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UP: इस लोकसभा सीट पर दो दशकों से जीत रही सपा, भाजपा और बसपा के ये पैंतरे कभी न आए काम; इस बार भी बड़ी चुनौती

Sat, 16 Mar 2024 01:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 16 Mar 2024 01:07 PM IST
सार

मैनपुरी लोकसभा सीट पर भाजपा और बसपा शाक्य प्रत्याशी के सहारे दो दशक से जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी है। इस बार भी यही पैंतरा अपनाया जा रहा है। 

 

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BJP win or will mainpuri seat remain dream Challenge to breach SP fort BSP can also adopt this maneuver
अखिलेश यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैनपुरी में ये पहली बार नहीं है जब शाक्य प्रत्याशी के सहारे भाजपा और बसपा जीत का सपना देख रही हैं। दो दशक से ये सिलसिला चला आ रहा है। कभी भाजपा तो कभी बसपा ने शाक्य प्रत्याशी मैदान में उतारा, लेकिन इसके बाद भी न तो हाथी दिल्ली पहुंच सका और न ही कमल खिलाने का सपना पूरा हो सका। अब देखना ये है कि इस बार भाजपा और बसपा दोनों ही शाक्य पर दांव लगा सकती हैं।
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सपा और मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी लोकसभा सीट पर ऐसी बादशाहत कायम की है गैर दलीय प्रत्याशियों का हर वार खाली ही गया। जीत के लिए भाजपा और बसपा ने हर बार अलग पैंतरा अपनाया, लेकिन फिर भी नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। लेकिन इस बार भी सपा को हराने के लिए भाजपा और बसपा दोनों ही एक पुराने पैंतरे का ही प्रयोग करने की तैयारी में हैं। ये पैंतरा और कुछ नहीं बल्कि शाक्य प्रत्याशी को मैदान में उतारने का ही है। पहली बार मुलायम सिंह यादव को हराने के लिए 2004 में बसपा ने ये दांव चला था। तब बसपा ने अशोक शाक्य को चुनावी मैदान में उतारा था।



 
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वहीं 2004 के उप चुनाव में सपा से धर्मेंद्र यादव ने चुनाव लड़ा। उनके सामने भी बसपा ने अशोक शाक्य को लड़ाया। लेकिन दोनों ही बार बसपा को हार ही मिली। इसके बाद 2009 के चुनाव में बसपा ने विनय शाक्य को और भाजपा ने तृप्ति शाक्या को मैदान में उतारा।

 
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शाक्य प्रत्याशी को मैदान में उतारने का ये सिलसिला यहीं नहीं थमा। भाजपा ने 2014 के उप चुनाव में प्रेमसिंह शाक्य को लड़ाया तो वहीं 2019 के चुनाव में भी मुलायम सिंह यादव के सामने प्रेमसिंह शाक्य ने ही ताल ठोंकी। गिनती बढ़ती गई, लेकिन जीत का ताज सपा के प्रत्याशी के सिर पर ही हर बार सजा।

 

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद 2022 में जब उप चुनाव हुए तो भी भाजपा को लगा कि शाक्य प्रत्याशी ही जीत का कमाल कर सकता है। बस फिर क्या था कमल खिलाने के लिए एक बार फिर रघुराज सिंह शाक्य को ही टिकट दे दिया। लेकिन डिंपल यादव ने 2.88 लाख वोटों से बंपर जीत हासिल की। इस बार भी भाजपा की पहली पसंद शाक्य जाति से आने वाले उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ही हैं। मैनपुरी के भाजपा नेता उन्हीं को लड़ाने की मांग कर रहे हैं। अब पार्टी इस बार क्या निर्णय करती है ये तो बाद में ही पता चल सकेगा।


 

2009 में भाजपा और बसपा दोनों ने लड़ाए थे शाक्य प्रत्याशी
वैसे तो कई चुनाव में शाक्य प्रत्याशी अलग-अलग दलों ने मैदान में उतारे लेकिन 2009 में दो दलों ने शाक्य प्रत्याशी उतारे थे। इसमें भाजपा ने पहली बार मशहूर भजन गायिका तृप्ति शाक्या को और बसपा ने विनय शाक्य को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में सपा से मुलायम सिंह यादव मैदान में थे। मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की और बसपा दूसरे तो भाजपा तीसरे स्थान पर रही।

 

बसपा की भी पहली पसंद है शाक्य प्रत्याशी
बसपा मैनपुरी सीट से प्रत्याशी उतारेगी या नहीं अब तक ये साफ नहीं हो सकेगा। लेकिन सूत्रों के अनुसार इस बार बसपा की पहली पसंद भी शाक्य प्रत्याशी ही है। सूत्रों के अनुसार शीर्ष नेतृत्व को भेजे गए पैनल में कुछ शाक्य प्रत्याशियों के नाम शामिल किए गए हैं। जल्द ही पार्टी ये तय कर देगी कि बसपा से कौन प्रत्याशी होगा।
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