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चैत्र नवरात्र 2020: 178 साल बाद दुर्लभ योग, बीज मंत्र के जाप से दूर होंगे रोग
Wed, 25 Mar 2020 12:10 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 25 Mar 2020 12:10 AM IST
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chaitra navratri 2020
- फोटो : chaitra navratri 2020
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चैत्र नवरात्र बुधवार से शुरु हो रहे हैं। इस बार मां नाव में सवार होकर आएंगी। दो अप्रैल को हाथी पर विदा होंगी। बुधवार को प्रथम दिन घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:55 बजे से शाम चार बजे तक रहेगा। आगरा के धर्माचार्यों ने बताया कि 178 साल बाद दुर्लभ योग बन रहे हैं। मां की पूजा अर्चना के दौरान बीज मंत्र का जाप करें तो रोगों से मुक्ति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर ने बताया कि ज्योतिष के लिहाज से 11 अप्रैल 1842 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत मानी गई है। तब नवरात्रि में 16 अप्रैल को गुरु ने मकर राशि में गोचर किया था। इस साल 29 मार्च को ऐसा ही योग बन रहा है।
चैत्र नवरात्रि में नौ दिन तक हर रोज साधक दुर्गे मां की पूजा एवं 251 बार बीज मंत्र ऊँ दुं दुर्गाय नम: के साथ मां दुर्गा की पूजा करें। पूजा स्थल पर दीप जलाएं। रोगों से मुक्ति मिलेगी।
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ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर ने बताया कि ज्योतिष के लिहाज से 11 अप्रैल 1842 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत मानी गई है। तब नवरात्रि में 16 अप्रैल को गुरु ने मकर राशि में गोचर किया था। इस साल 29 मार्च को ऐसा ही योग बन रहा है।
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चैत्र नवरात्रि में नौ दिन तक हर रोज साधक दुर्गे मां की पूजा एवं 251 बार बीज मंत्र ऊँ दुं दुर्गाय नम: के साथ मां दुर्गा की पूजा करें। पूजा स्थल पर दीप जलाएं। रोगों से मुक्ति मिलेगी।
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आगरा की ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि पूजन स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर गंगाजल का छिड़काव करें। अब मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें चुनरी, वस्त्र, आभूषण से सजाएं। केसर चंदन, रोली, चावल अर्पित करें और पुष्प माला धारण कराएं।
नव संवत्सर में नव जीवन की उमंग
बुधवार से ही नव संवस्तर शुरु हो रहा है। पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि ब्रहमाजी ने सूयोदय होने पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सृष्टि की संरचना प्रारंभ की थी। बुधवार 25 मार्च से नव संवस्तर प्रमादी शुरु हो रहा है। यह जीवन में उमंग लाएगा। इसके राजा बुध और मंत्री चंद्रमा हैं। नव वर्ष का आरंभ रेवती नक्षत्र और मीन राशि में होगा।
नव संवत्सर में नव जीवन की उमंग
बुधवार से ही नव संवस्तर शुरु हो रहा है। पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि ब्रहमाजी ने सूयोदय होने पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सृष्टि की संरचना प्रारंभ की थी। बुधवार 25 मार्च से नव संवस्तर प्रमादी शुरु हो रहा है। यह जीवन में उमंग लाएगा। इसके राजा बुध और मंत्री चंद्रमा हैं। नव वर्ष का आरंभ रेवती नक्षत्र और मीन राशि में होगा।
स्वार्थ सिद्धी योग : सुख-समृद्धि आएगी
26 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग
27 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि के साथ रवि योग
29 मार्च को रवि योग
30 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत योग,
31 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग
दो अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग
राशिवार चढ़ाएं फूल, प्रसन्न होंगी देवी
मेष : गुड़हल, गुलाब, लाल कनेर
वृषभ : गुड़हल, श्वेत कनेर, बेला
मिथुन : गुड़हल, पीली कनेर, गेंदा
कर्क : गुड़हल, चमेली, गेंदा
सिंह : गुड़हल , गुलाब , कनेर
कन्या : गुड़हल, गुलाब, गेंदा
तुला : गुड़हल, बेला, चमेली
वृश्चिक : कोई भी लाल, पीले गुलाबी पुष्प
धनु : गुड़हल, गेंदा
मकर: गुड़हल, गुलाब , गेंदा,
कुंभ : गुड़हल, बेला, चमेली
मीन : गेंदा, गुड़हल , गुलाब
27 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि के साथ रवि योग
29 मार्च को रवि योग
30 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत योग,
31 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग
दो अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग
राशिवार चढ़ाएं फूल, प्रसन्न होंगी देवी
मेष : गुड़हल, गुलाब, लाल कनेर
वृषभ : गुड़हल, श्वेत कनेर, बेला
मिथुन : गुड़हल, पीली कनेर, गेंदा
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सिंह : गुड़हल , गुलाब , कनेर
कन्या : गुड़हल, गुलाब, गेंदा
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