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अपराजिताः हर क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी निभा रहीं आधी आबादी
Thu, 18 Jul 2019 12:15 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 18 Jul 2019 12:15 AM IST
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अपराजिता के तहत आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करतीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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अवंतीबाई पीजी कॉलेज में अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत निबंध प्रतियोगिता हुई। छात्राओं ने महिला सशिक्तकरण विषय पर अपनी बात और सोच को रखा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षिकाओं ने महिला सुरक्षा के उपाय बताए। बताया कि किस तरह कठिन समय में पुलिस से मदद ले सकतीं हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को सामाजिक जीवन के बारे में भी बताया गया। निबंध प्रतियोगिता से पहले छात्राओं से सवाल जवाब किए गए। इस पर छात्राओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं को मौका मिला है तब उन्होंने खुद को साबित किया है।
हाल ही में हिमा दास द्वारा तीन गोल्ड मेडल का उदाहरण देते हुए एक छात्रा ने कहा कि क्रिकेट को इतनी अहमियत दी जाती है जबकि महिलाएं कई खेलों में नाम कमा रहीं हैं।
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कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को सामाजिक जीवन के बारे में भी बताया गया। निबंध प्रतियोगिता से पहले छात्राओं से सवाल जवाब किए गए। इस पर छात्राओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं को मौका मिला है तब उन्होंने खुद को साबित किया है।
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हाल ही में हिमा दास द्वारा तीन गोल्ड मेडल का उदाहरण देते हुए एक छात्रा ने कहा कि क्रिकेट को इतनी अहमियत दी जाती है जबकि महिलाएं कई खेलों में नाम कमा रहीं हैं।
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एक छात्रा ने किरण बेदी और कल्पना चावला को अपना आदर्श बताया और कहा कि उसका प्रयास रहता है कि वह महिलाओं को जागरूक करे और उन्हें आगे बढने में मदद करे। शिक्षिकाओं ने सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाएं व महिला हेल्प लाइन नंबरों के बारे में भी बताया।
प्रियंका गौतम, शिक्षिका का कहना है कि लड़कियों पर पाबंदी नहीं लगानी चाहिए, बेटा और बेटियों में कोई फर्क नहीं है। लड़कियों को वह क्या चाहती हैं, भविष्य में क्या बनना चाहती हैं ऐसे विषयों पर परिजनों को खुलकर बात करनी चाहिए।
आकांक्षा, छात्रा का कहना है कि वर्तमान में माहौल लड़कियों के प्रति ठीक नहीं लग रहा है। इसको लेकर परिवारीजनों को चिंताएं रहती हैं, टयूशन, बाजार और स्कूल जाते समय लड़कियों को लड़कों के तमाम कमेंट सुनने को मिलते हैं। आत्मरक्षा के लिए कराटे आदि का प्रशिक्षण लेना चाहिए।
प्रियंका गौतम, शिक्षिका का कहना है कि लड़कियों पर पाबंदी नहीं लगानी चाहिए, बेटा और बेटियों में कोई फर्क नहीं है। लड़कियों को वह क्या चाहती हैं, भविष्य में क्या बनना चाहती हैं ऐसे विषयों पर परिजनों को खुलकर बात करनी चाहिए।
आकांक्षा, छात्रा का कहना है कि वर्तमान में माहौल लड़कियों के प्रति ठीक नहीं लग रहा है। इसको लेकर परिवारीजनों को चिंताएं रहती हैं, टयूशन, बाजार और स्कूल जाते समय लड़कियों को लड़कों के तमाम कमेंट सुनने को मिलते हैं। आत्मरक्षा के लिए कराटे आदि का प्रशिक्षण लेना चाहिए।
छात्रा गरिमा ने कहा कि पढ़ाई करने के लिए हमें ऐसे एरिया को देखना पड़ता है जहां पर सुरक्षित महसूस कर सकें। पढ़ने से ज्यादा लाइफ को लेकर भी निर्णय लेना पड़ता है। पढ़ाई तभी संभव है जब मन से सुरक्षित रहने की चिंताए दूर रहें।
छात्रा प्रियंका ने कहा कि स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों को चौराहों पर मनचले परेशान करते हैं। इसके लिए समाज के लोगों को समझना होगा कि बहन-बेटिया सभी के घरों में हैं, क्या वह अपनों के साथ ही ऐसा ही व्यवहार करना चाहेंगे। यह विषय चिंतनीय है।
छात्रा प्रियंका ने कहा कि स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों को चौराहों पर मनचले परेशान करते हैं। इसके लिए समाज के लोगों को समझना होगा कि बहन-बेटिया सभी के घरों में हैं, क्या वह अपनों के साथ ही ऐसा ही व्यवहार करना चाहेंगे। यह विषय चिंतनीय है।