की तैयारी में जुट गया है। गणना के आंकड़ों से विभाग को बाढ़ के प्रभाव का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
चंबल नदी में 1979 से दुनिया में लुप्त प्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। तीन राज्य एमपी, यूपी, राजस्थान में होकर बहने वाली चंबल नदी में जलीय जीवों का कुनबा साल दर साल बढ़ रहा है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि 16 दिसम्बर से चंबल में गणना का काम शुरू होगा। गणना के लिए वन कर्मियों की ड्यूटी लगाने के साथ ही तैयारियां पूरी कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि चंबल की बाढ़ के बाद यह पहली गणना होगी।
बाह। सर्दी के सीजन में बर्ष 2008 में चंबल नदी में 100 से ज्यादा घड़ियालों की मौत हुई थी। धौलपुर, बाह, भिंड, मुरैना और इटावा में घड़ियालों की मौत का राज जानने के लिए विदेशी विशेषज्ञ बुलाने पडे़ थे। तब से हर साल सर्दियों में घड़ियालों की गिनती के अलावा उनके विचरण और सेहत पर नजर रखने के लिए वन विभाग नियमित रूप से पेट्रोलिंग करता है।
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चंबल नदी में 1979 से दुनिया में लुप्त प्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। तीन राज्य एमपी, यूपी, राजस्थान में होकर बहने वाली चंबल नदी में जलीय जीवों का कुनबा साल दर साल बढ़ रहा है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि 16 दिसम्बर से चंबल में गणना का काम शुरू होगा। गणना के लिए वन कर्मियों की ड्यूटी लगाने के साथ ही तैयारियां पूरी कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि चंबल की बाढ़ के बाद यह पहली गणना होगी।
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बाह। सर्दी के सीजन में बर्ष 2008 में चंबल नदी में 100 से ज्यादा घड़ियालों की मौत हुई थी। धौलपुर, बाह, भिंड, मुरैना और इटावा में घड़ियालों की मौत का राज जानने के लिए विदेशी विशेषज्ञ बुलाने पडे़ थे। तब से हर साल सर्दियों में घड़ियालों की गिनती के अलावा उनके विचरण और सेहत पर नजर रखने के लिए वन विभाग नियमित रूप से पेट्रोलिंग करता है।
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