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आगरा: ताज नेचर वॉक में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुविधा, सीढ़ियां खत्म कर रैंप बनाए
Thu, 11 Feb 2021 02:05 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 11 Feb 2021 02:05 PM IST
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ताज नेचर वॉक
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल के 500 मीटर दायरे में बने ताज नेचर वॉक में दिव्यांग भी भ्रमण कर सकेंगे। नेचर वॉक के ट्रैक से सीढ़ियों को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह रैंप बना दिए हैं। चलने-फिरने में असहाय पर्यटक व्हील चेयर में आसानी से यहां भ्रमण कर सकेंगे। बुजुर्गों को नेचर वॉक में सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी हो रही थी। वन विभाग ने पर्यटकों के फीडबैक के बाद यह पहल की है।
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ताजमहल के पूर्वी गेट के पास 70 हेक्टेयर में फैले ताज नेचर वॉक में वन विभाग ने ओपन जिम लगाया है। यहां हर माह 5 हजार तक पर्यटक आते हैं। नेचर वॉक में 9 किमी लंबा नेचर ट्रैक है जो यहां के प्रमुख 5 टीलों और झील को जोड़ता है। ओपन जिम बनने के बाद से लोगों का रुझान नेचर वॉक में बढ़ा तो ट्रैक पर सीढ़ियों से संबंधित समस्याएं सामने आईं।
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अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के. प्रवीन राव ने नेचर वॉक के लाल पत्थर से बने ट्रैक से सीढ़ियों को खत्म कराया और वहां रैंप बनवा दिए। इससे बुजुर्ग और दिव्यांगों को नेचर वॉक में भ्रमण करने में आसानी हो गई। यहां 40 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षी भी नजर आते हैं।
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इससे टहलना आसान हो गया है
ताजगंज निवासी एसके जैन ने बताया कि सुबह टहलने के लिए जब नेचर वॉक में सीढ़ियां चढ़ता था तो परेशानी होती थी। खासकर लौटते समय थकान ज्यादा होती थी, पर अब रैंप बन जाने से टहलना आसान हो गया है।
दिव्यांग, बुजुर्गों की दिक्कत खत्म हुई
नेचर वॉक में जो लोग घूमने आ रहे थे, उन्हें सीढ़ियों के कारण दिक्कत हो रही थी। खासतौर पर दिव्यांग और बुजुर्ग जिन्हें 3-4 सीढ़ियां भी चढ़ना-उतरना मुश्किल था। इसलिए ट्रैक से सीढ़ियां खत्म कर रैंप बना दिए गए हैं। -के. प्रवीन राव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक
ताजगंज निवासी एसके जैन ने बताया कि सुबह टहलने के लिए जब नेचर वॉक में सीढ़ियां चढ़ता था तो परेशानी होती थी। खासकर लौटते समय थकान ज्यादा होती थी, पर अब रैंप बन जाने से टहलना आसान हो गया है।
दिव्यांग, बुजुर्गों की दिक्कत खत्म हुई
नेचर वॉक में जो लोग घूमने आ रहे थे, उन्हें सीढ़ियों के कारण दिक्कत हो रही थी। खासतौर पर दिव्यांग और बुजुर्ग जिन्हें 3-4 सीढ़ियां भी चढ़ना-उतरना मुश्किल था। इसलिए ट्रैक से सीढ़ियां खत्म कर रैंप बना दिए गए हैं। -के. प्रवीन राव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक