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सगे भाई की हत्या: 6 साल बाद आरोपी बरी, साक्ष्यों की कड़ियां आपस में नहीं जोड़ सका अभियोजन पक्ष
Wed, 01 Apr 2026 10:41 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 01 Apr 2026 10:41 AM IST
सार
आगरा में सगे भाई की हत्या के मामले में छह साल बाद अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष मजबूत साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे आरोप साबित नहीं हो पाए।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जमीन और संपत्ति विवाद में सगे भाई की हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में छह साल बाद थाना इरादतनगर क्षेत्र के छत्तापुरा निवासी रामनरेश और दीवान सिंह को एडीजे मृदुल दुबे की अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजनक साक्ष्यों की कड़ियों को आपस में जोड़ने में असफल रहा, जिसके चलते आरोपियों को संदेह का लाभ मिला।
थाना इरादतनगर में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार छत्तापुरा निवासी पूनम देवी ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके पति पूरन सिंह का अपने भाई रामनरेश और दीवान सिंह से संपत्ति और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। इस बात पर उनके पति की भाइयों से मारपीट भी हुई थी। बात बढ़ने पर समाज के लोगों ने समझौता करा दिया था।
19 नवंबर 2019 की रात पति दिल्ली जाने की बोलकर घर से निकले थे। पांच दिन बाद उनका शव करब में दबा मिला। पुलिस ने पूरन के सगे भाई रामनरेश और दीवान सिंह के खिलाफ हत्या और सबूत नष्ट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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थाना इरादतनगर में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार छत्तापुरा निवासी पूनम देवी ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके पति पूरन सिंह का अपने भाई रामनरेश और दीवान सिंह से संपत्ति और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। इस बात पर उनके पति की भाइयों से मारपीट भी हुई थी। बात बढ़ने पर समाज के लोगों ने समझौता करा दिया था।
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19 नवंबर 2019 की रात पति दिल्ली जाने की बोलकर घर से निकले थे। पांच दिन बाद उनका शव करब में दबा मिला। पुलिस ने पूरन के सगे भाई रामनरेश और दीवान सिंह के खिलाफ हत्या और सबूत नष्ट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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