अमर उजाला एक्सक्लूसिव: 800 मकान, 800 प्लाट, 18 साल इंतजार के बाद प्रोजेक्ट ठप
- चार गांवों में छह सौ से ज्यादा किसानों की जमीन का होना था अधिग्रहण
- सात साल पहले सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देने के नियम से खींचे हाथ
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आगरा में 18 साल पहले चार गांवों की 1289 एकड़ जमीन पर 1600 घरों की नई कॉलोनी बनाने के लिए 2500 करोड़ से ज्यादा की अरतौनी योजना लांच की गई थी। वहां 800 प्लॉट और 800 मकान बनाकर बेचे जाने थे। जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना भी जारी हो गई। मगर, 18 साल के बाद भी न जमीन अधिग्रहण हो पाया, न ही प्रोजेक्ट जमीन पर उतरा। चार गुना मुआवजा देने की बाध्यता पर आवास-विकास ने अब पूरे प्रोजेक्ट से ही हाथ खड़े कर लिए हैं।
वर्ष 2002 में आवास-विकास परिषद ने मथुरा मार्ग पर अरतौनी, लखनपुर, पनवारी और जोऊपुरा गांवों में 600 से ज्यादा किसानों की 1289 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर 1600 मकानों की नई कॉलोनी बसाने की कार्य योजना तैयार की थी। उसे शासन को भी भेजा गया। वहां योजना कई साल लंबित पड़ी रही।
तब तक यहां बिल्डरों ने किसानों से सस्ती दरों पर जमीनें खरीद लीं। वह महंगे दामों में जमीन बिक्री का प्रस्ताव देने लगे। मुआवजे की कीमत को लेकर मामला खिंचता रहा। वर्ष 2013 में जमीन अधिग्रहण पर किसानों को सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा का नियम था। आवास-विकास ने प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींच लिए, जिससे यहां सस्ती दरों पर प्लाट और मकान खरीदने वालों को झटका लगा।
अब 154 एकड़ जमीन अधिग्रहण का भेजा प्रस्ताव
18 साल बाद आवास विकास सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहण करने से इनकार कर दिया। परिषद से अब मात्र 154 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का प्रस्ताव भेजा गया है। खास बात यह कि यह जमीन भी किसानों की न होकर प्राइवेट प्रॉपर्टी कारोबारी की है। यह जमीन मिलने में भी मुआवजे की राशि की बाधा आड़े आ रही है। फिलहाल, आवास-विकास परिषद का यह प्रोजेक्ट अब दम तोड़ने की कगार पर है।
प्रोजेक्ट का आगे बढ़ना मुश्किल
आवास-विकास परिषद के एक्सईएन रजनीश कुशवाहा ने बताया कि अरतौनी योजना का प्रस्ताव शासन में लंबित है। हाल ही में 154 एकड़ जमीन अधिग्रहण का संशोधित प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। मगर, प्रोजेक्ट का आगे बढ़ना मुश्किल ही दिखता है।