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कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी रिपोर्ट दबाए रहा अस्पताल, लापरवाही से गई मरीज की जान
Sat, 05 Sep 2020 01:52 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 05 Sep 2020 01:52 PM IST
सार
- बिल बढ़ाने के लिए मरीज की रिपोर्ट दबाए रहा अस्पताल
- मृतक के परिजनों ने अस्पताल पर लगाया यह गंभीर आरोप
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अस्पताल के बाहर खड़ी पुलिस और परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने के बाद भी एक निजी अस्पताल में बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक के परिजनों का कहना है कि संक्रमण से ठीक होने के बाद अस्पताल ने तीन दिन तक मरीज की रिपोर्ट दबाकर रखी। शुक्रवार की रात अस्पताल स्टाफ की गलती से ऑक्सीजन न मिलने के कारण बुजुर्ग मरीज ने दम तोड़ दिया।
मामला थाना हरीपर्वत क्षेत्र के एक अस्पताल का है। यहां 16 अगस्त को सदर क्षेत्र के मधु नगर निवासी सुनील शर्मा ने अपने पिता रामभज शर्मा को कोविड-19 के इलाज के लिए भर्ती कराया था। रामभज के पोते डॉक्टर पुनीत पाराशर का आरोप है कि मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन अस्पताल ने बिल बढ़ाने के लिए तीन दिन तक दबाए रखी।
10 सिलेंडर बदले, सभी खाली निकले
इस बात का पता चलने पर परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सक से कहा तो उन्होंने मरीज को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कही। उनसे कहा गया कि अभी मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है। इसके बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ मरीज को नीचे लाया गया तो उनके सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म हो गई। जिस एम्बुलेंस को मरीज के लिए अस्पताल द्वारा मंगवाया गया था, उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर ही नहीं था।
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यह भी पढ़ें- वायरल ऑडियो: निजी अस्पताल में कोरोना इलाज के रोज 60 हजार रुपये, कहा- यहां सरकारी नियम नहीं चलते
आरोप है कि परिवार के सामने अस्पताल स्टाफ ने एक-एक करके 10 ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए, लेकिन सभी खाली निकले। समय से ऑक्सीजन न मिलने से मरीज की मौत हो गई। इसके बाद भी मृतक के परिवार को 10 लाख 51 हजार का बिल थमा दिया गया है। इस पर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। पुलिस बुला ली। मृतक के बेटे ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
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मामला थाना हरीपर्वत क्षेत्र के एक अस्पताल का है। यहां 16 अगस्त को सदर क्षेत्र के मधु नगर निवासी सुनील शर्मा ने अपने पिता रामभज शर्मा को कोविड-19 के इलाज के लिए भर्ती कराया था। रामभज के पोते डॉक्टर पुनीत पाराशर का आरोप है कि मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन अस्पताल ने बिल बढ़ाने के लिए तीन दिन तक दबाए रखी।
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10 सिलेंडर बदले, सभी खाली निकले
इस बात का पता चलने पर परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सक से कहा तो उन्होंने मरीज को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कही। उनसे कहा गया कि अभी मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है। इसके बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ मरीज को नीचे लाया गया तो उनके सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म हो गई। जिस एम्बुलेंस को मरीज के लिए अस्पताल द्वारा मंगवाया गया था, उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर ही नहीं था।
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आरोप है कि परिवार के सामने अस्पताल स्टाफ ने एक-एक करके 10 ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए, लेकिन सभी खाली निकले। समय से ऑक्सीजन न मिलने से मरीज की मौत हो गई। इसके बाद भी मृतक के परिवार को 10 लाख 51 हजार का बिल थमा दिया गया है। इस पर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। पुलिस बुला ली। मृतक के बेटे ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।