फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   bird festival jarar agra

बर्ड फेस्टिवल से हस्तशिल्पियों को निराशा

Sun, 04 Dec 2016 12:14 AM IST
बर्ड फेस्टिवल से हस्तशिल्पियों को निराशा
बर्ड फेस्टिवल से हस्तशिल्पियों को निराशा Updated Sun, 04 Dec 2016 12:14 AM IST
विज्ञापन
bird festival jarar agra
बर्ड फेस्टिवल से हस्तशिल्पियों को निराशा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बर्ड फेस्टिवल में हस्तशिल्पियों के लगाए हैंडीक्राफ्ट स्टालों पर शनिवार को दूसरे दिन भी बिक्री न होने से वे परेशान रहे।  बनारस की साड़ियों, फीरोजाबाद की कांच की चिड़ियों, कानपुर की दरियों और हाथ की बनी गुड़ियों के स्टाल पर भीड़ तो पहुंची लेकिन किसी ने खरीदारी नहीं की। इसके पीछे वजह चाहे जो भी हो लेकिन हस्तशिल्पी भाड़ा निकलने तक को तरस गये हैं। 
विज्ञापन

कानपुर के मोहम्मद अंसारी को 2012 और 2013 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राममनोहर लोहिया हस्तशिल्प प्रोत्साहन योजना के तहत सम्मानित कर 45 हजार रुपये का इनाम दिया था। लेकिन बर्ड फेस्टिवल में दूसरे दिन तक उनके स्टाल पर कोई बिक्री नहीं हुई। जिला उद्योग केन्द्र ने बर्ड फेस्टिवल में हस्तशिल्प को शामिल नहीं किया। नतीजा ये है कि भाड़ा तक निकालना मुश्किल हो गया है। बनारसी साड़ियों का स्टाल लगाने वाले जमील अहमद ने बताया कि दो दिन में कोई बिक्री नहीं हुई है। साड़ी कितने की है पूछकर लोग लौट जाते हैं। वजह नोटबंदी हो या कुछ और। फिलहाल भाडे़ के लाले पड़ गये हैं। फीरोजाबाद के अशोक कुमार ने हाथ से बनाई कांच की चिड़ियों की स्टाल लगाई है। पिछले साल राममनोहर लोहिया हस्तशिल्प पुरस्कार से मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया था। लेकिन बर्ड फेस्टिवल में अब तक बिक्री नहीं हुई है। कानपुर की गिरिजा देवी ने हाथ की बनी गुड़ियों का स्टाल लगाया है। सात बेटियां और दो बेटों की परवरिश अपने इसी हस्तशिल्प से कर रही हैं। दो सितंबर को मुख्यमंत्री के सामने परिवार की दुश्वारियां रखीं तो उन्होंने लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार के लिए आवेदन लिया। फेस्टिवल में अब तक बिक्री न होने से वह भी परेशान हैं। उनके पास भाडे़ के लिए पैसे भी नहीं हैं।
विज्ञापन


चिड़ियों की आकृति उकेर तूलिका से भरे जीवंत रंग
बाह। बर्ड फेस्टिवल में शनिवार को चिड़ियों की आकृति बनाकर उसमें तूलिका से ऐसे जीवंत रंग भरे कि मानो चिड़ियां सचमुच उड़ ही जाएंगी। इन आकृतियों को देखकर देशी विदेशी पक्षी विशेषज्ञ भी बोल उठे वाह, वाह...। चिड़ियों की आकृति उकेरने में मेरठ के मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार की पत्नी सुषमा कुमार भी शामिल रहीं। उन्होंने बताया कि पति के संग वाइल्ड लाइफ और नेचर से भी प्यार हो गया है। सेव द टाइगर और सेव द बर्ड पर कई अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित कर जनजागरण अभियान चलाने वाली सुषमा कुमार को पक्षी और उन पर पेंटिंग खूब भाती है। उनके अलावा केरला की मीनाक्षी सुब्रमण्डयम, धारवाड़ कर्नाटक की वैदेही गुंजाल आदि ने चिड़ियों के जीवंत चित्र उकेरे।
विज्ञापन
विज्ञापन


पेंटिंग में स्कूली बच्चों ने भी दिखाए हाथ, पक्षी और पर्यावरण उकेरे भाव
बाह। बर्ड फेस्टिवल में शनिवार को जायका के तहत पर्यावरण और पक्षियों को लेकर स्कूली छात्र-छात्राओं की पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गयी। जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी भावनाओं को आकार दिया और उसमें तूलिका से रंग भरे। किसी ने पेड़ों को, किसी ने टाइगर को, किसी ने चिड़ियों को बचाने की नसीहत दी। पेंटिंग प्रतियोगिता के बाद विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने बर्ड फेस्टिवल की आर्ट और कल्चरल गैलरी का निरीक्षण किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed