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Agra News: फायर एनओसी के नियमों में बदलाव, जीएसटी और हस्ताक्षर अनिवार्य
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आगरा। फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के लिए निवेश मित्र पोर्टल पर नियमों में बदलाव किया गया है। अब जीएसटी नंबर और हस्ताक्षर की स्कैन काॅपी के बिना आवेदन नहीं किया जा सकेगा।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि फायर एनओसी के लिए निवेश मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। साथ ही नवीनीकरण के लिए भी यही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इस पर आवेदक को अपनी फर्म का जीएसटी नंबर, आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो सहित अन्य दस्तावेज स्कैन कर उपलब्ध कराने होते हैं। इस बार हस्ताक्षर का काॅलम भी जोड़ा गया है। इसमें हस्ताक्षर की स्कैन काॅपी देनी होती है।
अगर किसी फर्म का पंजीकरण जीएसटी विभाग में नहीं है तो आवेदन नहीं किया जा सकेगा। फायर एनओसी और नवीनीकरण के लिए आवेदन के बाद संबंधित एफएसओ को 15 दिन में जांच रिपोर्ट देनी होती है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। ऑनलाइन सुविधा मिलने पर दो से तीन आवेदन रोजाना आ रहे हैं। इन पर कार्रवाई की जाती है।
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उन्होंने बताया कि आपत्ति भी पोर्टल पर उपलब्ध होती है। इसे आवेदक आसानी से देख ऑनलाइन ही देख सकते हैं। जांच अधिकारी और अन्य के बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। इसमें ओटीपी की भी व्यवस्था है। हाॅस्पिटल के लिए 3 साल और अन्य के लिए 5 साल बाद फायर एनओसी का नवीनीकरण कराना होता है।
- 381 अस्पताल, 150 अपार्टमेंट को फायर एनओसी
विद्यालय, अस्पताल, व्यावसायिक भवन, औद्योगिक इकाई, अपार्टमेंट, कोल्ड स्टोरेज, पेट्रोल पंप के लिए फायर एनओसी आवश्यक है। जिले में 381 हॉस्पिटल को फायर एनओसी जारी की गई है। 250 औद्योगिक इकाइयों को एनओसी मिली हुई है। 150 अपार्टमेंट भी हैं, जिनमें फायर एनओसी है। सीएफओ ने बताया कि 500 वर्ग मीटर कवर एरिया और 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए फायर एनओसी आवश्यक होती है।
- विभाग आग बुझाने का लेता है खर्च
व्यावसायिक इकाइयों और भवनों में आग लगने पर दमकल की टीम बुझाने के लिए जाती हैं। इसमें गाड़ियों के संचालन में जो खर्च आता है, वह भवन स्वामी से वसूल किया जाता है। विभाग हर घंटे के हिसाब से वसूली करता है। इसके लिए संबंधित संचालक विभाग से चालान की कॉपी लेते हैं। रकम को कोषागार में जमा कराया जाता है।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि फायर एनओसी के लिए निवेश मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। साथ ही नवीनीकरण के लिए भी यही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इस पर आवेदक को अपनी फर्म का जीएसटी नंबर, आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो सहित अन्य दस्तावेज स्कैन कर उपलब्ध कराने होते हैं। इस बार हस्ताक्षर का काॅलम भी जोड़ा गया है। इसमें हस्ताक्षर की स्कैन काॅपी देनी होती है।
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अगर किसी फर्म का पंजीकरण जीएसटी विभाग में नहीं है तो आवेदन नहीं किया जा सकेगा। फायर एनओसी और नवीनीकरण के लिए आवेदन के बाद संबंधित एफएसओ को 15 दिन में जांच रिपोर्ट देनी होती है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। ऑनलाइन सुविधा मिलने पर दो से तीन आवेदन रोजाना आ रहे हैं। इन पर कार्रवाई की जाती है।
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उन्होंने बताया कि आपत्ति भी पोर्टल पर उपलब्ध होती है। इसे आवेदक आसानी से देख ऑनलाइन ही देख सकते हैं। जांच अधिकारी और अन्य के बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। इसमें ओटीपी की भी व्यवस्था है। हाॅस्पिटल के लिए 3 साल और अन्य के लिए 5 साल बाद फायर एनओसी का नवीनीकरण कराना होता है।
- 381 अस्पताल, 150 अपार्टमेंट को फायर एनओसी
विद्यालय, अस्पताल, व्यावसायिक भवन, औद्योगिक इकाई, अपार्टमेंट, कोल्ड स्टोरेज, पेट्रोल पंप के लिए फायर एनओसी आवश्यक है। जिले में 381 हॉस्पिटल को फायर एनओसी जारी की गई है। 250 औद्योगिक इकाइयों को एनओसी मिली हुई है। 150 अपार्टमेंट भी हैं, जिनमें फायर एनओसी है। सीएफओ ने बताया कि 500 वर्ग मीटर कवर एरिया और 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए फायर एनओसी आवश्यक होती है।
- विभाग आग बुझाने का लेता है खर्च
व्यावसायिक इकाइयों और भवनों में आग लगने पर दमकल की टीम बुझाने के लिए जाती हैं। इसमें गाड़ियों के संचालन में जो खर्च आता है, वह भवन स्वामी से वसूल किया जाता है। विभाग हर घंटे के हिसाब से वसूली करता है। इसके लिए संबंधित संचालक विभाग से चालान की कॉपी लेते हैं। रकम को कोषागार में जमा कराया जाता है।