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Agra News: अपहृत को छुड़ाने में पुलिस पर हमले का था आरोप, सगे भाई बरी
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आगरा। सरकारी कर्मचारी को अगवा कर डेढ़ करोड़ रुपये फिरौती मांगने और पुलिस पर गोली चलाने के आरोपी दो सगे भाइयों कल्ला और रामसेवक को कोर्ट ने बरी कर दिया। सुनवाई पूरी होने पर एडीजे-21 विराट कुमार ने आदेश दिए। पुलिस इनके खिलाफ ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
दोनों आरोपी राजस्थान में धौलपुर, थाना डांग क्षेत्र के गांव डोले के निवासी हैं। थाना सैंया में दर्ज केस के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने तहरीर दी थी। बताया था कि 17 दिसंबर 2014 को वह थानाध्यक्ष डौकी आशीष कुमार सिंह, सर्विलांस प्रभारी छोटे लाल, दरोगा शैलेंद्र सिंह, हरीशंकर व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ प्राइवेट वाहनों से अपहृत रवि मिश्रा की सकुशल रिहाई के लिए पार्वती नदी की तरफ जा रहे थे।
टीम को देख बदमाशों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी। टीम ने घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की। इससे बदमाश हाथरस के लेबर काॅलोनी निवासी अपहृत रवि मिश्रा को छोड़कर भाग गए। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन की तरफ से वादी, अपहृत युवक सहित 6 गवाह पेश किए गए। रवि मिश्रा ने अपने बयान में बताया कि 29 नवंबर 2014 की रात करीब 7 बजे सिकंदरा से भगवान टाॅकीज जाने के लिए उन्होंने कार सवार युवकों से लिफ्ट मांगी थी।
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सरकारी नौकरी में कार्यरत होने की जानकारी होने पर बदमाशों ने बंदूक की बट मारकर उन्हें बेहोश कर दिया। उनके ही फोन से उनके पिता को फोन कर डेढ़ करोड़ रुपये फिरौती मांगी थी। 17 दिसंबर 2014 को पुलिस ने उन्हें मुक्त कराया था।
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दोनों आरोपी राजस्थान में धौलपुर, थाना डांग क्षेत्र के गांव डोले के निवासी हैं। थाना सैंया में दर्ज केस के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने तहरीर दी थी। बताया था कि 17 दिसंबर 2014 को वह थानाध्यक्ष डौकी आशीष कुमार सिंह, सर्विलांस प्रभारी छोटे लाल, दरोगा शैलेंद्र सिंह, हरीशंकर व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ प्राइवेट वाहनों से अपहृत रवि मिश्रा की सकुशल रिहाई के लिए पार्वती नदी की तरफ जा रहे थे।
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टीम को देख बदमाशों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी। टीम ने घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की। इससे बदमाश हाथरस के लेबर काॅलोनी निवासी अपहृत रवि मिश्रा को छोड़कर भाग गए। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन की तरफ से वादी, अपहृत युवक सहित 6 गवाह पेश किए गए। रवि मिश्रा ने अपने बयान में बताया कि 29 नवंबर 2014 की रात करीब 7 बजे सिकंदरा से भगवान टाॅकीज जाने के लिए उन्होंने कार सवार युवकों से लिफ्ट मांगी थी।
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सरकारी नौकरी में कार्यरत होने की जानकारी होने पर बदमाशों ने बंदूक की बट मारकर उन्हें बेहोश कर दिया। उनके ही फोन से उनके पिता को फोन कर डेढ़ करोड़ रुपये फिरौती मांगी थी। 17 दिसंबर 2014 को पुलिस ने उन्हें मुक्त कराया था।