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सीएम ने पीएम से मांगी जूता कारीगरों के लिए मजदूरी
सीएम ने पीएम से मांगी जूता कारीगरों के लिए मजदूरी
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:11 AM IST
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दीप प्रज्जवलित करते सीएम
- फोटो : amar ujala
देश के 65 फीसदी लोगों को जूता पहना रहे आगरा के जूता उद्योग में जुड़े लाखों कारीगरों के सामने नोटबंदी से रोजी-रोटी का संकट आ गया है। आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चर्स एंड एक्सपोर्टर्स चेंबर की मांग पर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आर्थिक संकट से निजात दिलाने की मांग की है। सीएम ने पीएम से जूता मजदूरी देने के लिए फैक्ट्री मालिकों को कैश निकासी की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पत्र में कहा है कि फुटवियर उद्योग में मजदूरों को दैनिक मजदूरी नहीं मिल पा रही है। 500-एक हजार रुपये के नोट बंद होने से प्रदेश भर की व्यवसायिक, निर्यातक गतिविधियां ठप हैं। बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि वह उद्योगपतियों के पुराने औसत को देखते हुए मजदूरी बांटने के लिए जरूरी नगदी उपलब्ध कराएं। मजदूरी न मिलने से न केवल निर्यात के आर्डर पूरे होने में मुश्किल आएगी, बल्कि देश की छवि भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित होगी।
असोम में मजदूरों की लिस्ट से मिली नगदी
असोम में चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए केंद्र सरकार ने बीते सप्ताह नोट बंदी के तुरंत बाद ही यह व्यवस्था दी थी कि बागानों के संचालक मजदूरों की लिस्ट कलेक्टर या डीसी से सत्यापित कराकर बैंक में देंगे। कैश निकासी की लिमिट के उलट उतना कैश बैंक उपलब्ध करा देगा। जूता निर्यातक यही व्यवस्था आगरा में भी चाहते हैं। मजदूरों की सूची और शनिवार को बांटने के लिए उनके साप्ताहिक वेतन के लिए जरूरी नगदी दिलाने की मांग फैक्ट्री मालिक उठा रहे हैं। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल को मीट एट आगरा में यह सुझाव दिया गया था, लेकिन 8 दिन बाद भी वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक से समस्या का समाधान नहीं आ सका।
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हमें तुरंत नगदी की जरूरत है, ताकि मजदूरों का भुगतान किया जा सके। हमारे निर्यात के आर्डर समय पर पूरे होने हैं तो उसके लिए मजदूरी समय पर देनी पड़ेगी, अन्यथा देश की साख और निर्यात पर असर पड़ सकता है।
पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट है। दैनिक मजदूरी बांटने के लिए जैसा असोम में किया है, ठीक वैसी ही छूट आगरा के जूता उद्योग को चाहिए। नोटबंदी का फैसला अच्छा है, लेकिन यह व्यवहारिक दिक्कतें दूर की जानी चाहिए
राजेश सहगल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एफमेक
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पत्र में कहा है कि फुटवियर उद्योग में मजदूरों को दैनिक मजदूरी नहीं मिल पा रही है। 500-एक हजार रुपये के नोट बंद होने से प्रदेश भर की व्यवसायिक, निर्यातक गतिविधियां ठप हैं। बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि वह उद्योगपतियों के पुराने औसत को देखते हुए मजदूरी बांटने के लिए जरूरी नगदी उपलब्ध कराएं। मजदूरी न मिलने से न केवल निर्यात के आर्डर पूरे होने में मुश्किल आएगी, बल्कि देश की छवि भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित होगी।
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असोम में मजदूरों की लिस्ट से मिली नगदी
असोम में चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए केंद्र सरकार ने बीते सप्ताह नोट बंदी के तुरंत बाद ही यह व्यवस्था दी थी कि बागानों के संचालक मजदूरों की लिस्ट कलेक्टर या डीसी से सत्यापित कराकर बैंक में देंगे। कैश निकासी की लिमिट के उलट उतना कैश बैंक उपलब्ध करा देगा। जूता निर्यातक यही व्यवस्था आगरा में भी चाहते हैं। मजदूरों की सूची और शनिवार को बांटने के लिए उनके साप्ताहिक वेतन के लिए जरूरी नगदी दिलाने की मांग फैक्ट्री मालिक उठा रहे हैं। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल को मीट एट आगरा में यह सुझाव दिया गया था, लेकिन 8 दिन बाद भी वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक से समस्या का समाधान नहीं आ सका।
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हमें तुरंत नगदी की जरूरत है, ताकि मजदूरों का भुगतान किया जा सके। हमारे निर्यात के आर्डर समय पर पूरे होने हैं तो उसके लिए मजदूरी समय पर देनी पड़ेगी, अन्यथा देश की साख और निर्यात पर असर पड़ सकता है।
पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट है। दैनिक मजदूरी बांटने के लिए जैसा असोम में किया है, ठीक वैसी ही छूट आगरा के जूता उद्योग को चाहिए। नोटबंदी का फैसला अच्छा है, लेकिन यह व्यवहारिक दिक्कतें दूर की जानी चाहिए
राजेश सहगल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एफमेक