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Bhai Dooj: भैया दूज पर इस बार है आयुष्मान योग, ऐसे करें भाई की दीर्घायु की कामना
Tue, 29 Oct 2019 04:00 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 29 Oct 2019 04:00 PM IST
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भाई दूज
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पंच महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार को भाई-बहन के पावन प्रेम के पर्व भैया दूज धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस पर्व पर बहनें थाली में गोला, मिठाई, रोली, चावल और दीपक रखकर भाइयों को मंगल तिलक लगाती हैं।
भैया दूज पर इस बार आयुष्मान योग बन रहा है, जबकि नक्षत्र विशाखा है। शुभ मुहूर्त सुबह सुबह 8:10 से 10:31 बजे तक और दोपहर में 2:06 से 3:00 बजे तक रहेगा। आगरा समेत पूरे मंडल में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।
ऐसे करें भाई का तिलक
कैलाश मंदिर के महंत धीरेंद्र झा के अनुसार भाई दूज के दिन सबसे पहले स्नान कर तैयार हो जाएं। उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल देकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें।
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सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें। अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का तिलक कर मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं।
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भैया दूज पर इस बार आयुष्मान योग बन रहा है, जबकि नक्षत्र विशाखा है। शुभ मुहूर्त सुबह सुबह 8:10 से 10:31 बजे तक और दोपहर में 2:06 से 3:00 बजे तक रहेगा। आगरा समेत पूरे मंडल में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।
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ऐसे करें भाई का तिलक
कैलाश मंदिर के महंत धीरेंद्र झा के अनुसार भाई दूज के दिन सबसे पहले स्नान कर तैयार हो जाएं। उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल देकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें।
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सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें। अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का तिलक कर मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं।
यमुना स्नान का है महत्व
भैया दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं। शनिदेव, यमुना और यमराज भाई-बहन हैं। ऐसी मान्यता है कि भैया दूज के दिन भाई-बहन यमुना में साथ स्नान करें तो यम की फांस से मुक्त हो जाते हैं। अकाल मृत्यु नहीं होती है।
यम द्वितीया पर यमुना स्नान शुभ माना जाता है। मथुरा-वृंदावन में तो हजारों लोग जाते ही हैं, अब शहर में इसका प्रचलन बढ़ रहा है। लेकिन इसको लेकर यमुना के घाटों पर कोई तैयारी नहीं है। हाथीघाट, बल्केश्वर घाट, पोइया घाट, कैलाश घाट आदि जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
किनारों पर इतनी गंदगी है कि यहां स्नान करना तो दूर खड़ा रहना मुश्किल है। गोकुल बैराज से पर्याप्त मात्रा में पानी न छोड़े जाने से नदी में जलस्तर भी काफी कम है। किनारों पर नालों का गंदा पानी ही एकत्रित है। काले रंग के पानी से आचमन तक नहीं किया जा सकता।
यम द्वितीया पर यमुना स्नान शुभ माना जाता है। मथुरा-वृंदावन में तो हजारों लोग जाते ही हैं, अब शहर में इसका प्रचलन बढ़ रहा है। लेकिन इसको लेकर यमुना के घाटों पर कोई तैयारी नहीं है। हाथीघाट, बल्केश्वर घाट, पोइया घाट, कैलाश घाट आदि जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
किनारों पर इतनी गंदगी है कि यहां स्नान करना तो दूर खड़ा रहना मुश्किल है। गोकुल बैराज से पर्याप्त मात्रा में पानी न छोड़े जाने से नदी में जलस्तर भी काफी कम है। किनारों पर नालों का गंदा पानी ही एकत्रित है। काले रंग के पानी से आचमन तक नहीं किया जा सकता।