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Budget 2021: इस बार भी आगरा के किसानों की झोली खाली, नहीं मिली आलू प्रोसेसिंग यूनिट
Tue, 02 Feb 2021 09:47 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 02 Feb 2021 09:47 AM IST
सार
- 2.69 लाख किसान हैं जिले में
- 75 हजार हेक्टेयर पर होती है आलू की बुवाई
- 280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है आलू की पैदावार
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आलू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में 10 साल से की जा रही आलू प्रोसेसिंग यूनिट और आलू अनुसंधान केंद्र की मांग इस बजट में भी पूरी नहीं हुई। आगरा में गेहूं के बाद आलू सबसे ज्यादा होने वाली फसल है। यहां 75 हजार हेक्टेयर तक जमीन पर हर साल आलू की बुवाई होती है। 280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार होती है। सम्मान निधि नहीं बढ़ने से भी छोटे काश्तकारों की उम्मीदों को झटका लगा है।
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एक भी सौगात नहीं मिली
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानियां ने कहा कि आलू अनुसंधान केंद्र, प्रोसेसिंग यूनिट खोले जाने का हर चुनाव में आश्वासन मिलता है। इस बार भी इनमें से एक भी सौगात नहीं मिली है। आलू किसान प्रदीप शर्मा ने कहा कि आलू अनुसंधान केंद्र से उन्नत किस्म के आलू बीज पैदा होते। आलू का निर्यात किया जा सकता था। जिले के किसानों के लिए बजट निराशाजनक रहा।
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डीजल में सब्सिडी भी नहीं दी
किसान नेता चौधरी रामवीर सिंह ने कहा कि यूनिट खुलने से आलू किसानों की तकदीर बदल जाती। डीजल में भी सब्सिडी नहीं दी। किसान परिवारों के लिए कुछ नहीं दिया गया। भारतीय किसान संघ के प्रांत अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने कहा कि सम्मान निधि को बढ़ाकर 18 हजार रुपये किए जाना चाहिए था। वित्त मंत्री को पत्र भी लिखा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। निराशा के भाव हैं।
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एमएसपी बढ़ाना सही, डीजल महंगा करना गलत
बजट में उत्पादन लागत का डेढ़ गुना एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) करने के प्रावधान को किसानों ने सराहा है। हालांकि डीजल महंगा होने पर निराशा जताई है। बाह के चौरंगाहार गांव के मंदिर पर चौपाल लगाकर किसानों ने बजट पर चर्चा की।
किसान उमाशंकर भारद्वाज, मुरारीलाल, राजीव पचौरी, राज कुमार, हरिओम, राजेंद्र कुमार, राम कुमार ने कहा कि लागत के हिसाब से उपज की कीमत मिलने से किसानों की माली हालत सुधरेगी। डीजल पर कृषि सेस का प्रावधान के संबंध में किसानों का कहना था कि सरकार को डीजल सस्ता करने का इंतजाम करना चाहिए।
बजट में उत्पादन लागत का डेढ़ गुना एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) करने के प्रावधान को किसानों ने सराहा है। हालांकि डीजल महंगा होने पर निराशा जताई है। बाह के चौरंगाहार गांव के मंदिर पर चौपाल लगाकर किसानों ने बजट पर चर्चा की।
किसान उमाशंकर भारद्वाज, मुरारीलाल, राजीव पचौरी, राज कुमार, हरिओम, राजेंद्र कुमार, राम कुमार ने कहा कि लागत के हिसाब से उपज की कीमत मिलने से किसानों की माली हालत सुधरेगी। डीजल पर कृषि सेस का प्रावधान के संबंध में किसानों का कहना था कि सरकार को डीजल सस्ता करने का इंतजाम करना चाहिए।