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जागरूकता से जिले में बढ़ने लगी बेटियों की किलकारी
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मैनपुरी। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की मुहिम अब जिले में असर दिखाने लगी है। ये बात अस्पतालों में वर्ष 2019 में जन्मे बच्चों के आंकड़े बखूबी बयां कर रहे हैं। इसमें लगातार बालिकाओं के जन्म की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे साफ है कि कहीं न कहीं लोग बेटियों के प्रति संवेदनशील होने लगे हैं।
कन्या भ्रूण हत्या के चलते देश में लगातार लिंगानुपात एक चिंता का विषय था। इसी के चलते बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की गई थी। मैनपुरी में भी इसके तहत कार्यक्रमों का आयोजन किया। अस्पताल में प्रसव के आंकड़ों को अगर देखें तो वर्ष 2019 जनवरी में एक हजार बालकों पर 954 बालिकाओं ने जन्म लिया, लेकिन सुधार हुआ तो धीरे-धीरे ये आंकड़ा बढ़ा। अक्तूबर तक आते-आते जहां जन्मी बालिकाओं की संख्या 1003 प्रति हजार बालक हो गई। वहीं नवंबर में सारे रिकॉर्ड तोड़कर ये आंकड़ा 1029 पर जा पहुंचा। इन आंकड़ों से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। अब देखना ये है कि आने वाले समय में ये आंकड़ा इसी तरह बढ़ता है या फिर से बेटियों की प्रति लोगों का प्यार कम हो जाएगा।
बीते वर्ष 4700 जागरूकता कार्यक्रम हुए आयोजित
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने जिले में खूब असर दिखाया। वर्ष 2019 में जागरूकता के उद्देश्य से 4700 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अगर एक दिन का आंकड़ा अगर देखें तो प्रतिदिन चार कार्यक्रम आयोजित हुए। इससे कहीं न कहीं लोगों में सुधार जरूर हुआ। वहीं जनवरी में भी अब तक पांच सौ जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है।
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हाईलाइटर्स
-43026 कुल बच्चों का वर्ष 2019 में हुआ जन्म
-20719 रही कुल बच्चों में बेटियों की संख्या
-36131 कुल बच्चों का वर्ष 2018 में हुआ जन्म
-17350 रही थी बच्चों में बेटियों की संख्या
लगातार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इससे लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार भी नजर आने लगा है। हालांकि अभी और सुधार की आवश्यकता है।
डॉ. एके पांडेय, सीएमओ।
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कन्या भ्रूण हत्या के चलते देश में लगातार लिंगानुपात एक चिंता का विषय था। इसी के चलते बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की गई थी। मैनपुरी में भी इसके तहत कार्यक्रमों का आयोजन किया। अस्पताल में प्रसव के आंकड़ों को अगर देखें तो वर्ष 2019 जनवरी में एक हजार बालकों पर 954 बालिकाओं ने जन्म लिया, लेकिन सुधार हुआ तो धीरे-धीरे ये आंकड़ा बढ़ा। अक्तूबर तक आते-आते जहां जन्मी बालिकाओं की संख्या 1003 प्रति हजार बालक हो गई। वहीं नवंबर में सारे रिकॉर्ड तोड़कर ये आंकड़ा 1029 पर जा पहुंचा। इन आंकड़ों से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। अब देखना ये है कि आने वाले समय में ये आंकड़ा इसी तरह बढ़ता है या फिर से बेटियों की प्रति लोगों का प्यार कम हो जाएगा।
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बीते वर्ष 4700 जागरूकता कार्यक्रम हुए आयोजित
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने जिले में खूब असर दिखाया। वर्ष 2019 में जागरूकता के उद्देश्य से 4700 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अगर एक दिन का आंकड़ा अगर देखें तो प्रतिदिन चार कार्यक्रम आयोजित हुए। इससे कहीं न कहीं लोगों में सुधार जरूर हुआ। वहीं जनवरी में भी अब तक पांच सौ जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है।
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हाईलाइटर्स
-43026 कुल बच्चों का वर्ष 2019 में हुआ जन्म
-20719 रही कुल बच्चों में बेटियों की संख्या
-36131 कुल बच्चों का वर्ष 2018 में हुआ जन्म
-17350 रही थी बच्चों में बेटियों की संख्या
लगातार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इससे लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार भी नजर आने लगा है। हालांकि अभी और सुधार की आवश्यकता है।
डॉ. एके पांडेय, सीएमओ।