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UP: सिंचाई विभाग का खेल...भ्रष्टाचार पर अफसरों ने छोड़ा 'पानी', नहरों में सिल्ट सफाई के नाम पर घोटाला
Mon, 24 Nov 2025 08:56 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 24 Nov 2025 08:56 AM IST
सार
नहरों से सिल्ट सफाई के नाम पर पटरियों से घास छीलकर खानापूर्ति कर दी गई। इसके बाद नहरों में पानी छोड़कर भ्रष्टाचार के दाग भी धो दिए गए।
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नहर में छोड़ा गया पानी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
नहरों में सिल्ट सफाई के नाम पर घास छीलने में ही तीन करोड़ रुपये बहा दिए गए। किसान सफाई में फर्जीवाड़े की शिकायत करते रहे लेकिन हकीकत सामने आने से पहले सिंचाई विभाग ने रविवार से नहरों में पानी छोड़ दिया। नहरों में पानी आने के साथ ही सफाई में हुए भ्रष्टाचार के दाग भी धुल गए।
जिले में करीब 500 किमी. लंबा नहरों का जाल है। 70 से अधिक नहर-माइनर हैं जिनसे करीब एक लाख से अधिक किसान आलू, गेहूं व अन्य फसलों की सिंचाई करते हैं। रबी की फसल से पहले नहरों की तलीझाड़ सफाई और सिल्ट निकालने के लिए तीन करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को मिले थे। अधिशासी अभियंता नीरज कुमार की कार्यशैली सवालों के घेरे में रही।
पहले किसानों ने डीएम से सफाई में फर्जीवाड़े और कार्रवाई के लिए गुहार लगाई। फिर जिला पंचायत अध्यक्ष ने नहर सफाई का सत्यापन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने अनियमितताएं मिलने पर अधिशासी अभियंता नीरज कुमार के विरुद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता को पत्र भेजा लेकिन नतीजा सिफर रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत रद्दी की टोकरी में चली गई।
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डीएम को भी जांच के नाम पर इंजीनियर, ठेकेदार और बीडीओ गुमराह करते रहे। डीएम ने एक बार भी नहर सफाई का निरीक्षण तक नहीं किया। रविवार को ओखला बैराज से रजवाह टर्मिनल में पानी छोड़ दिया गया है। अगले एक सप्ताह में सभी नहरों में पानी आ जाएगा। किसान केपी चाहर ने बताया कि नहरों में घुटनों तक पानी भरा था। बिना सूखे सिल्ट नहीं निकाली जा सकती। सिल्ट निकालने के बजाय पटरियों से घास छीली गई। किसान प्रेम सिंह ने बताया कि नहरों में सफाई के नाम पर हुए घोटाले की अब जांच भी नहीं हो सकती, क्योंकि पानी छोड़ने के बाद नहरों में फिर सिल्ट जमा हो जाती है। इस वजह से सिल्ट सफाई का सत्यापन नहीं हो पाता।
कराई थी जांच
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार ने बताया कि डीएम ने जांच के लिए टीम गठित की थी। सफाई कार्य हो चुका है। ओखला बैराज से पानी छोड़ा जा चुका है। आगरा की नहरों में जल्द पानी आ जाएगा। -
टेल तक नहीं पहुंचता पानी
नहरों की सिल्ट सफाई न होने से पानी का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे अंतिम छोर यानी टेल तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। इसके कारण किसानों को फसलों की सिंचाई में परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही सिल्ट के कारण पानी जमा होने से कटान का खतरा भी बढ़ जाता है।
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जिले में करीब 500 किमी. लंबा नहरों का जाल है। 70 से अधिक नहर-माइनर हैं जिनसे करीब एक लाख से अधिक किसान आलू, गेहूं व अन्य फसलों की सिंचाई करते हैं। रबी की फसल से पहले नहरों की तलीझाड़ सफाई और सिल्ट निकालने के लिए तीन करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को मिले थे। अधिशासी अभियंता नीरज कुमार की कार्यशैली सवालों के घेरे में रही।
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पहले किसानों ने डीएम से सफाई में फर्जीवाड़े और कार्रवाई के लिए गुहार लगाई। फिर जिला पंचायत अध्यक्ष ने नहर सफाई का सत्यापन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने अनियमितताएं मिलने पर अधिशासी अभियंता नीरज कुमार के विरुद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता को पत्र भेजा लेकिन नतीजा सिफर रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत रद्दी की टोकरी में चली गई।
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डीएम को भी जांच के नाम पर इंजीनियर, ठेकेदार और बीडीओ गुमराह करते रहे। डीएम ने एक बार भी नहर सफाई का निरीक्षण तक नहीं किया। रविवार को ओखला बैराज से रजवाह टर्मिनल में पानी छोड़ दिया गया है। अगले एक सप्ताह में सभी नहरों में पानी आ जाएगा। किसान केपी चाहर ने बताया कि नहरों में घुटनों तक पानी भरा था। बिना सूखे सिल्ट नहीं निकाली जा सकती। सिल्ट निकालने के बजाय पटरियों से घास छीली गई। किसान प्रेम सिंह ने बताया कि नहरों में सफाई के नाम पर हुए घोटाले की अब जांच भी नहीं हो सकती, क्योंकि पानी छोड़ने के बाद नहरों में फिर सिल्ट जमा हो जाती है। इस वजह से सिल्ट सफाई का सत्यापन नहीं हो पाता।
कराई थी जांच
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार ने बताया कि डीएम ने जांच के लिए टीम गठित की थी। सफाई कार्य हो चुका है। ओखला बैराज से पानी छोड़ा जा चुका है। आगरा की नहरों में जल्द पानी आ जाएगा। -
टेल तक नहीं पहुंचता पानी
नहरों की सिल्ट सफाई न होने से पानी का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे अंतिम छोर यानी टेल तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। इसके कारण किसानों को फसलों की सिंचाई में परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही सिल्ट के कारण पानी जमा होने से कटान का खतरा भी बढ़ जाता है।