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वृंदावन में घूमते हजारों भिक्षुकों से संक्रमण का डर, इनके पास न मास्क न साबुन

Tue, 31 Mar 2020 02:00 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, वृंदावन
संवाद न्यूज एजेंसी, वृंदावन Published by: आगरा ब्यूरो Updated Tue, 31 Mar 2020 02:00 AM IST
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Thousands of monks wandering in Vrindavan fearing of corona virus infection
मथुरा। इस्कॉन मंदिर के पास परिक्रमा मार्ग में सड़क किनारे लेटे भिक्षुक बाबा। - फोटो : VRINDAVAN

न मास्क न सैनिटाइजर, न हाथ धोने के लिए साबुन और बीमार होने की स्थिति में चिकित्सा की सुविधा भी नहीं। जी हां, कोरोना के कारण प्रधानमंत्री ने पूरे देश को लॉकडाउन कर रखा है लेकिन इन दिनों में भी वृंदावन में करीब पांच हजार से अधिक भिक्षुक बाबा सड़कों पर या उनक किनारे बने फुटपाथों पर सोते हुए मिल जाएंगे। ये एक-दूसरे के इतने नजदीक रहते हैं कि यदि इनमें कोरोना का संक्रमण हुआ तो पूरा वृंदावन चपेट में आ जाएगा। इनकी तरफ प्रशासन, पुलिस तथा अन्य सामाजिक संस्थाएं भी ध्यान नहीं दे रही हैं।

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वृंदावन मेें विभिन्न अन्न क्षेत्रों तथा दान करने वाले श्रद्धालुओं के सहारे गुजर बसर करने वाले बेघर भिक्षुक बाबाओं की इस समय जान पर बन आई है। पूरा देश इस समय लॉकडाउन में है लेकिन यह बाबा सड़कों के किनारे मिल जाएंगे। लॉकडाउन की शुरुआत में इन्हें भोजन की भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब इन्हें भोजन तो पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है लेकिन कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए इनके पास न तो मास्क हैं और न ही इनके पास बार-बार हाथ साफ करने के लिए साबुन और हाथ धोने की सुविधा।
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सबसे बड़ी बात इसके लिए इन्हें जागरूक भी नहीं किया जा रहा है। रात हो या दिन वृंदावन के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क किनारे बने फुटपाथ या फिर मार्केट आदि के पास अपने स्थान बना रखे हैं। यह सभी वहीं ग्रुप में रहते हैं। यदि इनमें से किसी एक को संक्रमण हुआ तो यह संक्रमण पूरे क्षेत्र में फैलेगा। भिक्षुक बाबा केसी घाट, विद्यापीठ, इस्कॉन के आसपास तथा अन्य स्थानों पर रह रहे हैं।
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रह रहे कई मजदूर भी
इन बाबाओं के बीच कई ऐसे मजदूर भी रह रहे हैं जिनके पास कुछ दिन पहले तक वृंदावन में काफी काम होता था लेकिन अब उनके पास कोई काम नहीं है। वह भी इनके बीच ही रह रहे हैं। मध्य प्रदेश दमोहा के रहने वाले एक मजदूर सुनील ने बताया कि वह फुटपाथ पर बाबाओं के बीच रहकर समय गुजार रहा है। उसे मालूम ही नहीं है कि रैन बेसरा कहां हैं।

दो भिक्षुक बाबाओं को आया बुखार
विगत तीन दिनों से दो भिक्षुक बाबाओं को बुखार आया हुआ है। इसकी जानकारी रविवार को कोरोना कंट्रोल पर भी दी गई लेकिन कोई भी इन्हें लेने नहीं आया। मध्य प्रदेश के रहने वाले कोमल तथा धर्मेंद्र ने बताया कि उन्हें तीन दिन से बुखार आ रहा है। उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।


निगम के कोरोना कैंप में नहीं आया कोई विस्थापित
नगर निगम द्वारा कोरोना के कारण मजदूरी आदि छोड़कर घरों की तरफ जाने वाले लोगों के लिए दो स्थानों पर रैन बसेरा में कैंप लगवाए हैं। यह कैंप शहीद लक्ष्मण पार्क तथा परशुराम पार्क के निकट बने हैं। इन पार्कों में कुल 21 बेड डाले गए हैं। सोमवार सुबह इन्हें तैयार कर दिया गया था। शाम तक इन रैन बसेरा में कोई भी व्यक्ति नहीं आया था। रैन बसेरा में निगम का एक-एक कर्मचारी भी तैनात किया गया है। यह कर्मचारी हर आने वाले व्यक्ति का रिकॉर्ड भी रखेगा। इन रैन बसेरा को सैनिटाइज भी किया गया है। अपर नगर आयुक्त सतेंद्र तिवारी ने बताया कि यह रैन बसेरा को कैंप का रूप दे दिया गया है। इनमें रहने के इच्छुक व्यक्ति यहां आकर रह सकते हैं।

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