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Agra News: नौ दिन में 41 मरीजों में हो चुकी है कोरोना की पुष्टि
Fri, 14 Apr 2023 11:24 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 14 Apr 2023 11:24 PM IST
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कासगंज। कोरोना के बढ़ते मामलों की रोकथाम पर विभाग की सुस्ती भारी पड़ने की आशंका है। जिले में कोरोना वैरिंएंट की सक्रियता का पता लगाने के लिए विभाग ने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए अभी तक एक भी सैंपल प्रयोगशाला नहीं भेजा है। जबकि 9 दिन में 41 मरीज सामने आ चुके हैं।
जिले में वैसे तो काफी दिनों से लोगों में कोरोना के लक्षण सामने आ रहे थे, लेकिन 16 दिन तक लैब बंद रहने से जांच नहीं हो सकी। प्रयोगशाला चालू होने के बाद 5 अप्रैल को कोरोना का पहला मामला सामने आया। इसके बाद संख्या में तेजी से इजाफा होता चला गया। वर्तमान में कोरोना संक्रमित मिल रहे मरीज किस वैरिएंट की चपेट में हैं, इसका अब तक पता नहीं चल सका है।
कोरोना अपना लगातार स्वरूप बदल रहा है। एक्सबीबी 1.16 वैरिएंट इस समय सबसे ज्यादा सक्रिय माना जा रहा है। इसकी संक्रमण दर भी अधिक बताई जा रही है। कोरोना संक्रमित मरीजों में नए नए लक्षण भी सामने आ रहे है। शासन ने संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिंग के निर्देश दिए हैं ताकि वैरिएंट का पता लगाकर उसकी रोकथाम के उपाय किए जा सकें।
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जिले में जीनोम सीक्वेंसिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। लखनऊ की प्रयोगशाला में सैंपल भेजकर जीनोम सीक्वेंसिंग वैरिंएंट का पता लगाया जा सकता है। कोरोना की दस्तक हुए 9 दिन हो चुके हैं, लेकिन विभाग ने अभी तक एक सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नहीं लिया है। जिससे अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि जिले में कौनसा वैरिएंट सक्रिय है।
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जिले में वैसे तो काफी दिनों से लोगों में कोरोना के लक्षण सामने आ रहे थे, लेकिन 16 दिन तक लैब बंद रहने से जांच नहीं हो सकी। प्रयोगशाला चालू होने के बाद 5 अप्रैल को कोरोना का पहला मामला सामने आया। इसके बाद संख्या में तेजी से इजाफा होता चला गया। वर्तमान में कोरोना संक्रमित मिल रहे मरीज किस वैरिएंट की चपेट में हैं, इसका अब तक पता नहीं चल सका है।
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कोरोना अपना लगातार स्वरूप बदल रहा है। एक्सबीबी 1.16 वैरिएंट इस समय सबसे ज्यादा सक्रिय माना जा रहा है। इसकी संक्रमण दर भी अधिक बताई जा रही है। कोरोना संक्रमित मरीजों में नए नए लक्षण भी सामने आ रहे है। शासन ने संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिंग के निर्देश दिए हैं ताकि वैरिएंट का पता लगाकर उसकी रोकथाम के उपाय किए जा सकें।
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जिले में जीनोम सीक्वेंसिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। लखनऊ की प्रयोगशाला में सैंपल भेजकर जीनोम सीक्वेंसिंग वैरिंएंट का पता लगाया जा सकता है। कोरोना की दस्तक हुए 9 दिन हो चुके हैं, लेकिन विभाग ने अभी तक एक सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नहीं लिया है। जिससे अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि जिले में कौनसा वैरिएंट सक्रिय है।