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आगरा में कोरोना: वायरस का म्यूटेशन बना घातक, दूसरी लहर के मृतकों में 47 युवा

Sun, 06 Jun 2021 12:38 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 06 Jun 2021 12:38 PM IST
सार

आगरा में दूसरी लहर में कोरोना वायरस म्यूटेट होकर बेहद खतरनाक हो गया। तेजी से संक्रमित करने के साथ जानलेवा साबित हुआ। इससे 21 से 40 साल के 47 युवाओं की मौत हुई।
 

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coronavirus mutation became fatal in second wave in agra
आगरा में कोरोना: एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड के बाहर खड़ा स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में कोरोना वायरस की पहली लहर के दौरान कुल 10572 संक्रमितों में से 21 से 40 साल के 4408 युवा संक्रमित हुए, इनमें से 21 की मौत हो गई। वहीं दूसरी लहर में कुल 14913 संक्रमितों में से 6695 युवा थे और 47 की मौत हुई। (ये आंकड़े 28 मई तक के प्रशासन द्वारा दिए गए हैं।) 

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एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड आईसीयू के प्रभारी डॉ. राजीव पुरी ने बताया कि बीते दो महीनों में लगभग 800 मरीज कोविड अस्पताल में भर्ती हुए। हालत गंभीर होने पर इसमें से करीब 300 को आईसीयू में इलाज करना पड़ा। 
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इनमें 21 से 40 साल की उम्र के लगभग आधे मरीज रहे। इनमें अच्छी फिटनेस वाले युवा भी शामिल रहे। एसएन के माइक्रो बायोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव सिंह ने पहली लहर के बाद वायरस म्यूटेट होकर दूसरी लहर में बेहद घातक साबित हुआ। संक्रमण फैलाने की दर कई गुना रही। 

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पूरा परिवार संक्रमित
कोरोना की दूसरी लहर में लगभग पूरा परिवार संक्रमित हुआ। यहां तक कि एक या दो सदस्यों को अस्पताल में भी रहना पड़ा। पहली लहर में सभी सदस्य संक्रमित नहीं हुए, अधिकांश होम आइसोलेशन में ही ठीक हो गए। 

80 फीसदी तक फेफड़े खराब
वायरस सीधे फेफड़ों तक पहुंचा और शुरू के तीन-चार दिन में ही 30 से 50 फीसदी फेफड़े संक्रमित कर दिए। कइयों में 80 फीसदी तक फेफड़े खराब मिले। मरीजों को आईसीयू में रखना पड़ा, हाई फ्लो ऑक्सीजन भी देनी पड़ी। 

ब्लैक फंगस
पहली लहर में पोस्ट कोविड मरीजों में इतने साइड इफेक्ट नहीं थे, लेेकिन इस बार मरीज के ठीक होने के बाद भी खतरा बना है। ब्लैक, येलो, व्हाइट फंगस के मरीज मिले, आंख तक निकालनी पड़ रही हैं, मौत भी हो रहीं हैं। 

कोरोना से ठीक होने के बाद भी साइड इफेक्ट
संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. अजित चाहर ने बताया कि इस बार कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद साइड इफेक्टज्यादा देखने मिल रहे। ब्लैक फंगस, आंखों की रोशनी कम होना, शॉर्ट मेमोरी लॉस, कमजोरी है जो मरीज में तीन महीने से अधिक समय तक रह सकती है।

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