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UP: शिक्षा विभाग का बाबू रिश्वत लेते गिरफ्तार, एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ पकड़ा
Fri, 08 Mar 2024 09:54 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 08 Mar 2024 09:54 AM IST
सार
भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने शिक्षा विभाग के बाबू को पांच लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। बाबू ने मृतक आश्रित कोटे में नौकरी लगवाने के नाम पर रिश्वत की मांग की थी।
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शिक्षा विभाग का बाबू रिश्वत लेते गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक रामप्रकाश को बृहस्पतिवार रात भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने 5 लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। उसने मृतक आश्रित कोटे में विद्यालय में नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये की मांग की थी। पीड़ित की शिकायत पर जाल बिछाकर उसे रंगे हाथ पकड़ा गया। शुक्रवार को कोर्ट में पेशकर आरोपी को जेल भेज दिया गया।
सी-2 सेक्टर, शास्त्रीपुरम निवासी अश्वनी कुमार सिंह के पिता अनिरुद्ध कुमार सिंह स्टुअर्ट वार्ड मेमोरियल हायर सेकंडरी स्कूल, सिकंदरा में सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) थे। 6 अगस्त 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद अश्वनी ने 1 साल पहले विद्यालय में शिक्षक की नौकरी के लिए आवेदन किया। मगर, विद्यालय ने आवेदन वापस कर दिया। 14 मार्च 2023 को उसकी मां सरला चौहान ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बेटे की नौकरी के लिए आवेदन किया। मगर, 5 महीने बाद भी सुनवाई नहीं हो सकी। अपर जिलाधिकारी नगर से शिकायत पर भी कुछ नहीं हुआ। वह 9 फरवरी को जिला विद्यालय निरीक्षक से भी मिले थे।
उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक रामप्रकाश से कार्रवाई के लिए कहा। उसने 6 लाख रुपये की मांग की। बाद में 5 लाख रुपये पर आ गया। एक सप्ताह में काम का आश्वासन दिया। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि 4 मार्च को शिकायत मिली थी। आरोप की पुष्टि होने पर टीम बनाई गई। बृहस्पतिवार रात को अश्वनी को 5 लाख रुपये के साथ बुलाया गया। उसने रामप्रकाश से संपर्क किया। राम प्रकाश ने लायर्स काॅलोनी में बुलाया। वहां 5 लाख रुपये की थैली पकड़ते ही राम प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया। नोटों की थैली पर फिनाफ्थलीन पाउडर लगा था। हाथों को केमिकल से धुलवाने पर रंग गुलाबी हो गया।
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पुलिस टीम आरोपी को सिकंदरा थाना लेकर आई। मामले में पुलिस उपाधीक्षक बिशुनदेव यादव ने केस दर्ज कराया। आरोपी को शुक्रवार को मेरठ की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
एडीएम से मिले फिर भी कुछ न हुआ
पीड़ित अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि वह विद्यालय में नौकरी के लिए विभाग के चक्कर काट रहे थे। मगर, सुनवाई नहीं हो रही थी। प्रधानाचार्य के संस्तुति करने पर भी आपत्ति लगा दी गई थी। दोबारा प्रधानाचार्य से संस्तुति कराई गई। इसके बावजूद नौकरी नहीं लग रही थी। 7 फरवरी 2024 को अपर जिलाधिकारी नगर को प्रार्थनापत्र दिया। उन्होंने जांच के आदेश किए। मगर, कुछ नहीं हुआ था।
पैसे दोगे तो एक सप्ताह में करा देंगे ज्वाइनिंग
पीड़ित अश्वनी ने आरोप लगाया कि कोई सुनने को तैयार नहीं था। प्रधान सहायक हर बार एक ही बात बोलता था कि यहां बिना रुपये के कोई काम नहीं होता। जिला विद्यालय निरीक्षक बिना रुपये के ज्वाइनिंग नहीं कराते हैं। 1 मार्च को वह राम प्रकाश से मिले थे। तब उसने आश्वासन दिया कि 5 लाख देने पर एक सप्ताह में काम करा देगा। वह रुपये नहीं देना चाहता था इसलिए एंटी करप्शन में शिकायत दर्ज कराई। आरोपी पकड़े जाने पर यही कह रहा था कि डीआईओएस प्रथम दिनेश कुमार के कहने पर ही 5 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। इसमें से उसे भी कुछ हिस्सा मिल जाता। टीम इसकी जांच कर रही है।
