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जमीन एक, फर्जीवाड़े अनेक: CID की जांच में खुली नई परतें, फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और नामांतरण का भी पकड़ा खेल
Sun, 30 Aug 2026 06:10 PM IST
Arun Parashar
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 30 Aug 2026 06:10 PM IST
सार
आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में बैनारा फैक्टरी के पास 10 हजार वर्ग गज जमीन के मामले में सीआईडी की जांच में चाैंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जमीन को हड़पने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने से लेकर नामांतरण में खेल किया गया।
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- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
जमीन एक, मगर सौदे अनेक हुए। कभी इकरारनामा तो कभी पावर ऑफ अटॉर्नी। अलग-अलग लोगों से रकम भी ली गई। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और नामांतरण का खेल भी सामने आया। बोदला में बैनारा फैक्टरी के पास करोड़ों की 10 हजार वर्ग गज जमीन के मामले में सीआईडी जांच ने फर्जीवाड़े की नई परतें खोली हैं। तीन नए मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, मगर ढाई साल बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है।
सीआईडी के निरीक्षक अनिल प्रताप सिंह ने जांच में सामने आए लुधियाना, पंजाब निवासी टहल सिंह पर जुलाई में पहली प्राथमिकी दर्ज कराई। आरोप लगा कि टहल सिंह ने यह जानते हुए कि जमीन डीड के अनुसार पदम कुमार जैन को दे चुके हैं। लाभ उठाने के लिए बार-बार बेचा।
नगर निगम से हुआ था नामांतरण
मिल बंद होने के बाद 31 मार्च, 1980 को डीड ऑफ डिसाॅल्यूशन की गई। इसमें ऑयल इंजन मशीनरी आदि टहल सिंह के परिवार को मिली। उनके हिस्से की रकम भी उन्हें दी गई। नामांतरण के लिए अमर सिंह और टहल सिंह ने 1 मई, 1980 को निगम में प्रार्थनापत्र दिया। जमीन 8 दिसंबर, 1980 को पदम कुमार जैन आदि के नाम अंकित कर दी गई।
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इनको भी बेची टहल सिंह ने जमीन
- 5 नवंबर, 2007 को अपने साले जसवीर सिंह के नाम लुधियाना, पंजाब में पावर ऑफ अटाॅर्नी कर 5 दिसंबर को निरस्त करा दिया। जसवीर ने 6 दिसंबर को दिल्ली के शांता कुमार के नाम 10 लाख रुपये लेकर अनुबंध कर दिया।
- 24 जनवरी 2014 को टहल सिंह ने 50 लाख रुपये में फिर साैदा कर पांच लाख रुपये ले लिए। इस बार मैनपुरी निवासी बलवीर सिंह, विनीत यादव, अजय यादव के साथ इकरारनामा कर लिया।
- 6810 वर्ग मीटर जमीन की कीमत 7.49 करोड़ रुपये दर्शाते हुए एक करोड़ रुपये में ओरियंट इंफ्राटेक एलएलपी भागीदार मैनपुरी निवासी त्रियांशु यादव को 18 नवंबर 2016 को बैनामा कर दिया।
- 18 अक्तूबर 2024 को 1.15 करोड़ रुपये में इकरारनामा कर 10 लाख बयाना लिया। विनय पाटनी, साैरभ जसोदिया, राजीव यादव, रविंद्रपाल सिंह और सुरेंद्र सिंह चाैहान उर्फ बिल्लू के नाम नोटरी की। पता चलने पर प्रमोद कुमार जैन ने सिविल वाद किया।
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सीआईडी के निरीक्षक अनिल प्रताप सिंह ने जांच में सामने आए लुधियाना, पंजाब निवासी टहल सिंह पर जुलाई में पहली प्राथमिकी दर्ज कराई। आरोप लगा कि टहल सिंह ने यह जानते हुए कि जमीन डीड के अनुसार पदम कुमार जैन को दे चुके हैं। लाभ उठाने के लिए बार-बार बेचा।
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नगर निगम से हुआ था नामांतरण
मिल बंद होने के बाद 31 मार्च, 1980 को डीड ऑफ डिसाॅल्यूशन की गई। इसमें ऑयल इंजन मशीनरी आदि टहल सिंह के परिवार को मिली। उनके हिस्से की रकम भी उन्हें दी गई। नामांतरण के लिए अमर सिंह और टहल सिंह ने 1 मई, 1980 को निगम में प्रार्थनापत्र दिया। जमीन 8 दिसंबर, 1980 को पदम कुमार जैन आदि के नाम अंकित कर दी गई।
