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अगस्त क्रांति: जब अंग्रेजों ने आगरा पर ठोंका था 65 हजार का जुर्माना, जद में आए थे आगरा के 41 गांव

Thu, 19 Aug 2021 11:20 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 19 Aug 2021 11:20 AM IST
सार

अगस्त क्रांति की ज्वाला शांत करने के लिए शुरू किया था आर्थिक उत्पीड़न

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August kranti The British had imposed a fine of 65 thousand on Agra news in hindi
अगस्त क्रांति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नौ अगस्त 1942 से शुरू हुआ आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा था। ताजनगरी में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा दिए थे। जब अंग्रेज क्रांति की इस ज्वाला को शांत न कर सके तो उन्होंने लोगों का आर्थिक उत्पीड़न शुरू कर दिया। देशभर में जनता पर 90 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना ठोंका गया। ताजनगरी के 41 गांवों के हिस्से में 65 हजार से अधिक रुपये आए। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में चल-अचल संपत्ति को बंधक बनाने का फरमान तक जारी कर दिया गया। 

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13 मई 1942 को इन जुर्मानों की शुरुआत हुई और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 अगस्त को इसे लागू कर दिया गया। ये वो दौर था जब फिरोजाबाद भी आगरा जिले का ही एक हिस्सा था। उस समय एत्मादपुर के गांवों पर सर्वाधिक 21450, आगरा पर 12550, किरावली पर 12000, खेरागढ़ पर 6350, फतेहाबाद (शमसाबाद) पर 5000, बाह पर 4500 और फिरोजाबाद पर 3845 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। सर्वाधिक धनराशि बरहन और शमसाबाद पर पांच-पांच हजार रुपये की थोपी गई थी। कुल 65695 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया था।
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जमींदारों-साहूकारों से की वसूली
जिन इलाकों में सर्वाधिक आंदोलन हुए वहां के जमींदारों पर लगान वसूली और साहूकारों व उद्यमियों पर उनकी कुल आय का 15-15 फीसदी जुर्माना लगाया गया था। अगर संबंधित गांव का जमींदार वहां का स्थायी निवासी नहीं है और उसके कारिंदे वहां रहते हैं तो उनकी दो महीने की तनख्वाह सरकारी खजाने में जमा कराने के निर्देश जारी किए गए थे। करीब एक महीने तक वसूली अभियान चला। जिन लोगों ने पैसे नहीं दिए, उनका अंग्रेजों ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया।
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गिरा दिए थे मकान, जब्त कर लिए थे जेवर
अंग्रेज अफसरों ने इन गांवों की खरीफ की फसल को नष्ट कर दिया था। ग्रामीणों के मकानों में तोड़फोड़ की गई। कच्चे मकानों को पूरी तरह से ढहा दिया था। आदेश था कि अगर ग्रामीण पैसा जमा नहीं करते हैं तो उनके सोने-चांदी के आभूषण व कांसे के बर्तनों को जब्त कर लिया जाए। जुर्माना अदा करने के लिए अंग्रेजों ने ग्रामीणों के पास कुछ भी नहीं छोड़ा था। - सुगम आनंद, वरिष्ठ इतिहासकार

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