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बैंककर्मियों पर कार्रवाई पर राजस्व कर्मचारियों पर मेहरबानी
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मैनपुरी। चार साल पहले राहत राशि चेक वितरण में घोटाला करने वाले राजस्व कर्मचारियों पर प्रशासन मेहरबान है। एक ओर जहां मामले में दोषी पाए गए बैंककर्मियों पर गाज गिर चुकी है तो वहीं दूसरी ओर अब तक राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ जांच भी पूरी नहीं हुई है।
वर्ष 2016 में भोगांव क्षेत्र में बारिश और ओलावृष्टि के बाद दैवीय आपदा के तहत शासन ने पीड़ितों को राहत देने की घोषणा की थी। इसमें तहसील के लेखपालों को अपने क्षेत्र के पीड़ितों की पहचान करके उनको दैवीय आपदा राहत के चेक दिए जाने के निर्देश दिए गए थे। लेखपालों ने जांच के नाम पर मनमानी करके नुकसान की सूची तैयार की। लेखपालों द्वारा मनमाने तरीके से तैयार की गई सूची में राहत राशि देने के लिए कोई मानक नहीं रखा गया। लेखपालों ने अपने चहेते किसानों को नुकसान से कहीं अधिक राशि के चेक आवंटित कर दिए। वहीं वास्तव में जिन किसानों का अधिक नुकसान हुआ था, उन्हें कम रुपये दिए गए। लेखपालों द्वारा दिए गए चेक का भुगतान सहकारी बैंक की शाखाओं से कराया गया।
मामले की शिकायत हुई तो सहकारी बैंक प्रबंधन ने जांच बैठा दी। जांच में दोषी पाए जाने पर बैैंक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई। वहीं राजस्व कर्मियों की भूमिका जांचने के लिए एक अन्य जांच समिति बनाई गई। लेकिन चार साल का समय बीतने के बाद भी अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। सवाल ये है है कि आखिर कौन राजस्व कर्मचारियों को बचा रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है
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13.16 लाख का हुआ था घोटाला
तहसील भोगांव क्षेत्र के किसानों को वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। तहसील भोगांव क्षेत्र में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जो चेक दिए गए उनमें 13.16 लाख के घोटाले की बात सामने आई। मामला उजागर होने के बाद कई किसानों से राहत नाम पर दी गई अधिक धनराशि को जमा भी कराया गया।
इस मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जानकारी कराने के बाद जांच शुरू कराई जाएगी। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे उनके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
पीसी आर्य, एसडीएम भोगांव
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वर्ष 2016 में भोगांव क्षेत्र में बारिश और ओलावृष्टि के बाद दैवीय आपदा के तहत शासन ने पीड़ितों को राहत देने की घोषणा की थी। इसमें तहसील के लेखपालों को अपने क्षेत्र के पीड़ितों की पहचान करके उनको दैवीय आपदा राहत के चेक दिए जाने के निर्देश दिए गए थे। लेखपालों ने जांच के नाम पर मनमानी करके नुकसान की सूची तैयार की। लेखपालों द्वारा मनमाने तरीके से तैयार की गई सूची में राहत राशि देने के लिए कोई मानक नहीं रखा गया। लेखपालों ने अपने चहेते किसानों को नुकसान से कहीं अधिक राशि के चेक आवंटित कर दिए। वहीं वास्तव में जिन किसानों का अधिक नुकसान हुआ था, उन्हें कम रुपये दिए गए। लेखपालों द्वारा दिए गए चेक का भुगतान सहकारी बैंक की शाखाओं से कराया गया।
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मामले की शिकायत हुई तो सहकारी बैंक प्रबंधन ने जांच बैठा दी। जांच में दोषी पाए जाने पर बैैंक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई। वहीं राजस्व कर्मियों की भूमिका जांचने के लिए एक अन्य जांच समिति बनाई गई। लेकिन चार साल का समय बीतने के बाद भी अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। सवाल ये है है कि आखिर कौन राजस्व कर्मचारियों को बचा रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है
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13.16 लाख का हुआ था घोटाला
तहसील भोगांव क्षेत्र के किसानों को वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। तहसील भोगांव क्षेत्र में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जो चेक दिए गए उनमें 13.16 लाख के घोटाले की बात सामने आई। मामला उजागर होने के बाद कई किसानों से राहत नाम पर दी गई अधिक धनराशि को जमा भी कराया गया।
इस मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जानकारी कराने के बाद जांच शुरू कराई जाएगी। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे उनके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
पीसी आर्य, एसडीएम भोगांव