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सूर्यग्रहण के कारण दुनिया में एक दिन देरी से आएंगे बच्चे, पढ़ें हैरान करने वाली खबर
Fri, 27 Dec 2019 12:30 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 27 Dec 2019 12:30 AM IST
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सूर्यग्रहण
- फोटो : PTI
सूर्यग्रहण के कारण कई बच्चे दुनिया में एक दिन देरी से आएंगे। इनका जन्म बृहस्पतिवार को होना था, सिजेरियन डिलीवरी की तारीख और समय तय था लेकिन इनके माता-पिता ने डॉक्टर से अनुरोध कर इसे एक दिन आगे बढ़वा लिया। इनकी जन्म कुंडली अब सूर्यग्रहण के प्रभाव से मुक्त हो जाएगी।
चिकित्सकों ने बताया कि बुधवार से ही लोग कहने लगे थे कि सूर्यग्रहण में डिलीवरी नहीं होनी चाहिए। लोगों का कहना था कि धर्माचार्य और ज्योतिषाचार्य सूर्यग्रहण की घड़ी में जन्म को शुभ नहीं मानते हैं। शुक्रवार का दिन अच्छा बताया गया, इस कारण एक दिन डिलीवरी टाल दी जाए।
आगरा के नवदीप अस्पताल में बृहस्पतिवार को ऑपरेशन से दो प्रसव होने थे। गर्भवती महिलाओं के घरवालों ने सूर्य ग्रहण की वजह से शुक्रवार को प्रसव कराने का अनुरोध किया। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा का कहना है कि गर्भवती की हालत ठीक थी, इससे ऑपरेशन एक दिन टाल दिया गया।
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चिकित्सकों ने बताया कि बुधवार से ही लोग कहने लगे थे कि सूर्यग्रहण में डिलीवरी नहीं होनी चाहिए। लोगों का कहना था कि धर्माचार्य और ज्योतिषाचार्य सूर्यग्रहण की घड़ी में जन्म को शुभ नहीं मानते हैं। शुक्रवार का दिन अच्छा बताया गया, इस कारण एक दिन डिलीवरी टाल दी जाए।
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आगरा के नवदीप अस्पताल में बृहस्पतिवार को ऑपरेशन से दो प्रसव होने थे। गर्भवती महिलाओं के घरवालों ने सूर्य ग्रहण की वजह से शुक्रवार को प्रसव कराने का अनुरोध किया। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा का कहना है कि गर्भवती की हालत ठीक थी, इससे ऑपरेशन एक दिन टाल दिया गया।
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तीमारदारों ने बताई यह वजह
इसी अस्पताल में सुमित कुमार की पत्नी का प्रसव बृहस्पतिवार को ऑपरेशन से होना था। सुमित को घरवालों ने बताया कि सूर्य ग्रहण में प्रसव ठीक नहीं माना जाता। उनके अनुरोध पर अस्पताल प्रशासन ने शुक्रवार को ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
रेनबो अस्पताल में भी तीन प्रसव ऑपरेशन से होने थे। यहां की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा का कहना है कि परिजन नहीं चाह रहे थे कि सूर्य ग्रहण वाले दिन प्रसव हो, उनकी मांग पर प्रसव का दिन शुक्रवार निर्धारित किया गया है।
मंदिरों में साफ-सफाई के बाद पूजा पाठ
ग्रहण का प्रारंभ होने का समय प्रात: 8:10 बजे से मध्य 9:31 बजे था। ग्रहण समाप्त 10:51 बजे हुआ। इसके सूतक 12 घंटे पहले ही लग गया था। उसी समय मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। इन्हें बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे खोला गया।
पहले मंदिर की सफाई की गई। गंगाजल छिड़का गया। इसके बाद पूजा पाठ हुआ। कैलाश मंदिर के महंत योगेश गिरी ने बताया कि ग्रहण काल के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोले बाबा की पूजा अर्चना के लिए आए।
रेनबो अस्पताल में भी तीन प्रसव ऑपरेशन से होने थे। यहां की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा का कहना है कि परिजन नहीं चाह रहे थे कि सूर्य ग्रहण वाले दिन प्रसव हो, उनकी मांग पर प्रसव का दिन शुक्रवार निर्धारित किया गया है।
मंदिरों में साफ-सफाई के बाद पूजा पाठ
ग्रहण का प्रारंभ होने का समय प्रात: 8:10 बजे से मध्य 9:31 बजे था। ग्रहण समाप्त 10:51 बजे हुआ। इसके सूतक 12 घंटे पहले ही लग गया था। उसी समय मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। इन्हें बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे खोला गया।
पहले मंदिर की सफाई की गई। गंगाजल छिड़का गया। इसके बाद पूजा पाठ हुआ। कैलाश मंदिर के महंत योगेश गिरी ने बताया कि ग्रहण काल के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोले बाबा की पूजा अर्चना के लिए आए।