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इनको भी बेची टहल सिंह ने जमीन
- 5 नवंबर, 2007 को अपने साले जसवीर सिंह के नाम लुधियाना, पंजाब में पावर ऑफ अटाॅर्नी कर 5 दिसंबर को निरस्त करा दिया। जसवीर ने 6 दिसंबर को दिल्ली के शांता कुमार के नाम 10 लाख रुपये लेकर अनुबंध कर दिया।
- 24 जनवरी 2014 को टहल सिंह ने 50 लाख रुपये में फिर साैदा कर पांच लाख रुपये ले लिए। इस बार मैनपुरी निवासी बलवीर सिंह, विनीत यादव, अजय यादव के साथ इकरारनामा कर लिया।
- 6810 वर्ग मीटर जमीन की कीमत 7.49 करोड़ रुपये दर्शाते हुए एक करोड़ रुपये में ओरियंट इंफ्राटेक एलएलपी भागीदार मैनपुरी निवासी त्रियांशु यादव को 18 नवंबर 2016 को बैनामा कर दिया।
- 18 अक्तूबर 2024 को 1.15 करोड़ रुपये में इकरारनामा कर 10 लाख बयाना लिया। विनय पाटनी, साैरभ जसोदिया, राजीव यादव, रविंद्रपाल सिंह और सुरेंद्र सिंह चाैहान उर्फ बिल्लू के नाम नोटरी की। पता चलने पर प्रमोद कुमार जैन ने सिविल वाद किया।
दो और केस में यह भी बने आरोपी
- फर्जी नामांतरण कर मुख्तारनामा पंजीकरण में दूसरा मामला फ्रीगंज निवासी किशनमुरारी, टहल सिंह के बाड़े में रहने वाले रवि कुशवाहा, जीवनी मंडी निवासी राजू और हज्जूपुरा, ताजगंज निवासी बंटू के खिलाफ दर्ज किया गया।
- जसवीर सिंह के फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के मामले में तीसरा मामला नगर निगम के लोहामंडी जोन के सफाई नायक अजय कुमार और तत्कालीन सफाई खाद्य निरीक्षक परमानंद को नामजद किया। दोनों ने जांच की थी।
क्या है फर्जीवाड़े का मामला
जगदीशपुरा रोड पर टहल सिंह के बाड़े को कब्जाने का मामला अगस्त 2023 में पहली बार चर्चा में आया था। पुलिस ने करोड़ों की जमीन पर कब्जे के लिए अगस्त, 2023 में जमीन के केयरटेकर रवि कुशवाहा, शंकरिया और ओमप्रकाश को गांजा बेचने के आरोप में जेल भेज दिया। फिर जमीन पर कब्जा हुआ। 2024 में मामला लखनऊ तक पहुंचा। मुकदमे की वादी उमा देवी ने डकैती और कब्जे की धारा में प्राथमिकी लिखाई। इसी प्रकरण में तत्कालीन पुलिस आयुक्त डाॅ. प्रीतिंदर सिंह का तबादला हुआ। तत्कालीन एसओ जितेंद्र कुमार सहित कई आरोपी जेल भेजे गए। जांच सीआईडी को ट्रांसफर हुई, जिसमें बिल्डर कमल चौधरी को क्लीनचिट मिल गई।
मामले की विवेचना सीआईडी कर रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कई नए तथ्य भी प्रकाश में आए हैं। -गौरव सिंह, एसीपी लोहामंडी
- फर्जी नामांतरण कर मुख्तारनामा पंजीकरण में दूसरा मामला फ्रीगंज निवासी किशनमुरारी, टहल सिंह के बाड़े में रहने वाले रवि कुशवाहा, जीवनी मंडी निवासी राजू और हज्जूपुरा, ताजगंज निवासी बंटू के खिलाफ दर्ज किया गया।
- जसवीर सिंह के फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के मामले में तीसरा मामला नगर निगम के लोहामंडी जोन के सफाई नायक अजय कुमार और तत्कालीन सफाई खाद्य निरीक्षक परमानंद को नामजद किया। दोनों ने जांच की थी।
क्या है फर्जीवाड़े का मामला
जगदीशपुरा रोड पर टहल सिंह के बाड़े को कब्जाने का मामला अगस्त 2023 में पहली बार चर्चा में आया था। पुलिस ने करोड़ों की जमीन पर कब्जे के लिए अगस्त, 2023 में जमीन के केयरटेकर रवि कुशवाहा, शंकरिया और ओमप्रकाश को गांजा बेचने के आरोप में जेल भेज दिया। फिर जमीन पर कब्जा हुआ। 2024 में मामला लखनऊ तक पहुंचा। मुकदमे की वादी उमा देवी ने डकैती और कब्जे की धारा में प्राथमिकी लिखाई। इसी प्रकरण में तत्कालीन पुलिस आयुक्त डाॅ. प्रीतिंदर सिंह का तबादला हुआ। तत्कालीन एसओ जितेंद्र कुमार सहित कई आरोपी जेल भेजे गए। जांच सीआईडी को ट्रांसफर हुई, जिसमें बिल्डर कमल चौधरी को क्लीनचिट मिल गई।
मामले की विवेचना सीआईडी कर रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कई नए तथ्य भी प्रकाश में आए हैं। -गौरव सिंह, एसीपी लोहामंडी