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सीबीसीआईडी की जांच में सही मिले रिश्वत के आरोप, सहायक अध्यापक से ली थी घूस
Fri, 24 Jul 2020 03:54 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 24 Jul 2020 03:54 PM IST
सार
सीबीसीआईडी कर रही थी जांच
लखनऊ विजिलेंस ने वर्ष 2017 में रंग हाथ पकड़ा था
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Bribe
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विस्तार
आगरा में वर्ष 2017 में सहायक अध्यापक से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए बेसिक शिक्षाधिकारी के तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैया लाल सारस्वत के खिलाफ सीबीसीआईडी ने चार्जशीट लगा दी है। उन पर लगे आरोप सही पाए गए।
मूलरूप से हाथरस के चंदपा निवासी तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैया लाल सारस्वत बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में तैनात थे। दो मई 2017 को लखनऊ की विजिलेंस टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। थाना शाहगंज में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में खेरागढ़ ब्लाक के सरेंडा में तैनात सहायक अध्यापक दिनेश सिंह चाहर ने शिकायत की थी।
आरोप था कि उनका निलंबन अवधि के जीवन निर्वहन भत्ता का 1.5 लाख रुपये रुके हुए थे। उसका बिल पास करने के बदले कन्हैया ने उससे रिश्वत में 50 हजार रुपये मांगी थी। सहायक अध्यापक के रिश्वत नहीं देने पर वेतन पास नहीं किया था। इस मामले में लखनऊ विजिलेंस ने जांच की।
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इसके बाद अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया था। आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी के पीछे शिक्षा माफिया और विजिलेंस की मिलीभगत का आरोप लगाया था। जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की। इस पर दिसंबर 2018 में जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। जांच में वित्त एवं लेखाधिकारी पर लगे आरोप सही पाए गए।
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मूलरूप से हाथरस के चंदपा निवासी तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैया लाल सारस्वत बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में तैनात थे। दो मई 2017 को लखनऊ की विजिलेंस टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। थाना शाहगंज में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में खेरागढ़ ब्लाक के सरेंडा में तैनात सहायक अध्यापक दिनेश सिंह चाहर ने शिकायत की थी।
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आरोप था कि उनका निलंबन अवधि के जीवन निर्वहन भत्ता का 1.5 लाख रुपये रुके हुए थे। उसका बिल पास करने के बदले कन्हैया ने उससे रिश्वत में 50 हजार रुपये मांगी थी। सहायक अध्यापक के रिश्वत नहीं देने पर वेतन पास नहीं किया था। इस मामले में लखनऊ विजिलेंस ने जांच की।
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इसके बाद अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया था। आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी के पीछे शिक्षा माफिया और विजिलेंस की मिलीभगत का आरोप लगाया था। जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की। इस पर दिसंबर 2018 में जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। जांच में वित्त एवं लेखाधिकारी पर लगे आरोप सही पाए गए।