Agra: एडीए में लिपिकों व अफसर ने कमाई अकूत संपत्ति, 40-50 हजार की सैलरी... और महल जैसी बनीं कोठियां
आगरा में आगरा विकास प्राधिकरण के लिपिकों व अफसर ने अकूत संपत्ति कमाई है। 40-50 हजार की सैलरी में महल जैसी कोठियां बनीं हैं।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में बाबू से लेकर अधिकारी तक अरबपति हैं। अरबों रुपये की अकूत संपत्तियां कमाने के मामले में लेखाधिकारी व पांच लिपिकों के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इन पर आय से अधिक संपत्तियां अनैतिक ढंग से अर्जित करने के आरोप हैं।
सुल्तानगंज पुलिया निवासी रवि गांधी की याचिका पर अपर आयुक्त प्रशासन राजेश कुमार ने एडीए उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ से आरोपी अधिकारी व लिपिकों की रिपोर्ट मांगी है। याचिकाकर्ता रवि गांधी ने बताया कि एडीए में भ्रष्टाचार चरम पर है।
आरोप है कि लेखाधिकारी ने पारिवारिक सदस्यों के नाम से 14 संपत्तियां आवंटित कराईं। लिपिकों ने महल जैसी कोठियां बनाई हैं। जबकि तनख्वाह 40 से 50 हजार रुपये है। उन्होंने कहा कि रेवड़ी की तरह संपत्ति विभाग के लिपिकों ने अधिकारियों की मिलीभगत से अपने परिजन के नाम एडीए की बहुमूल्य संपत्तियां आवंटित कराई हैं। इन्हें निरस्त किया जाए।
संपत्तियां जब्त करने का अनुरोध
याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि एडीए के दागी अधिकारी व लिपिकों की बेशुमार संपत्तियों को जब्त किया जाए। जिन लिपिकों व अधिकारी पर आरोप हैं उनमें कई सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में हाईकोर्ट से अंतिम निर्णय नहीं होने तक आरोपी बाबू व अधिकारियों को सेवानिवृत्त व अन्य लाभ रोक दिए जाएं।
कराई जा रही जांच
जिन बाबू व अधिकारी पर आरोप हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। दोषी मिलेंगे तो सख्त कार्रवाई होगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। - चर्चित गौड़, उपाध्यक्ष, आगरा विकास प्राधिकरण
इन पर आरोप
- राकेश गौतम, सहायक लेखाधिकारी
- सतीश चंद्र शर्मा, प्रधान लिपिक, संपत्ति अनुभाग
- सतेंद्र सिंह, लिपिक संपत्ति अनुभाग
- गरीब चंद, कनिष्ठ लिपिक, प्रवर्तन अनुभाग
- राजीव सक्सेना, कनिष्ठ लिपिक, संपत्ति अनुभाग
- मनीष यादव, कनिष्ठ लिपिक, संपत्ति अनुभाग