{"_id":"6711d37a203778c4a104a97b","slug":"clouds-became-villains-in-the-sight-of-taj-mahal-in-the-moon-light-stones-did-not-shine-2024-10-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Taj in Moon Light: चांदनी रात में ताज का दीदार...जैसा सुना, वैसा न पाया, इस वजह से मायूस हो गए पर्यटक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Taj in Moon Light: चांदनी रात में ताज का दीदार...जैसा सुना, वैसा न पाया, इस वजह से मायूस हो गए पर्यटक
Fri, 18 Oct 2024 08:48 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 18 Oct 2024 08:48 AM IST
सार
चांदनी रात में धवल संगमरमरी ताजमहल के दीदार का सपना अधूरा रह गया। दूसरे दिन भी चांद बादलों में छिपा रहा, जिसकी वजह से सैलानी मायूस हो गए।
विज्ञापन
चांदनी रात में ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी में दमकते श्वेत और संगमरमरी ताजमहल के साथ सेल्फी लेने की चाहत पूरी नहीं हो सकी। दूसरे दिन भी चांद बादलों में छिपा रहा। सैलानियों ने मोबाइल कैमरे से सेल्फी तो ली लेकिन ताज का अक्स खिलकर सामने न आ सका।
विज्ञापन
यमुना नदी के किनारे एडीए व्यू पॉइंट के सैलानी हों या ताज के अंदर रॉयल गेट से दीदार के लिए पहुंचे सैलानी। किसी को उम्मीद के मुताबिक ताजमहल का दीदार नहीं हो सका। एएसआई के टिकट पर पूरे 400 सैलानी बृहस्पतिवार को आए। व्यू पॉइंट पर 125 सैलानियों ने ताज को रात में निहारा। रात 11 बजे के बाद कुछ रोशनी बढ़ी और बादल हटे, तब ताज नजर आया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जैसा सुना, वैसा न पाया
जयपुर से आईं तन्वी अग्रवाल ने बताया कि जैसा सुना था, चांदनी रात में ताज को वैसा न पाया। सेल्फी लेने पर ताजमहल ही नजर नहीं आया। ताज को देखने के लिए दूरी ज्यादा है। मुख्य गुंबद तक जाने की अनुमति होनी चाहिए। रायपुर से आए राजेंद्र सिंह ने बताया कि मथुरा के मंदिरों के बाद ताजमहल देखने आए थे। बचपन में एक बार ताज पर चमकी मेले में आए थे। तब लाखों की भीड़ थी। अब नजारा बदल गया है। पहले गुंबद तक घूमे थे, पर इस बार 15 मिनट भी नहीं रुकने दिया।
जयपुर से आईं तन्वी अग्रवाल ने बताया कि जैसा सुना था, चांदनी रात में ताज को वैसा न पाया। सेल्फी लेने पर ताजमहल ही नजर नहीं आया। ताज को देखने के लिए दूरी ज्यादा है। मुख्य गुंबद तक जाने की अनुमति होनी चाहिए। रायपुर से आए राजेंद्र सिंह ने बताया कि मथुरा के मंदिरों के बाद ताजमहल देखने आए थे। बचपन में एक बार ताज पर चमकी मेले में आए थे। तब लाखों की भीड़ थी। अब नजारा बदल गया है। पहले गुंबद तक घूमे थे, पर इस बार 15 मिनट भी नहीं रुकने दिया।