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कमीशन @ 17%, तब ठेका पक्का समझो
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 08 Jul 2015 02:25 AM IST
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होता। जलकल विभाग इसका ताजा उदाहरण है। यहां बेखौफ होकर अधिकारी कमीशन का
खेल रहे हैं। भ्रष्टाचार की पोल खोलता ऐसा ही एक ऑडियो टेप लीक हुआ है।
इसमें विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारी ठेकेदार से ‘डीलिंग’ कर रहे हैं। इसमें
टेंडर की फाइल साइन करने के लिए ठेकेदार से 17 फीसदी कमीशन मांगा गया है।
इसका एक हिस्सा नगर निगम के अधिकारी को भी पहुंचाने की बात कही गई है।
कमीशन की रकम कहां और कैसे देनी है, इसका रास्ता भी अधीनस्थ अधिकारी ने ही
ठेकेदार को बताया है।
जलकल शहर में पेयजल आपूर्ति भले ही न कर पा रहा हो, लेकिन भ्रष्टाचार के ‘खेल’ में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। लीक हुए ऑडियो टेप की बातचीत के अनुसार, पिछले दिनों पानी की पाइपों के लिए विभाग ने टेंडर किया था। यह टेंडर जिस ठेकेदार को दिया गया, वह अचानक आर्थिक तंगी में आ गया। विभाग जिस क्वालिटी के पाइप चाह रहा था, उसका रेट ज्यादा था। ऐसे में ठेकेदार जलकल के वरिष्ठ अधिकारी से कमीशन में रिआयत देने की गुजारिश करने पहुंचा। कमीशन और पाइपों की क्वालिटी को लेकर अधिकारी और ठेकेदार के बीच लंबी बातचीत हुई। ठेकेदार ने अधिकारी से 17 फीसदी कमीशन को कम करने को कहा। मगर, अधिकारी ने उसे तमाम गणित समझा दिया। बताया कि फाइल पर साइन करने के लिए इसका एक भाग नगर निगम अधिकारी को भी देना पड़ता है। ऐसे में इससे कम कमीशन पर काम नहीं हो सकता।
यहां बात नहीं बनी तो ठेकेदार जलकल के ही दूसरे अधिकारी के पास पहुुंचा। इस अधिकारी के साथ भी बातचीत का ऑडियो टेप किया गया। इसके मुताबिक, इस अधिकारी ने साफ शब्दों में अपने वरिष्ठ अधिकारी के बारे कहा है कि वह ज्यादा खाऊ है। साथ ही ठेकेदार को फाइल साइन कराने के लिए उसने सुझाव भी दिया कि एक लिफाफा लेकर वह उक्त अधिकारी के घर पहुंच जाए। इस ऑडियो टेप ने जलकल में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।
टेप में वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत के कुछ अंश
ठेकेदार : ... हम बहुत परेशान हैं, हमारी फाइल पास करा दीजिए।
वरिष्ठ अधिकारी : आप ही काम अटकाए हो। अगर कोई अड़चन आ रही है तो उसका रास्ता निकाला जाएगा।
ठेकेदार : डिपार्टमेंट का जो 17 फीसदी खर्चा है, वह ज्यादा है।
वरिष्ठ अधिकारी : पाइप सप्लाई में 40 रुपये का डिफरेंस भी तो आ रहा है। इसको मैं कहीं से मीटआउट....। वैसे भी यह 40 रुपये से ज्यादा तो नहीं है।
अधीनस्थ अधिकारी से बातचीत के कुछ अंश
ठेकेदार : मैं धर्म संकट में चल रहा हूं, परेशान हूं।
अधीनस्थ अधिकारी : देखो, मैने पहले ही बता दिया ..... ज्यादा खाऊ है। बोला न, उनसे कह देना। अभी मैं 15 दूंगा। सीधे उन्हीं को ऑफर कर दो। अकेले ही जाना।
ठेकेदार : मैं अपने बेटे को तो साथ ले जाऊं।
अधीनस्थ अधिकारी : अरे यार, ले जाओ। कह देना, अभी इतना ही कर सकता हूं। अभी लिफाफा ले जाओ, तुरंत साइन हो जाएंगे।
ठेकेदार : चार लाख रुपये का चेक मिल जाए तो...
