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UP: दिमाग से लगाई कृत्रिम नस, कटने से बच गया मरीज का हाथ; एसएन के चिकित्सकों ने की जटिल सर्जरी

Wed, 28 Jan 2026 10:57 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Wed, 28 Jan 2026 10:57 PM IST
सार

मरीज की सर्जरी नहीं होने पर हाथ में गैंग्रीन होने का खतरा होने और हाथ काटने की नौबत बन सकती थी। ऐसे में चिकित्सकों ने मरीज की जटिल सर्जरी की। दिमाग को जाने वाली गर्दन की सीधी नस को 12 मिनट तक बंद कर हाथ तक कृत्रिम नस डाली।

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artificial nerve was implanted from brain, saving patient arm from amputation
चिकित्सकों ने की जटिल सर्जरी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने जटिल ऑपरेशन कर मरीज का हाथ कटने से बचाया है। चिकित्सकों ने दिमाग से हाथ तक कृत्रिम नस बनाकर रक्त संचार शुरू कराया। इससे हाथ तक रक्त संचार होने लगा है। उनका कहना है कि हाथ की ताकत भी पहले जैसी हो जाएगी।
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सीटीवीएस विभाग के डॉ. सुशील सिंघल ने बताया कि सिकंदरा निवासी शाहिद सलमानी (42) का बीते साल गुरु के ताल पर सड़क हादसा हो गया था। इसमें हाथ तक रक्त पहुंचाने वाली और ताकत की नसें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। दिल्ली-जयपुर में दिखाया तो उन्होंने सर्जरी के जोखिमों के बारे में बताया। इसकी जटिलता को देखते हुए सर्जरी नहीं कराई। रक्त संचार नहीं होने से मरीज का दायां हाथ पतला और काला पड़ने लगा। दर्द भी होने लगा। 
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इस पर एसएन कॉलेज में मरीज दिखाने आया। यहां सीटी एंजियोग्राफी करने पर हृदय से हाथ तक रक्त संचार करने वाली नस क्षतिग्रस्त और ताकत की नस बंद मिली। मरीज को ऑपरेशन ही अंतिम विकल्प बताया, सर्जरी नहीं होने पर मरीज के हाथ में गैंग्रीन होने का खतरा होने और हाथ काटने की नौबत बनती।
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इस पर दिमाग को जाने वाली गर्दन की सीधी नस को 12 मिनट तक बंद कर हाथ तक कृत्रिम नस डाली। फिर इसे गर्दन की नस से जोड़ दिया, जिससे हाथ तक रक्त संचार होने लगा। ताकत की नस भी खोल दी। अगर 20 मिनट तक दिमाग की नस बंद रहे तो मरीज को लकवा मार सकता है, जान का खतरा भी बढ़ जाता है। कुछ सप्ताह में मरीज के हाथ में पहले की तरह ताकत आ जाएगी और आकार भी पूर्ववत हो जाएगा।


प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि आयुष्मान योजना में ये ऑपरेशन पूरी तरह से निशुल्क हुआ है। निजी अस्पताल में ये करीब चार लाख रुपये का खर्च आता है। ऑपरेशन तीन घंटे तक चला। इसमें डॉ. राजीव पुरी, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. सुप्रिया, डॉ. कौस्तुभ, डॉॅ. शिव, डॉ. शिवांशु अग्रवाल, डॉ सनी चौधरी शामिल रहे।


 
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