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शहर में भ्रूण लिंग परीक्षण का पर्दाफाश
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 11 May 2015 01:28 AM IST
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शहर में लिंग परीक्षण से लेकर कन्या भ्रूण हत्या तक कराने वाले रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। शाहगंज पुलिस ने इस रैकेट के दो ऐसे सदस्य गिरफ्तार किए हैं, जो कमीशन लेकर अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर गर्भवती को ले जाते थे और भ्रूण का लिंग परीक्षण कराते थे। ये लोग कन्या भ्र्ूण हत्या का भी ठेका लेते थे। पुलिस अब इनसे मालूम कर रही है कि इस गोरखधंधे में कौन कौन से अल्ट्रासाउंड सेंटर और हास्पिटल शामिल हैं। इनके पास ज्यादातर हरियाणा और राजस्थान की महिलाएं आती थीं।
शाहगंज पुलिस को गत एक सप्ताह से जानकारी मिल रही थी कि कोठी मीना बाजार में कार सवार और बाइक सवार लोग आकर नशे की बिक्री करते हैं। इस धंधे में कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। यह सूचना जब रविवार सुबह पुलिस को मिली तो एक टीम ने घेराबंदी कर ली। पुलिस ने दो युवकों के साथ दो महिलाओं को पकड़ा। उन्हें थाने लाया गया। महिलाओं के साथ बच्चे भी थे। इंस्पेक्टर शाहगंज जयपाल सिंह ने बताया कि पूछताछ में चौंकाने वाली बात सामने आई। पकड़े गए दोनों युवकों ने भ्रूण लिंग परीक्षण की बात कुबूली।
इनमें विक्रम चौधरी निवासी खेड़ा जाट फतेहपुर सीकरी और विष्णु चाहर निवासी नगला झब्बा, कागारौल है। विक्रम पश्चिमपुरी स्थित एक हास्पिटल में कंपाउंडर है। वह विष्णु के साथ मिलकर यह गोरखधंधा करते थे। राजस्थान और हरियाणा की महिलाओं को लाया जाता है। युवकों के साथ जो महिलाएं थी, उनमें से एक हरियाणा तो दूसरी मथुरा की है। उनके पहले से बेटियां हैं। महिलाओं को कोठी मीना बाजार बुलाने के बाद अपने दो पहिया वाहनों से संजय प्लेस स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ले जाते। यहां पर भ्रूण का लिंग परीक्षण कराया जाता। आरोपी युवक गर्भपात भी करा देते हैं। एएसपी लोहामंडी सलमान ताज पाटिल ने बताया कि इस मामले की रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
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आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि एक दर्जन से अधिक महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण करा चुके हैं। हालांकि यह भी पता करना है कि इस रैकेट में और कौन-कौन जुड़ा हुआ है।
लक्ष्मी बोला तो बेटी, गणेश कहा तो बेटा
कोडवर्ड पर चल रहा था गोरखधंधा
आगरा। विष्णु ने बीपीएड कर रखा है। वह कमीशन पर यह काम कर रहा था। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि शहर में हरीपर्वत क्षेत्र के अलावा सदर में भी भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भपात कराने के लिए ले जाते थे। इनके अलावा भी कई जगह चोरी छिपे काम होता है। गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताने के लिए कोडवर्ड का प्रयोग करते थे। लड़की को लक्ष्मी और लड़के को गणेश के रूप में बोला जाता है। महिलाओं को इसके बारे में पहले ही बता दिया जाता था। उन्हें कुछ लिखकर नहीं दिया जाता था। सिर्फ कान में धीरे से बोल दिया जाता था।
इसके साथ ही महिलाओं को उनके अपने वाहन से नहीं ले जाते थे। विक्रम उन्हें अपने दो पहिया वाहन से ही हास्पिटल और सेंटर तक ले जाता था, जिससे आसपास के लोगों को यही लगे कि स्थानीय लोग जांच के लिए आए हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि मथुरा के यमुनापार निवासी राजकुमार ने मुकदमा दर्ज कराया है कि उसकी पत्नी की तबियत खराब रहती है। उसका इलाज कराने के लिए आगरा आने के दौरान उनकी मुलाकात विक्रम से हो गई थी। उसने धोखे से पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण और गर्भपात कराने का प्रयास किया। पुलिस ने राजकुमार की तहरीर पर धोखाधड़ी, षड्यंत्र और पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि विष्णु ग्राहक की तलाश में रहता है, जबकि विक्रम महिलाओं को जांच के लिए ले जाता था। लिंग परीक्षण कराने के छह से दस हजार रुपये तय होते थे। डाक्टर 20 प्रतिशत रकम उन्हें देते थे। वहीं गर्भपात भी दस से 15 हजार रुपये मेें करा दिया जाता था।
तत्कालीन उच्चाधिकारी के यहां चलता है गोरखधंधा
सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपियों के संबंध स्वास्थ्य विभाग की एक तत्कालीन उच्चाधिकारी महिला से हैं। वह अपने अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच करती हैं। इस मामले में पहले भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि अब फिर से उन्होंने चोरी छिपे यह काम शुरू कर दिया है।
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शाहगंज पुलिस को गत एक सप्ताह से जानकारी मिल रही थी कि कोठी मीना बाजार में कार सवार और बाइक सवार लोग आकर नशे की बिक्री करते हैं। इस धंधे में कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। यह सूचना जब रविवार सुबह पुलिस को मिली तो एक टीम ने घेराबंदी कर ली। पुलिस ने दो युवकों के साथ दो महिलाओं को पकड़ा। उन्हें थाने लाया गया। महिलाओं के साथ बच्चे भी थे। इंस्पेक्टर शाहगंज जयपाल सिंह ने बताया कि पूछताछ में चौंकाने वाली बात सामने आई। पकड़े गए दोनों युवकों ने भ्रूण लिंग परीक्षण की बात कुबूली।
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इनमें विक्रम चौधरी निवासी खेड़ा जाट फतेहपुर सीकरी और विष्णु चाहर निवासी नगला झब्बा, कागारौल है। विक्रम पश्चिमपुरी स्थित एक हास्पिटल में कंपाउंडर है। वह विष्णु के साथ मिलकर यह गोरखधंधा करते थे। राजस्थान और हरियाणा की महिलाओं को लाया जाता है। युवकों के साथ जो महिलाएं थी, उनमें से एक हरियाणा तो दूसरी मथुरा की है। उनके पहले से बेटियां हैं। महिलाओं को कोठी मीना बाजार बुलाने के बाद अपने दो पहिया वाहनों से संजय प्लेस स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ले जाते। यहां पर भ्रूण का लिंग परीक्षण कराया जाता। आरोपी युवक गर्भपात भी करा देते हैं। एएसपी लोहामंडी सलमान ताज पाटिल ने बताया कि इस मामले की रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
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आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि एक दर्जन से अधिक महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण करा चुके हैं। हालांकि यह भी पता करना है कि इस रैकेट में और कौन-कौन जुड़ा हुआ है।
लक्ष्मी बोला तो बेटी, गणेश कहा तो बेटा
कोडवर्ड पर चल रहा था गोरखधंधा
आगरा। विष्णु ने बीपीएड कर रखा है। वह कमीशन पर यह काम कर रहा था। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि शहर में हरीपर्वत क्षेत्र के अलावा सदर में भी भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भपात कराने के लिए ले जाते थे। इनके अलावा भी कई जगह चोरी छिपे काम होता है। गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताने के लिए कोडवर्ड का प्रयोग करते थे। लड़की को लक्ष्मी और लड़के को गणेश के रूप में बोला जाता है। महिलाओं को इसके बारे में पहले ही बता दिया जाता था। उन्हें कुछ लिखकर नहीं दिया जाता था। सिर्फ कान में धीरे से बोल दिया जाता था।
इसके साथ ही महिलाओं को उनके अपने वाहन से नहीं ले जाते थे। विक्रम उन्हें अपने दो पहिया वाहन से ही हास्पिटल और सेंटर तक ले जाता था, जिससे आसपास के लोगों को यही लगे कि स्थानीय लोग जांच के लिए आए हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि मथुरा के यमुनापार निवासी राजकुमार ने मुकदमा दर्ज कराया है कि उसकी पत्नी की तबियत खराब रहती है। उसका इलाज कराने के लिए आगरा आने के दौरान उनकी मुलाकात विक्रम से हो गई थी। उसने धोखे से पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण और गर्भपात कराने का प्रयास किया। पुलिस ने राजकुमार की तहरीर पर धोखाधड़ी, षड्यंत्र और पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि विष्णु ग्राहक की तलाश में रहता है, जबकि विक्रम महिलाओं को जांच के लिए ले जाता था। लिंग परीक्षण कराने के छह से दस हजार रुपये तय होते थे। डाक्टर 20 प्रतिशत रकम उन्हें देते थे। वहीं गर्भपात भी दस से 15 हजार रुपये मेें करा दिया जाता था।
तत्कालीन उच्चाधिकारी के यहां चलता है गोरखधंधा
सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपियों के संबंध स्वास्थ्य विभाग की एक तत्कालीन उच्चाधिकारी महिला से हैं। वह अपने अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच करती हैं। इस मामले में पहले भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि अब फिर से उन्होंने चोरी छिपे यह काम शुरू कर दिया है।