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अपराजिता: इन महिलाओं ने मां ही नहीं पिता बनकर भी की परवरिश, बेटों को बनाया अफसर

Thu, 08 Jul 2021 01:15 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 08 Jul 2021 01:15 AM IST
सार

पति की मौत के बाद इन महिलाओं ने घर और कारोबार को संभाला। बच्चों को पढ़ाया। मां ही नहीं पिता बनकर भी बच्चों की परवरिश की।

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Aparajita these women played the responsibility of father along with mother
अपराजिता: विनोद बाला लाल, संतोष सलूजा और भारती गंभीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीवन संघर्ष का नाम है। यह सच्चाई ताजनगरी की उन महिलाओं पर सटीक बैठती है, जिन्होंने पति की मौत के दर्द को झेलते हुए अपने बच्चों का जीवन बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। बच्चों के भविष्य को इस तरह तराशा कि कोई मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पद पर इंजीनियर है तो कोई बैंक में उच्च पद पर तैनात है तो कोई पिता का व्यवसाय संभाल रहा है। पति के जाने के बाद इन महिलाओं ने मां के साथ ही पिता की भूमिका भी निभाई। 

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मेरा बेटा नेशनल कंपनी में इंडिया हेड है: विनोद बाला लाल
गुरु तेग बहादुर हाईस्कूल माईथान में प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त विनोद बाला लाल के पति सुरेंद्र कुमार की मृत्यु ने उन्हें हिला कर रख दिया। पति की मौत के साथ ही बच्चों का भविष्य बनाना उनके लिए चुनौती थी। बोलीं परिवार ने साथ दिया तो मैंने बच्चों के लिए मां के साथ पिता की भूमिका भी निभाई। 
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उन्होंने कहा कि मेरे पति आवास विकास परिषद में इंजीनियर थे। इसलिए चाहती थी कि मेरे बच्चे भी इंजीनियर बनें। होमवर्क चेक करने से लेकर उन्हें अनुशासित रहने की शिक्षा दी। आज मेरा बेटा अनुराग दुनिया की नंबर वन मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी में इंडिया हेड है।

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मेहनत की और बेटे ने मेरे सपने को पूरा कर दिखाया: संतोष सलूजा
गजानन नगर, कोठी मीना बाजार निवासी संतोष सलूजा का पुत्र खुशहाल एक बैंक में ऑडिट मैनेजर है। फिलहाल जयपुर में है। बेटे की बात करते ही संतोष का चेहरा खिल गया। बोलीं कि मेरे पति अशोक सलूजा हमेशा मजबूत इरादों से मंजिल मिलने की बात कहते थे। देर से भले मंजिल मिलती जरूर है। 

उनके जाने के बाद उनकी इसी सोच के साथ बच्चों के करियर को बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। औलाद भी लायक मिली। वह मेरी भावनाओं को अच्छी तरह से समझता था। उसने मेहनत की। मुझे राहत देने की जिम्मेदारी को निभाया। मेरा सपना पूरा करके भी दिखाया।

ममता के साथ पिता का अनुशासन भी: भारती गंभीर 
कमला नगर निवासी भारती गंभीर के पति श्याम गंभीर का अचानक दुनिया से चले जाने ने उन्हें तोड़कर रख दिया। पति के जाने के बाद उनके सामने दो चुनौतियां थीं। पहले बेटे की अच्छी परवरिश और पति के गैंस एजेंसी के काम को आगे ले जाना। भारती बताती हैं कि अपनी सोच को बदला। 

ममता के साथ पिता का अनुशासन भी बेटे के साथ व्यवहार में शामिल किया। ठान लिया कि अपने बेटे को इस काबिल बनाऊंगी कि वो अपने पिता की ओर से खड़ा किए गए काम को अच्छी तरह से संभाल सके। ऐसा हुआ भी। आज मेरा बेटा जय गंभीर मेरे साथ टूंडला और आगरा की दोनों गैस एजेंसियों को संचालित कर रहा है।

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