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यूपी की सियासत में 'नाम' बोलता है...अब आगरा को 'अग्रवन' करने के लिए आवाज बुलंद
नीरज शर्मा, अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 06 Nov 2018 04:45 AM IST
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ताजमहल
प्रतीकों के बाद अब नामकरण की राजनीति जोर पकड़ने लगी है। मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने और फिर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के बाद लखनऊ का नाम बदलने की मांग उठी है और अब इस फेहरिस्त में ताजमहल के शहर आगरा का नाम भी जुड़ गया है।
उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने आगरा का नाम अग्रवन करने की मांग की है। उनका कहना है कि आगरा का नाम पहले अग्रवन ही था। अग्रवन को पहले अकबराबाद किया और उसके बाद इसे आगरा कर दिया गया। यह प्राचीन शहर है।
शहर के एक कोने पर यमुना नदी के किनारे बना कैलाश महादेव इसका जीता जागता सबूत हैं। यहां दो शिवलिंग स्थापित हैं। जिनकी स्थापना महर्षि परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदाग्नि ने की थी। परशुराम जी की माता की तपोस्थली रेणुकाधाम भी यहां से चंद कदम की दूरी पर है।
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आगरा जिला जैन धर्म का भी बड़ा केंद्र रहा है। विधायक ने कहा कि इस संबंध में वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख रहे हैं और दिवाली के बाद लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे और शहर का नाम बदलने की मांग की करेंगे।
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उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने आगरा का नाम अग्रवन करने की मांग की है। उनका कहना है कि आगरा का नाम पहले अग्रवन ही था। अग्रवन को पहले अकबराबाद किया और उसके बाद इसे आगरा कर दिया गया। यह प्राचीन शहर है।
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शहर के एक कोने पर यमुना नदी के किनारे बना कैलाश महादेव इसका जीता जागता सबूत हैं। यहां दो शिवलिंग स्थापित हैं। जिनकी स्थापना महर्षि परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदाग्नि ने की थी। परशुराम जी की माता की तपोस्थली रेणुकाधाम भी यहां से चंद कदम की दूरी पर है।
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आगरा जिला जैन धर्म का भी बड़ा केंद्र रहा है। विधायक ने कहा कि इस संबंध में वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख रहे हैं और दिवाली के बाद लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे और शहर का नाम बदलने की मांग की करेंगे।
महाभारत काल से शहर का संबंध
आगरा एक ऐतिहासिक नगर है, जिसके प्रमाण यह अपने चारों ओर समेटे हुए है। वैसे तो आगरा का इतिहास मुख्य रूप से मुगल काल से जाना जाता है लेकिन इसका संबंध महर्षि अंगिरा से माना जाता है जो 1000 वर्ष ईसा पूर्व हुए थे।
इतिहास में आगरा का पहला जिक्र महाभारत के समय से माना जाता है, जब इसे अग्रबाण या अग्रवन के नाम से संबोधित किया जाता था। कहते हैं कि पहले यह नगर आर्यग्रह के नाम से भी जाना जाता था। तौलमी पहला ज्ञात व्यक्ति था जिसने इसे आगरा नाम से संबोधित किया।
वैसे अभी के आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1506 ई. में बसाया था। आगरा मुगल साम्राज्य की चहेती जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रहा।
आज भी आगरा मुगलकालीन इमारतों जैसे - ताजमहल, लाल किला, फतेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन स्थल है। ये तीनों इमारतें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हैं। मुगल बादशाह बाबर ने यहां चौकोर (आयताकार एवं वर्गाकार) बागों का निर्माण कराया।
इतिहास में आगरा का पहला जिक्र महाभारत के समय से माना जाता है, जब इसे अग्रबाण या अग्रवन के नाम से संबोधित किया जाता था। कहते हैं कि पहले यह नगर आर्यग्रह के नाम से भी जाना जाता था। तौलमी पहला ज्ञात व्यक्ति था जिसने इसे आगरा नाम से संबोधित किया।
वैसे अभी के आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1506 ई. में बसाया था। आगरा मुगल साम्राज्य की चहेती जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रहा।
आज भी आगरा मुगलकालीन इमारतों जैसे - ताजमहल, लाल किला, फतेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन स्थल है। ये तीनों इमारतें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हैं। मुगल बादशाह बाबर ने यहां चौकोर (आयताकार एवं वर्गाकार) बागों का निर्माण कराया।