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मथुरा के दिल में बसे हैं अटल बिहारी वाजपेयी, तस्वीरों में देखिए उनका ब्रज प्रेम
Fri, 17 Aug 2018 02:29 PM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 17 Aug 2018 02:29 PM IST
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भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मथुरा से गहरा नाता रहा है। वो मथुरा से चुनाव हारे, लेकिन यहां आना जाना कम नहीं किया। 1957 के इलेक्शन के बाद अटल जी लगाव और बढ़ता चला गया। चाहें कवि सम्मेलन हो या फिर दीनदयाल धाम का कोई कार्यक्रम। उनकी मौजूदगी हर कार्यक्रम में रही। उनके बेहद करीबी रहे बांकेबिहारी माहेश्वरी का कहना है कि अटल जी मथुरा की जलेबी और कचौड़ी के बेहद शौकीन थे।
ब्रज के दिल में बसे हैं अटल बिहारी वाजपेयी, देखिए उनकी कुछ दुर्लभ तस्वीरें
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अटल बिहारी वाजपेयी का मथुरा से जुड़ाव 1957 से भी पुराना है। उस वक्त जनसंघ खुद को स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहा था। अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ से जुड़े थे। मथुरा में भी जनसंघ से जुड़े काफी लोग थे। लिहाजा उनका यहां आना जाना लगा रहता था। भाजपा के वरिष्ठ नेता बांकेबिहारी माहेश्वरी अटल जी के बेहद करीबी रहे। बांकेबिहारी माहेश्वरी का कहना है कि अटल जी से मथुरा के लोगों को भी बेहद लगाव था। जब भी वह मथुरा आते बाजार में घूमकर लोगों से मिला करते थे। यमुना के घाट पर अपने पुराने साथियों से मुलाकात किया करते थे।
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महीनों तक मथुरा में ही अटल बिहारी वाजपेयी का रहना हुआ करता था। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि पर जाकर दर्शन किया करते थे। माहेश्वरी जी का कहना है कि बेहद शांत और साफ मन के थे अटल जी। अटल जी के साथ के जो लोग थे उनके बारे में पूरी जानकारी रखा करते थे अटल जी। यहां तक कि जब प्रधानमंत्री बन गए थे तब भी वह अपने साथियों से मुलाकात किया करते थे।
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अटल बिहारी वाजपेयी 23 साल तक पंडिन दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान में बनाए गए दीनदयाल धाम के अध्यक्ष रहे। 1978 में धाम की स्थापना हुई और तभी संस्थापक सदस्य अटल जी को बना दिया गया था। दीनदयाल धाम में हर साल अटल जी का आना लगा रहा। वह जब भी यहां आते थे पूरा समय बिताते थे। उनके पुराने साथी भी अटल जी से मिलने दीनदयाल धाम पर ही पहुंच जाते थे। प्रधानमंत्री बनने तक वह अध्यक्ष रहे थे। दीनदयाल धाम के विकास के लिए भी केंद्र और प्रदेश सरकार स्तर से कई योजनाओं को शुरू कराया गया था।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत 11 फरवरी 1968 को हुई थी। उनका शव मुगलसराय स्टेशन के पास मिला था। सूचना पाकर अटल जी मौके पर पहुंच गए थे। शव को अटल जी के 30 राजेंद्र प्रसाद मार्ग पर रखा गया था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्ममानव दर्शन के प्रणेता पुस्तक में भी इसका वर्णन किया गया है।
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