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जांच टीम सक्रिय, फिर भी गांव-गांव खुल रहे अवैध क्लीनिक
सार
जिले में बुखार के मरीज बढ़ने के साथ ही गांव-गांव अवैध क्लीनिक और झोलाछापों की दुकानें सज गई हैं।पिछले एक महीने में कई मामले भी स्वास्थ्य विभाग के सामने आए हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।इस मामले स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है।
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विस्तार
मैनपुरी। जिले में बुखार के मरीज बढ़ने के साथ ही गांव-गांव अवैध क्लीनिक और झोलाछापों की दुकानें सज गई हैं। प्रत्येक वर्ष बुखार के सीजन में कमोवेश यही स्थिति रहती है। यह हाल तब है जब स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम सक्रिय है। बिना पंजीयन के अस्पतालों-क्लीनिकों पर निगाह रख रही है। यही नहीं पिछले एक महीने में दो मरीजों की अवैध क्लीनिकों पर मौत हो चुकी हैं।
जिले में बुखार के मरीज तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में उचित उपचार की व्यवस्था न होने के कारण मरीज झोलाछाप और बिना पंजीकरण के संचालित अवैध क्लीनिकों पर उपचार लेने को मजबूर हैं। यहां न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही उपचार की पर्याप्त सुविधाएं। पिछले एक महीने में कई मामले भी स्वास्थ्य विभाग के सामने आए हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण अवैध क्लीनिक संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
केस नंबर- एक
स्थान-जीटी रोड बेवर
यहां जीटी रोड पर एक क्लीनिक पर उपचार के दौरान महिला की मौत हो जाती है। परिजन पहले हंगामा करते हैं। पुलिस को तहरीर भी देते हैं। पोस्टमार्टम भी कराया जाता है लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
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केस-नंबर दो
स्थान- कस्बा बेवर
गग्गरपुर नहर पुल के पास एक बिना बोर्ड के संचालित अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत होने के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने अस्पताल भी सील किया। उप मुख्यमंत्री से भी मामले की शिकायत हुई। फिर भी घटना के 15 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई नहीं कर सका है।
केस- नंबर तीन
कुरावली में एक अवैध क्लीनिक का ऑडियो वायरल होता है। इस पर दो महीने का गर्भ गिराने के नाम पर क्लीनिक संचालिका पीड़ित से 3500 रुपये की मांग करती है। इस मामले स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि यहां गर्भ गिराना नियम विरुद्ध है।
जहां से भी शिकायत मिलती है वहां जांच कराई जाती है। बेवर के मामले की जांच हो रही है। कुरावली के जिस ऑडियो की बात हो रही है उसकी भी जांच कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त एक टीम लगाई गई है जो बिना पंजीयन चल रहे अस्पतालों की जांच कर रही है। शीघ्र ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. पीपी सिंह सीएमओ
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जिले में बुखार के मरीज तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में उचित उपचार की व्यवस्था न होने के कारण मरीज झोलाछाप और बिना पंजीकरण के संचालित अवैध क्लीनिकों पर उपचार लेने को मजबूर हैं। यहां न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही उपचार की पर्याप्त सुविधाएं। पिछले एक महीने में कई मामले भी स्वास्थ्य विभाग के सामने आए हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण अवैध क्लीनिक संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
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केस नंबर- एक
स्थान-जीटी रोड बेवर
यहां जीटी रोड पर एक क्लीनिक पर उपचार के दौरान महिला की मौत हो जाती है। परिजन पहले हंगामा करते हैं। पुलिस को तहरीर भी देते हैं। पोस्टमार्टम भी कराया जाता है लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
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केस-नंबर दो
स्थान- कस्बा बेवर
गग्गरपुर नहर पुल के पास एक बिना बोर्ड के संचालित अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत होने के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने अस्पताल भी सील किया। उप मुख्यमंत्री से भी मामले की शिकायत हुई। फिर भी घटना के 15 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई नहीं कर सका है।
केस- नंबर तीन
कुरावली में एक अवैध क्लीनिक का ऑडियो वायरल होता है। इस पर दो महीने का गर्भ गिराने के नाम पर क्लीनिक संचालिका पीड़ित से 3500 रुपये की मांग करती है। इस मामले स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि यहां गर्भ गिराना नियम विरुद्ध है।
जहां से भी शिकायत मिलती है वहां जांच कराई जाती है। बेवर के मामले की जांच हो रही है। कुरावली के जिस ऑडियो की बात हो रही है उसकी भी जांच कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त एक टीम लगाई गई है जो बिना पंजीयन चल रहे अस्पतालों की जांच कर रही है। शीघ्र ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. पीपी सिंह सीएमओ