{"_id":"64ac2df2dfa7164c1708e695","slug":"cough-syrup-banned-yet-it-was-getting-ready-in-back-date-big-disclosure-in-raid-2023-07-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नकली दवाओं का कारोबार: खांसी का ये सिरप हो चुका था बैन, बैक डेट में हो रहा था तैयार; छापे में हुआ बड़ा खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकली दवाओं का कारोबार: खांसी का ये सिरप हो चुका था बैन, बैक डेट में हो रहा था तैयार; छापे में हुआ बड़ा खुलासा
Mon, 10 Jul 2023 09:42 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 10 Jul 2023 09:42 PM IST
सार
खांसी का कोडीन सिरप बैन हो जाने के बाद 10 गुना बढ़ गई थी मांग। इसके बाद 150 रुपये के कोडीन सिरप के 800 से 1000 रुपये दाम में मिल रहे थे।
विज्ञापन
पांच करोड़ की नकली दवाएं पकड़ीं,
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में नकली दवा बनाने का आरोपी विजय गोयल कोडीन सिरप बैन होने के बाद उसे बैक डेट में तैयार कराकर देश-विदेश में कालाबाजारी कर रहा था। छापे में जब्त सिरप और रैपर की जांच में यह खुलासा हुआ है।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि अवैध फैक्टरी में नकली कफ सिरप बैक डेट के मिले हैं। केंद्र सरकार ने जून माह में इसे बैन कर दिया। मांग बढ़ने पर विजय गोयल और नरेंद्र शर्मा ने नारकोटिक्स टीम को गच्चा देने के लिए नकली सिरप पर जून 2023 से पहले के निर्माण के रैपर लगा दिए। जब्त 7282 सिरप की शीशी पर 2022 में मैन्युफैक्चरिंग दर्शाई गई है। इसमें अधिकांश पर निर्माण की तिथि 5 मई 2022 अंकित है।
ये भी पढ़ें - Sweden Quran Burning: आगरा में प्रदर्शन, पुतला फूंका; पीएम मोदी से की स्वीडन से हर रिश्ता खत्म करने की मांग
विज्ञापन
विज्ञापन
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि अवैध फैक्टरी में नकली कफ सिरप बैक डेट के मिले हैं। केंद्र सरकार ने जून माह में इसे बैन कर दिया। मांग बढ़ने पर विजय गोयल और नरेंद्र शर्मा ने नारकोटिक्स टीम को गच्चा देने के लिए नकली सिरप पर जून 2023 से पहले के निर्माण के रैपर लगा दिए। जब्त 7282 सिरप की शीशी पर 2022 में मैन्युफैक्चरिंग दर्शाई गई है। इसमें अधिकांश पर निर्माण की तिथि 5 मई 2022 अंकित है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - Sweden Quran Burning: आगरा में प्रदर्शन, पुतला फूंका; पीएम मोदी से की स्वीडन से हर रिश्ता खत्म करने की मांग
विज्ञापन
150 रुपये एमआरपी, 1000 रुपये तक बेचे
औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार यादव ने बताया कि कोडीन सिरप को 20-30 साल पहले खांसी के लिए डॉक्टर मरीजों को दूसरी शीशी में घोल बनाकर देते थे। कफ सिरप आने पर डॉक्टरों ने इसका चलन बंद कर दिया। ऐसे में नशे के लिए इसकी कालाबाजारी होने लगी। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, हरियाणा में नेटवर्क बनने के बाद बांग्लादेश-नेपाल तक कालाबाजारी से 10 गुना तक मांग बढ़ गई। इससे 150 रुपये एमआरपी वाले सिरप को 800-1000 रुपये तक बेचने लगे।ये भी पढ़ें - पति बना शैतान: 'मत मारो मुझे...', मिन्नतें करती रही घरवाली, हाथ जोड़े-पैर पड़े; देवर और ससुर भी न पसीजे