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कान्हा की नगरी में राम जन्मोत्सव: सूर्य वाहन में से निकले रघुनाथ, रामनवमी के एक माह बाद क्या है आयोजन का महत्व

Sat, 29 Apr 2023 01:42 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 29 Apr 2023 01:42 PM IST
सार

भगवान श्रीराम के जन्म उत्सव का आयोजन दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में बड़े धूमधाम से किया गया। तीन दिवसीय राम नवमी उत्सव का प्रारंभ गुरुवार से हुआ था।

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birth anniversary of Shriram celebrated in land of Lord Shriradha Krishna Vrindavan
रंगनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान श्रीराधा कृष्ण की भूमि वृंदावन में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में भगवान राम का जन्म उत्सव एक महीने बाद मनाया जा रहा है। सौर पंचांग के अनुसार राम नवमी शनिवार की है। यही वजह है कि राम जन्म उत्सव आज मनाया गया।  

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सूर्य वाहन में विराजमान हो कर निकले रघुनाथ जी 

तीन दिवसीय उत्सव के पहले दिन शाम को भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की सवारी निकाली गई। निज मंदिर से प्रभु के विग्रह चांदी की पालकी में विराजमान हो कर रथ मंडप पर पहुंचे। जहां भगवान के विग्रहों को सूर्य वाहन में विराजमान किया गया। इसके बाद आरती की गई और फिर सवारी निकाली गई। 

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दूसरे दिन स्वर्ण हाथी पर विराजमान हुए भगवान राम 

उत्सव के दूसरे दिन प्रातः भगवान का विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया। मंदिर के पुजारी रंगा स्वामी ने वैदिक मंत्रों के बीच भगवान की पूजा की। शाम के समय भगवान राम के विग्रह को स्वर्ण( सोने) निर्मित हाथी पर विराजमान किया गया। छोटे रथ पर रखे हाथी पर विराजमान भगवान के दर्शन अलौकिकता बिखेर रहे थे। प्रभु के दर्शन की झलक इस तरह से लग रही थी जैसे कोई महाराजा हाथी पर विराजमान होकर निकले हों। 

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पवित्र नदियों के जल से हुआ अभिषेक 

उत्सव के अंतिम दिन भगवान राम का जन्म उत्सव मनाया गया। सुबह 10 बजे से मंदिर में भगवान राम,सीता जी और लक्ष्मण जी के उत्सव विग्रह का अभिषेक शुरू हुआ। नौ पवित्र नदियों का जल,जड़ी बूटी,औषधि युक्त जल से तीनों विग्रह का अभिषेक किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पंचामृत अभिषेक हुआ। 

कुंभ आरती की गई 

अभिषेक के पश्चात भगवान राम,जानकी जी और लक्ष्मण जी का श्रृंगार किया गया । करीब 2 घंटे तक अभिषेक और श्रृंगार करने के बाद प्रभु की पहले कुंभ आरती की गई। कुंभ आरती यानि भगवान की नजर उतारी गई। इसके बाद प्रभु को तरह तरह के बनाए गए व्यंजन अर्पित होंगे। शाम के समय भगवान राम की सवारी हनुमान जी पर विराजमान कर मंदिर परिसर में निकाली जाएगी।

एक महीने बाद इसलिए मनाया जा रहा राम जन्म उत्सव 

दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में पूजा सेवा,उत्सव सौर पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं। यहां पांचरात विधि से पूजन अर्चन किया जाता है। मंदिर के सेवायत चक्रपाणि मिश्रा ने बताया कि सौर पंचांग के अनुसार राम नवमी का पर्व इस बार 29 अप्रैल शनिवार को पड़ रहा है। इसीलिए मंदिर में राम नवमी अन्य स्थानों की अपेक्षा एक महीने बाद मनाई जा रही है।

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