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कोरोना जांच के लिए सैंपल देने के बाद 'गायब' हुआ मरीज, पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर मचा हड़कंप

Fri, 17 Jul 2020 01:38 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 17 Jul 2020 01:38 AM IST
सार

  • जिला अस्पताल व एसएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच के लिए सैंपल देने आए 335 मरीजों ने नाम-पते फर्जी लिखवाए थे। इनमें 100 से ज्यादा ऐसे मरीज थे जो पॉजिटिव निकले और 48 से 72 घंटे में ट्रेस हो सके। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने अब सैंपलिंग के समय ओटीपी सिस्टम अनिवार्य किया है।

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coronavirus patient hiding in temple after covid test in agra
एसएन मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में भर्ती मरीज कोरोना जांच के लिए सैंपल देने के बाद बिना बताए कहीं चला गया। जब उसकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो हड़कंप मच गया। बुधवार को रैपिड रेस्पोंस टीम मरीज की तलाश में घूमती रही। कई घंटे बाद वो एक मंदिर में मिला। टीम ने उसे क्वारंटीन सेंटर में भर्ती कराया है। 

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जानकारी के अनुसार शमसाबाद रोड निवासी 25 वर्षीय युवक बुखार आने पर 13 जुलाई को एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुआ था। यहां कोरोना जांच के लिए उसका सैंपल लिया गया और आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया गया। यहां से वो बिना बताए कहीं चला गया। कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद रैपिड रेस्पोंस टीम उसकी तलाश में जुट गई। 
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युवक ने जो मोबाइल नंबर दर्ज कराया था वो बंद था। उसके परिजनों से संपर्क किया गया। वो भी गुमराह करते रहे। कई घंटे की तलाश और पूछताछ के बाद पता चला कि मरीज इरादतनगर के एक मंदिर में है। टीम ने पुलिस के साथ वहां पहुंच गई। वो मंदिर में छिपकर बैठा था। टीम उसे अपने साथ ले आई, उसे क्वारंटीन सेंटर में भर्ती कराया गया है। 

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सैंपल देने आए 335 मरीजों के नाम-पते मिले थे फर्जी

जिला अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच के लिए सैंपल देने आए 335 मरीजों ने नाम-पते फर्जी लिखवाए थे। इनमें 100 से ज्यादा ऐसे मरीज थे जो पॉजिटिव निकले और 48 से 72 घंटे में ट्रेस हो सके। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने अब सैंपलिंग के समय ओटीपी सिस्टम अनिवार्य किया है।

आगरा में 1414 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। 30 हजार से ज्यादा मरीजों के सैंपलिंग की गई है। प्रशासन का दावा है कि उसने सभी पॉजिटिव मरीजों को ट्रेस कर लिया था। लेकिन पुलिस और रैपिड रिस्पांस टीम की रिपोर्ट में 335 मरीज बीमारी फैलाने के दोषी मिले हैं। 

एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि पॉजिटिव निकलने के बाद इन मरीजों को ट्रेस करने में 48 से 72 घंटे लगे। 235 मरीजों को 48 घंटे में पकड़ा जा सका।  इनमें 80 से ज्यादा ऐसे मरीज थे, जिन्होंने आधा-अधूरा पता दर्ज कराया। जब टीम वहां पहुंची तो लापता मिले। 

36 घंटे की है पाबंदी

डीएम प्रभु एन सिंह पहले ही यह चेतावनी दे चुकी है कि सैंपल देने के बाद अब 36 घंटे तक कोई मरीज जिले से बाहर नहीं जा सकता। इसके बावजूद इस तरह के मामले आ रहे हैं। डीएम ने कहा कि प्रत्येक मरीज का ब्योरा सैंपलिंग के समय सत्यापित किया जा रहा है। 
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