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जिले में 43 हजार से अधिक बच्चों ने छोड़ दिया सरकारी स्कूल
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मथुरा। परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा जिले के ग्रामीण अंचल और गरीबों को भी अब रास नहीं आ रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार 43702 बच्चे कम हो गए हैं। इसके लिए निदेशक बेसिक शिक्षा ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को चेतावनी जारी की है। माना गया है कि इन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है।
शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे रहे मथुरा जनपद में बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण की स्थिति भी निरंतर बिगड़ती जा रही है। हालात इस कदर खराब हैं कि अब गरीब अभिभावक भी यहां बच्चों को पढ़ाने में कम ही रुचि ले रहे हैं। नामांकन के विभागीय आंकड़े बताते हैं कि 12 जुलाई तक मथुरा जनपद में छात्र पंजीकरण संख्या पिछले साल के मुकाबले 43702 कम हो गई है। इसमें प्राथमिक विद्यालयों में 34183 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 9519 छात्रों का नामांकन कम है।
हालांकि निदेशक बेसिक शिक्षा ने 15 प्रतिशत और नामांकन बढ़ाने के आदेश दिए थे, लेकिन जनपद में पिछले साल की नामांकन संख्या को भी कायम नहीं रखा जा सका है। इस स्थिति के चलते पिछले साल के मुकाबले कमजोर नामांकन में मथुरा को प्रदेश के 75 जनपदों में 71वां स्थान मिला है। इसमें सुधार के लिए निदेशक बेसिक शिक्षा ने बीएसए को सुधार लाने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा है कि यह हालात वाकई खराब हैं। इससे साफ होता है कि पढ़ाई का स्तर ठीक नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर माहौल होता तो प्राइवेट स्कूलों की तरफ इस तरह से दौड़ न होती।
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शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे रहे मथुरा जनपद में बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण की स्थिति भी निरंतर बिगड़ती जा रही है। हालात इस कदर खराब हैं कि अब गरीब अभिभावक भी यहां बच्चों को पढ़ाने में कम ही रुचि ले रहे हैं। नामांकन के विभागीय आंकड़े बताते हैं कि 12 जुलाई तक मथुरा जनपद में छात्र पंजीकरण संख्या पिछले साल के मुकाबले 43702 कम हो गई है। इसमें प्राथमिक विद्यालयों में 34183 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 9519 छात्रों का नामांकन कम है।
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हालांकि निदेशक बेसिक शिक्षा ने 15 प्रतिशत और नामांकन बढ़ाने के आदेश दिए थे, लेकिन जनपद में पिछले साल की नामांकन संख्या को भी कायम नहीं रखा जा सका है। इस स्थिति के चलते पिछले साल के मुकाबले कमजोर नामांकन में मथुरा को प्रदेश के 75 जनपदों में 71वां स्थान मिला है। इसमें सुधार के लिए निदेशक बेसिक शिक्षा ने बीएसए को सुधार लाने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा है कि यह हालात वाकई खराब हैं। इससे साफ होता है कि पढ़ाई का स्तर ठीक नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर माहौल होता तो प्राइवेट स्कूलों की तरफ इस तरह से दौड़ न होती।
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