{"_id":"5d724e598ebc3e017d36260b","slug":"big-scam-exposed-in-street-lighting-in-etah","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'रोशनी' में किया डेढ़ करोड़ का घोटाला, 'अंधेरा' होने पर चला पता, मंडलायुक्त ने दिए जांच के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'रोशनी' में किया डेढ़ करोड़ का घोटाला, 'अंधेरा' होने पर चला पता, मंडलायुक्त ने दिए जांच के आदेश
Sat, 07 Sep 2019 05:47 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 07 Sep 2019 05:47 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा जिले की नगर पंचायत निधौलीकलां में मार्ग प्रकाश व्यवस्था के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष ने स्थानीय निकाय निदेशालय और मंडलायुक्त से शिकायत कर जांच की मांग की है। मामले में मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं।
निधौलीकलां नगर पंचायत को साल 2017-18 में आदर्श नगर योजना के तहत विद्युतीकरण मार्ग प्रकाश व्यवस्था के लिए शासन ने डेढ़ करोड़ रुपये जारी किए गए थे। नगर पंचायत को 75-75 लाख रुपये की दो किश्तों में यह धनराशि दी गई थी।
नगर पंचायत अध्यक्ष देवलाल लोधी ने शिकायत में कहा कि 75 लाख की पहली किश्त में 200 एलईडी (45 वॉट) और 37 एलईडी (70 वॉट) शर्मा इंटरप्राइजेज बदायूं से महंगे दामों में खरीदी गईं। इनकी गुणवत्ता खराब थी। 45 वॉट की एलईडी 25146 रुपये और 70 वॉट की एलईडी 40293 रुपये की दर से खरीदी गईं और विद्युत पोल 27076 रुपये की दर से खरीदा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
निधौलीकलां नगर पंचायत को साल 2017-18 में आदर्श नगर योजना के तहत विद्युतीकरण मार्ग प्रकाश व्यवस्था के लिए शासन ने डेढ़ करोड़ रुपये जारी किए गए थे। नगर पंचायत को 75-75 लाख रुपये की दो किश्तों में यह धनराशि दी गई थी।
विज्ञापन
नगर पंचायत अध्यक्ष देवलाल लोधी ने शिकायत में कहा कि 75 लाख की पहली किश्त में 200 एलईडी (45 वॉट) और 37 एलईडी (70 वॉट) शर्मा इंटरप्राइजेज बदायूं से महंगे दामों में खरीदी गईं। इनकी गुणवत्ता खराब थी। 45 वॉट की एलईडी 25146 रुपये और 70 वॉट की एलईडी 40293 रुपये की दर से खरीदी गईं और विद्युत पोल 27076 रुपये की दर से खरीदा गया।
विज्ञापन
मानकों का ध्यान नहीं रखा गया
खरीदारी में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। वहीं बाजार में अच्छी कंपनी की 45 वॉट की एलईडी 5500 रुपये और 70 वॉट की एलईडी 7700 रुपये की आती है। विद्युत पोल आठ हजार रुपये का मिलता है। कार्य को लेकर आपूर्तिकर्ता फर्म की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई। खराब गुणवत्ता के कारण सारी लाइटें कुछ ही दिन में खराब हो गईं और पोल गल गए।
पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने निरीक्षण किया तो प्रकाश व्यवस्था की पोल खुल गई। उन्होंने कर्मचारियों और ईओ से पत्रावलियां मांगी, तो नहीं दी गई। मामले की शिकायत स्थानीय निकाय निदेशालय से की गई है। जिस पर निदेशालय के निर्देश पर मंडलायुक्त ने डीएम को जांच के निर्देश दिए हैं।
कुछ महीनों पहले मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई थी। जिस पर तत्कालीन संयुक्त मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने जांच की थी। जांच टीम को भी लिपिकों ने पत्रावलियां नहीं दीं। अब मामले में मंडलायुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने निरीक्षण किया तो प्रकाश व्यवस्था की पोल खुल गई। उन्होंने कर्मचारियों और ईओ से पत्रावलियां मांगी, तो नहीं दी गई। मामले की शिकायत स्थानीय निकाय निदेशालय से की गई है। जिस पर निदेशालय के निर्देश पर मंडलायुक्त ने डीएम को जांच के निर्देश दिए हैं।
कुछ महीनों पहले मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई थी। जिस पर तत्कालीन संयुक्त मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने जांच की थी। जांच टीम को भी लिपिकों ने पत्रावलियां नहीं दीं। अब मामले में मंडलायुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।