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शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा: भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को भी बेचा अवैध हथियार, दर्ज हुआ केस; 18 साल बाद चला पता

Sat, 31 May 2025 08:37 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 31 May 2025 08:37 AM IST
सार

शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई, तो नए-नए खुलासे होते जा रहे हैं। आरोपी भूपेंद्र सारस्वत के पिता शिव कुमार सारस्वत ने भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को धोखे से अवैध पिस्टल बेच दी। इस बारे में उन्हें 18 साल बाद पता चला है।
 

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Arms license fraud: Illegal weapons were sold to former BJP district president case registered
श्याम भदौरिया और भूपेंद्र सारस्वत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम भदाैरिया ने अवैध हथियार बेचने के मामले में थाना जगदीशपुरा में केस दर्ज कराया है। इसमें भूपेंद्र सारस्वत के पिता शिव कुमार सारस्वत को नामजद हैं। श्याम भदौरिया अवैध हथियार मामले में मुख्य गवाह भी हैं। उन्होंने एसटीएफ से यह भी कहा है कि कोर्ट में बयान देंगे। उन्हें धोखे से अवैध पिस्टल बेच दी गई। इस बारे में उन्हें 18 साल बाद पता चला है।
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प्रताप नगर निवासी श्याम भदाैरिया ने अपनी तहरीर में लिखा है कि नगला अजीता निवासी शिव कुमार सारस्वत ने वर्ष 2007 में उन्हें एक विदेशी पिस्टल बेची थी। उन्होंने उसे असलहा बाबू के पास जाकर कागजों में चढ़वा दिया था। मगर, पिस्टल के मूल कागजात नहीं दिए गए थे। नवंबर, 2024 में एसटीएफ ने बुलाया। बताया कि जिसने पिस्टल की बिक्री की है, उस पर अवैध पिस्टल रखने का आरोप है।
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उनसे क्रय-विक्रय और रकम देने के सुबूत मांगे गए। उन्होंने बताया कि शिव कुमार से संपर्क किया। मगर, वो टालमटोल करता रहा। पिता-पुत्र ने उन्हें रसीद नहीं दी। इससे धोखाधड़ी की आशंका हुई। आशंका जताई कि विदेशी पिस्टल बताकर अवैध फैक्टरी में बनी पिस्टल को बेच दिया गया। तहरीर में पिस्टल की फोरेंसिक जांच की भी मांग की है। उधर, एसटीएफ ने भाजपा नेता को गवाह बनाया है। उनके कोर्ट में भी बयान कराए जाएंगे। इससे साबित हो जाएगा कि यह गिरोह अवैध पिस्टल की बिक्री करता है। आरोपियों के पकड़े जाने पर भी कई और जानकारी हाथ आ सकती हैं।

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गिरोह के संबंध कई उद्योगपतियों से भी
मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी की पहचान कई बड़े अधिकारियों, पुलिसकर्मियों के साथ उद्योगपतियों से भी थी। एसटीएफ के सूत्रों का कहना है कि गिरोह ने बड़े उद्योगपतियों को भी हथियारों की बिक्री कराई है। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि हथियार असली हैं। ऐसे में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कई और लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

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भूपेंद्र ने सरेंडर कर दिए लाइसेंस, नहीं लगी भनक
फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण की जांच शुरू होते ही आरोपियों ने भी बचने की तैयारी शुरू कर दी थी। प्रशासन को शिकायत मिली लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। मुख्यमंत्री के पास मामला पहुंचा तो एसटीएफ ने जांच की। अगस्त, 2024 से आगरा इकाई के निरीक्षक जांच करने लगे। इसकी जानकारी आरोपियों को हो गई।

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अलीगढ़ में जाकर बेच दिए शस्त्र
आरोप है कि भूपेंद्र सारस्वत को पता चल गया। उसने अपने दोनों लाइसेंस सरेंडर कर दिए। इसमें कारण बताया कि मां की तबीयत खराब रहती है। इस कारण हथियार की जरूरत नहीं है। पारिवारिक कारणों से लाइसेंस को सरेंडर कर रहे हैं। इस पर असलहा बाबू ने स्वीकृति करा दी। इसके बाद भूपेंद्र ने अपने शस्त्रों को अलीगढ़ में जाकर बेच दिया। एसटीएफ को पता चला तो खरीदार से संपर्क किया। अब खरीदार के बयानों को भी विवेचना में शामिल किया जाएगा। हथियारों की भी जांच होगी।
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