2 साल में पकड़े गए 20 कर्मचारी
भ्रष्टाचार निवारण संगठन रिश्वत की शिकायत पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। आगरा मंडल में 2 साल में विभिन्न विभागों के 20 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें शिक्षा और राजस्व विभाग के लोग अधिक हैं।
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सी-2 सेक्टर, शास्त्रीपुरम निवासी अश्वनी कुमार सिंह के पिता अनिरुद्ध कुमार सिंह स्टुअर्ट वार्ड मेमोरियल हायर सेकंडरी स्कूल, सिकंदरा में सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) थे। 6 अगस्त 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद अश्वनी ने 1 साल पहले विद्यालय में शिक्षक की नौकरी के लिए आवेदन किया। मगर, विद्यालय ने आवेदन वापस कर दिया। 14 मार्च 2023 को उसकी मां सरला चौहान ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बेटे की नौकरी के लिए आवेदन किया। मगर, 5 महीने बाद भी सुनवाई नहीं हो सकी। अपर जिलाधिकारी नगर से शिकायत पर भी कुछ नहीं हुआ। वह 9 फरवरी को जिला विद्यालय निरीक्षक से भी मिले थे।
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उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक रामप्रकाश से कार्रवाई के लिए कहा। उसने 6 लाख रुपये की मांग की। बाद में 5 लाख रुपये पर आ गया। एक सप्ताह में काम का आश्वासन दिया। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि 4 मार्च को शिकायत मिली थी। आरोप की पुष्टि होने पर टीम बनाई गई। बृहस्पतिवार रात को अश्वनी को 5 लाख रुपये के साथ बुलाया गया। उसने रामप्रकाश से संपर्क किया। राम प्रकाश ने लायर्स काॅलोनी में बुलाया। वहां 5 लाख रुपये की थैली पकड़ते ही राम प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया। नोटों की थैली पर फिनाफ्थलीन पाउडर लगा था। हाथों को केमिकल से धुलवाने पर रंग गुलाबी हो गया।
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पुलिस टीम आरोपी को सिकंदरा थाना लेकर आई। मामले में पुलिस उपाधीक्षक बिशुनदेव यादव ने केस दर्ज कराया। आरोपी को शुक्रवार को मेरठ की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
एडीएम से मिले फिर भी कुछ न हुआ
पीड़ित अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि वह विद्यालय में नौकरी के लिए विभाग के चक्कर काट रहे थे। मगर, सुनवाई नहीं हो रही थी। प्रधानाचार्य के संस्तुति करने पर भी आपत्ति लगा दी गई थी। दोबारा प्रधानाचार्य से संस्तुति कराई गई। इसके बावजूद नौकरी नहीं लग रही थी। 7 फरवरी 2024 को अपर जिलाधिकारी नगर को प्रार्थनापत्र दिया। उन्होंने जांच के आदेश किए। मगर, कुछ नहीं हुआ था।
पैसे दोगे तो एक सप्ताह में करा देंगे ज्वाइनिंग
पीड़ित अश्वनी ने आरोप लगाया कि कोई सुनने को तैयार नहीं था। प्रधान सहायक हर बार एक ही बात बोलता था कि यहां बिना रुपये के कोई काम नहीं होता। जिला विद्यालय निरीक्षक बिना रुपये के ज्वाइनिंग नहीं कराते हैं। 1 मार्च को वह राम प्रकाश से मिले थे। तब उसने आश्वासन दिया कि 5 लाख देने पर एक सप्ताह में काम करा देगा। वह रुपये नहीं देना चाहता था इसलिए एंटी करप्शन में शिकायत दर्ज कराई। आरोपी पकड़े जाने पर यही कह रहा था कि डीआईओएस प्रथम दिनेश कुमार के कहने पर ही 5 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। इसमें से उसे भी कुछ हिस्सा मिल जाता। टीम इसकी जांच कर रही है।
2 साल में पकड़े गए 20 कर्मचारी
भ्रष्टाचार निवारण संगठन रिश्वत की शिकायत पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। आगरा मंडल में 2 साल में विभिन्न विभागों के 20 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें शिक्षा और राजस्व विभाग के लोग अधिक हैं।