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आम बजट 2021: कॉलेजों में सीटें नहीं बढ़ाने, शिक्षा ऋण सस्ता नहीं होने से विद्यार्थी निराश
Tue, 02 Feb 2021 09:59 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 02 Feb 2021 09:59 AM IST
सार
- ताजनगरी के युवा उम्मीद लगाए बैठे थे कि बजट में बड़ी सौगात मिलेगी। और कुछ न सही तो शिक्षा ऋण सस्ता हो जाएगा लेकिन ऐसा कुछ मिला नहीं।
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बजट: आगरा कॉलेज के छात्र-छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिहाज से सरकार का बजट रास नहीं आया है। न प्रोफेशनल कोर्स और मेडिकल कॉलेजों के संबंध में घोषणा है न प्राइवेट कॉलेजों में फीस कम करने के साथ सीटें बढ़ाने की। शिक्षा ऋण सस्ते करने के संबंध में भी बजट से निराशा ही हाथ लगी।
आगरा में सरकारी कॉलेजों में इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत अन्य कोर्स के लिए सीटों की कमी है। एसएन मेडिकल कॉलेज में तो एमबीबीएस की 128 ही सीटें हैं। इस कारण छात्रों को निजी कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ता है, जिनमें अधिक फीस देनी होती है। एमबीबीएस करना चाह रहे युवा उम्मीद लगाए बैठे थे कि सीटों की वृद्धि जरूर की जाएगी।
'नए कॉलेज खोलने चाहिए थे'
बीएससी प्रथम की छात्रा अंजलि कुमारी ने कहा कि बजट ने निराश किया। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें नहीं बढ़ाने और नए कॉलेजों के बारे में उम्मीद थी जो पूरी नहीं हुई। स्नातक के छात्र सुमित तिवारी ने कहा कि बजट में हमारे लिए कुछ नहीं था। जीडीपी का 20 फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च होना चाहिए। कॉलेज तो बढ़ाने ही चाहिए।
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आगरा में सरकारी कॉलेजों में इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत अन्य कोर्स के लिए सीटों की कमी है। एसएन मेडिकल कॉलेज में तो एमबीबीएस की 128 ही सीटें हैं। इस कारण छात्रों को निजी कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ता है, जिनमें अधिक फीस देनी होती है। एमबीबीएस करना चाह रहे युवा उम्मीद लगाए बैठे थे कि सीटों की वृद्धि जरूर की जाएगी।
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'नए कॉलेज खोलने चाहिए थे'
बीएससी प्रथम की छात्रा अंजलि कुमारी ने कहा कि बजट ने निराश किया। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें नहीं बढ़ाने और नए कॉलेजों के बारे में उम्मीद थी जो पूरी नहीं हुई। स्नातक के छात्र सुमित तिवारी ने कहा कि बजट में हमारे लिए कुछ नहीं था। जीडीपी का 20 फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च होना चाहिए। कॉलेज तो बढ़ाने ही चाहिए।
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'बजट से निराश हूं मैं'
बीएससी प्रथम की छात्रा खुशी पाल ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए शिक्षा ऋण सस्ते करने के संबंध में कोई घोषणा नहीं किए जाने से निराश हूं। बीएससी की छात्रा शिवानी मधुक ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए सरकार को बिना ब्याज के अधिकतम ऋण की व्यवस्था करनी चाहिए थी। बजट से पूरी तरह से निराश हूं।
'मध्यम वर्ग के लिए कुछ खास नहीं'
केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड निवासी माया सिंह ने कहा कि मध्यम वर्ग के लिए बजट में खास नहीं है। इनकम टैक्स में भी छूट नहीं बढ़ाई गई है। सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग ही प्रभावित होता है। आवास विकास कॉलोनी के संजय सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी में लोगों की नौकरी गई, श्रमिकों को कारखानों से निकाल दिया। उनके लिए अलग से राहत पैकेज दिया जाना चाहिए था।
खंदारी निवासी गीता सारस्वत ने कहा कि सरकार ने बजट में लोकलुभावने सपने नहीं दिखाए और न ही ऐसी योजनाएं शामिल कीं, जिनको पूरा नहीं किया जा सके। बजट संतुलित और बेहतर है। कमला नगर के प्रमोद सिंघल ने कहा कि बजट देश की गति को रफ्तार देने वाला है। सरकार ने बजट में महिलाओं, बुजुर्गों का ख्याल रखा है। इससे आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
बीएससी प्रथम की छात्रा खुशी पाल ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए शिक्षा ऋण सस्ते करने के संबंध में कोई घोषणा नहीं किए जाने से निराश हूं। बीएससी की छात्रा शिवानी मधुक ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए सरकार को बिना ब्याज के अधिकतम ऋण की व्यवस्था करनी चाहिए थी। बजट से पूरी तरह से निराश हूं।
'मध्यम वर्ग के लिए कुछ खास नहीं'
केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड निवासी माया सिंह ने कहा कि मध्यम वर्ग के लिए बजट में खास नहीं है। इनकम टैक्स में भी छूट नहीं बढ़ाई गई है। सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग ही प्रभावित होता है। आवास विकास कॉलोनी के संजय सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी में लोगों की नौकरी गई, श्रमिकों को कारखानों से निकाल दिया। उनके लिए अलग से राहत पैकेज दिया जाना चाहिए था।
खंदारी निवासी गीता सारस्वत ने कहा कि सरकार ने बजट में लोकलुभावने सपने नहीं दिखाए और न ही ऐसी योजनाएं शामिल कीं, जिनको पूरा नहीं किया जा सके। बजट संतुलित और बेहतर है। कमला नगर के प्रमोद सिंघल ने कहा कि बजट देश की गति को रफ्तार देने वाला है। सरकार ने बजट में महिलाओं, बुजुर्गों का ख्याल रखा है। इससे आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।