Agra : इंसान की लापरवाही से मादा लंगूर की आंखों के सामने तड़पकर मर गया उसका बच्चा, मां हुई बीमार
आगरा में संरक्षित वन्यजीव के शोषण का मामला सामने आया है। यहां एक मादा लंगूर और उसके बच्चे को अवैध रूप से घर में रखा गया। लंगूर का बच्चा गले में रस्सी फंसने से मर गया।
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आगरा के स्वामीबाग में बंदरों से निपटने के लिए एक मादा लंगूर को अवैध रूप से पालतू जानवर के रूप में रखा था, जिसने मालिक की लापरवाही के कारण अपने शिशु को खो दिया। बच्चे को आंखों के सामने दम तोड़ते देख लंगूर को मानसिक आघात पहुंचा है। वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग की टीम ने मादा लंगूर को मुक्त कराया है, जो चिकित्सकीय निगरानी में है।
मादा लंगूर और उसके सप्ताह भर के बच्चे को बंदरों निजात दिलाने के लिए स्वामीबाग के आवासीय क्षेत्र में अवैध रूप से रखा गया था। दोनों को हर वक्त गले में रस्सी बांधकर रखा जाता था। उनका मालिक उन्हें बांधकर चला गया, जिसके बाद लंगूर का बच्चा खेलते-खेलते पेड़ पर चढ़ गया। उसकी रस्सी डाल में फंस गई। बच्चा नीचे गिरा और गले में रस्सी फंसी होने के कारण मर गया।
बच्चे की मौत के बाद बीमार हुई मादा लंगूर
बच्चे की मौत के बाद मादा लंगूर बीमार हो गई थी। उसने खाना छोड़ दिया था। स्वामीबाग निवासी एक व्यक्ति ने इसकी सूचना वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के हेल्पलाइन (+91 9917109666) नंबर पर दी। इस पर वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने मादा लंगूर को मुक्त कराया और उसे चिकित्सा उपचार और देखभाल के लिए अपनी ट्रांजिट फैसिलिटी में ले आई।
बता दें कि भारतीय ग्रे लंगूर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IIके तहत संरक्षित है। इसे बेचा, खरीदा, व्यापार या किराए पर नहीं लिया जा सकता है। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना या तीन साल की जेल या दोनों की सजा का भी प्रावधान है। संस्था ने बताया कि लंगूर वर्तमान में चिकित्सकीय निगरानी में है। फिट होने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया जाएगा।
मादा लंगूर की हालत गंभीर
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि मादा लंगूर की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। हमारी टीम उसकी देखभाल में जुटी है, ताकि उसके पास वह सब कुछ हो जिसकी उसे जरुरत है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि यह महज एक मिथक है कि बंदर लंगूरों से डरते हैं। लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती आबादी से निपटने के लिए लोगों द्वारा लंगूरों का दुरुपयोग किया जाता रहा है। जिसके कारण इन लंगूरों को क्रूर परिस्थितियों में रखा जाता है। यह जरूरी है की लोगों में इस भ्रम और लंगूरों को लेकर जागरूकता फैलाई जाए और उन्हें शिक्षित किया जाए।