अधीनस्थ अधिकारी : व्यापारी आदमी हो, क्यों पचड़े में पड़ रहे हो। ज्यादा बात फैल रही है। देना तो तुम्हें इतना ही है। अभी घर चले जाओ।
नया नहीं है भ्रष्टाचार का खेल
जलकल में भ्रष्टाचार का भले ही यह पहला ऑडियो टेप लीक हुआ हो, लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें यहां काफी गहरी हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 28 इंच की पाइप लाइन के लिए विभाग ने 52 लाख रुपये के कॉलर का टेंडर किया था। इसमें कुछ ही कॉलर बदले गए थे। वह भी निम्न गुणवत्ता के थे। यह मामला नगर निगम सदन में भी गूंजा था। इस पर सदन में इस मामले के अलावा पिछले सालों में अन्य खरीदे गए सामानों की जांच के लिए समिति गठित करने पर सहमति बनी थी।
ऑडियो टेप के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कोई टेप है भी तो वह फेक होगा। इसकी जांच होनी चाहिए।
- मंजू गुप्ता, महाप्रबंधक, जलकल
जलकल शहर में पेयजल आपूर्ति भले ही न कर पा रहा हो, लेकिन भ्रष्टाचार के ‘खेल’ में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। लीक हुए ऑडियो टेप की बातचीत के अनुसार, पिछले दिनों पानी की पाइपों के लिए विभाग ने टेंडर किया था। यह टेंडर जिस ठेकेदार को दिया गया, वह अचानक आर्थिक तंगी में आ गया। विभाग जिस क्वालिटी के पाइप चाह रहा था, उसका रेट ज्यादा था। ऐसे में ठेकेदार जलकल के वरिष्ठ अधिकारी से कमीशन में रिआयत देने की गुजारिश करने पहुंचा। कमीशन और पाइपों की क्वालिटी को लेकर अधिकारी और ठेकेदार के बीच लंबी बातचीत हुई। ठेकेदार ने अधिकारी से 17 फीसदी कमीशन को कम करने को कहा। मगर, अधिकारी ने उसे तमाम गणित समझा दिया। बताया कि फाइल पर साइन करने के लिए इसका एक भाग नगर निगम अधिकारी को भी देना पड़ता है। ऐसे में इससे कम कमीशन पर काम नहीं हो सकता।
यहां बात नहीं बनी तो ठेकेदार जलकल के ही दूसरे अधिकारी के पास पहुुंचा। इस अधिकारी के साथ भी बातचीत का ऑडियो टेप किया गया। इसके मुताबिक, इस अधिकारी ने साफ शब्दों में अपने वरिष्ठ अधिकारी के बारे कहा है कि वह ज्यादा खाऊ है। साथ ही ठेकेदार को फाइल साइन कराने के लिए उसने सुझाव भी दिया कि एक लिफाफा लेकर वह उक्त अधिकारी के घर पहुंच जाए। इस ऑडियो टेप ने जलकल में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।
टेप में वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत के कुछ अंश
ठेकेदार : ... हम बहुत परेशान हैं, हमारी फाइल पास करा दीजिए।
वरिष्ठ अधिकारी : आप ही काम अटकाए हो। अगर कोई अड़चन आ रही है तो उसका रास्ता निकाला जाएगा।
ठेकेदार : डिपार्टमेंट का जो 17 फीसदी खर्चा है, वह ज्यादा है।
वरिष्ठ अधिकारी : पाइप सप्लाई में 40 रुपये का डिफरेंस भी तो आ रहा है। इसको मैं कहीं से मीटआउट....। वैसे भी यह 40 रुपये से ज्यादा तो नहीं है।
अधीनस्थ अधिकारी से बातचीत के कुछ अंश
ठेकेदार : मैं धर्म संकट में चल रहा हूं, परेशान हूं।
अधीनस्थ अधिकारी : देखो, मैने पहले ही बता दिया ..... ज्यादा खाऊ है। बोला न, उनसे कह देना। अभी मैं 15 दूंगा। सीधे उन्हीं को ऑफर कर दो। अकेले ही जाना।
ठेकेदार : मैं अपने बेटे को तो साथ ले जाऊं।
अधीनस्थ अधिकारी : अरे यार, ले जाओ। कह देना, अभी इतना ही कर सकता हूं। अभी लिफाफा ले जाओ, तुरंत साइन हो जाएंगे।
ठेकेदार : चार लाख रुपये का चेक मिल जाए तो...
अधीनस्थ अधिकारी : व्यापारी आदमी हो, क्यों पचड़े में पड़ रहे हो। ज्यादा बात फैल रही है। देना तो तुम्हें इतना ही है। अभी घर चले जाओ।
नया नहीं है भ्रष्टाचार का खेल
जलकल में भ्रष्टाचार का भले ही यह पहला ऑडियो टेप लीक हुआ हो, लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें यहां काफी गहरी हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 28 इंच की पाइप लाइन के लिए विभाग ने 52 लाख रुपये के कॉलर का टेंडर किया था। इसमें कुछ ही कॉलर बदले गए थे। वह भी निम्न गुणवत्ता के थे। यह मामला नगर निगम सदन में भी गूंजा था। इस पर सदन में इस मामले के अलावा पिछले सालों में अन्य खरीदे गए सामानों की जांच के लिए समिति गठित करने पर सहमति बनी थी।
ऑडियो टेप के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कोई टेप है भी तो वह फेक होगा। इसकी जांच होनी चाहिए।
- मंजू गुप्ता, महाप्रबंधक, जलकल