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Agra: संविदा कर्मी का उत्पीड़न...जान से मारने की धमकी, विश्वविद्यालय के चार कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किल
Tue, 28 Oct 2025 09:40 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 28 Oct 2025 09:40 PM IST
सार
संविदा कर्मचारी का आरोप है कि वह ऑफिस सुपरिटेंडेंट से मिलने पहुंचे तो जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की। विरोध करने पर कर्मचारियों ने मारपीट कर ऑफिस से बाहर निकाल दिया।
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आगरा विश्वविद्यालय।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व संविदा कर्मचारी ने दलित उत्पीड़न सहित अन्य आरोपों के मामले में 4 कर्मचारियों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट पुष्कर उपाध्याय ने परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामले में वादी के बयान 30 अक्तूबर को दर्ज किए जाएंगे।
थाना सिकंदरा क्षेत्र के राधिका विहार निवासी डॉ. अनिल कुमार ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि वे पूर्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग में संविदा पर कार्यरत थे। उन्होंने अपनी संविदा अवधि बढ़ाने और स्थायीकरण के लिए कुलाधिपति को प्रार्थना पत्र दिया था।
इस संबंध में निस्तारण के लिए एक समिति का गठन किया गया था। एक जुलाई 2024 को जब वे आवासीय इकाई के ऑफिस सुपरिटेंडेंट मधु सूदन कृष्ण से मिलने पहुंचे तो उन्होंने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की। विरोध करने पर ऑफिस कर्मचारियों सौरभ दुबे और शिवम सिंह सहित अन्य ने मारपीट कर उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया।
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इसके अलावा दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। इस पर डॉ. अनिल ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस आयुक्त से शिकायत की। अदालत ने मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से आख्या तलब की है।
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थाना सिकंदरा क्षेत्र के राधिका विहार निवासी डॉ. अनिल कुमार ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि वे पूर्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग में संविदा पर कार्यरत थे। उन्होंने अपनी संविदा अवधि बढ़ाने और स्थायीकरण के लिए कुलाधिपति को प्रार्थना पत्र दिया था।
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इस संबंध में निस्तारण के लिए एक समिति का गठन किया गया था। एक जुलाई 2024 को जब वे आवासीय इकाई के ऑफिस सुपरिटेंडेंट मधु सूदन कृष्ण से मिलने पहुंचे तो उन्होंने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की। विरोध करने पर ऑफिस कर्मचारियों सौरभ दुबे और शिवम सिंह सहित अन्य ने मारपीट कर उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया।
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इसके अलावा दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। इस पर डॉ. अनिल ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस आयुक्त से शिकायत की। अदालत ने मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से आख्या तलब की है।