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एसएनः डॉक्टर साहब! आईसीयू में कोई बेड खाली हुआ है क्या? संक्रमित बढ़ने से चरमराई व्यवस्था...

Thu, 24 Sep 2020 12:20 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 24 Sep 2020 12:20 PM IST
सार

एसएन में गंभीर मरीजों के लिए यह है व्यवस्था:
  • 200: बेड का आइसोलेशन
  • 60: बेड आईसीयू में
  • 60: वेंटिलेटर
  • 10: वेंटिलेटर अतिरिक्त
  • 17: एचएफएनसी मशीनें
  • 14: बाईपैप मशीनें
  • 200: रेमडेसिविर इंजेक्शन

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Bed Full In Icu Of Sn Medical College Agra Due To Corona Virus Infection
एसएन मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉक्टर साहब! आईसीयू में कोई बेड खाली हुआ है क्या? हम दो दिन से परेशान हैं, हमारा मरीज निजी अस्पताल में भर्ती है, वहां से रेफर कर दिया है...। यह सवाल बुधवार दोपहर दो बजे टूंडला के व्यक्ति ने एसएन के डॉक्टर से फोन पर किया। ऐसे आठ से दस फोन रोज एसएन के डॉक्टरों के पास आ रहे हैं। कारण यह है कि आइसोलेशन वार्ड फुल है। आईसीयू में भी कोई बेड खाली नहीं है।
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गंभीर संक्रमित मरीज बढ़ने से एसएन मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती होने के लिए बुकिंग करानी पड़ रही है। कॉलेज की ई-मेल आईडी पर आवेदन के 24 से 48 घंटे बाद ही भर्ती होने का नंबर आ पा रहा है। तब तक मरीज पहले से भर्ती वाले अस्पताल में ही इलाज कराते हैं।
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15 दिन से फुल है आईसीयू
एसएन में संक्रमित मरीजों के लिए दो आइसोलेशन वार्ड में 60 बेड का आईसीयू है। बीते 15 दिन से यह लगभग फुल चल रहा है। ऐसे में दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को भर्ती होने के लिए कॉलेज प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ रही है। ई-मेल पर मरीज का प्रार्थनापत्र आने के बाद मरीज का नाम, कोरोना की जांच रिपोर्ट, उसकी हालत क्या है सहित उसका पूरा ब्योरा, संबंधित अस्पताल के चिकित्सक का लेटर आदि जानकारी रजिस्टर में दर्ज की जा रही है।

निजी अस्पतालों में भर्ती मरीज ज्यादा आ रहे
आईसीयू प्रभारी डॉ. राजीव पुरी ने बताया कि रेफर होकर आने वालों में सबसे ज्यादा मथुरा, फिरोजाबाद, इटावा, अलीगढ़, मैनपुरी समेत आगरा के निजी कोविड अस्पतालों के मरीज हैं।


रोजाना पांच से आठ तीमारदार फोन कर वेंटिलेटर खाली होने की जानकारी करते हैं। ई-मेल पर तीन से पांच के प्रार्थना पत्र आते हैं। इनमें 90 फीसदी निजी कोविड अस्पताल के मरीज हैं, जो चार-पांच दिन भर्ती होने के बाद हालत में सुधार न होने पर एसएन रेफर कर देते हैं।

दो से तीन दिन में खाली हो पा रहे बेड 
जिन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है, उनके तीमारदार ई-मेल आईडी पर मरीज की पूरी जानकारी भेजते हैं। आईसीयू में बेड खाली होने के बाद ही उनको मरीज लाने के लिए कहा जाता है, जिससे मरीज को तत्काल वेंटिलेटर मिल जाए। मरीजों की गंभीर हालत को देखते हुए दो से तीन दिन में ही बेड खाली हो पा रहे हैं। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य

दो दिन में मिला बेड 
कुबेरपुर निवासी 62 साल की महिला निजी अस्पताल में चार दिन से भर्ती थी। इनके परिजनों ने एसएन में भर्ती करने के लिए मेल किया, जिसके बाद दो दिन बाद बेड मिला। तब तक मरीज का निजी अस्पताल में ही इलाज चलता रहा।

30 घंटे किया इंतजार
मथुरा के निजी अस्पताल में महिला की हालत में सुधार न होने पर एसएन कॉलेज में भर्ती कराने के लिए पंजीकरण कराया। इनको 30 घंटे बाद बेड खाली होने पर जानकारी दी गई और मरीज को भर्ती कर लिया गया।
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