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आगरा: खेत में खोदाई के दौरान मिलीं प्राचीन प्रतिमाएं, लाल पत्थर पर बनी हुई हैं आकृतियां
Fri, 31 Jul 2020 03:14 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 31 Jul 2020 03:14 PM IST
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खेत में मिली प्राचीन प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा जिले के जगनेर ब्लाक के गांव नौनी में बुधवार की शाम मछली पालन के लिए तालाब की हो रही खोदाई में छह प्राचीन मूर्तियां निकली हैं। धार्मिक प्रतिमाएं निकलने से लोग यहां प्राचीन धर्मस्थल होने का अनुमान लगा रहे हैं। साथ ही लोगों ने पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी। मामले की जानकारी प्रशासन और पुरातत्व विभाग को दे दी गई है।
इसी खेत में मिलीं प्राचीन प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
जगनेर के गांव नौनी में बुधवार को किसान गंगाराम अपने खेत में मछली पालन के लिए जेसीबी से खोदाई करवा रहे थे। करीब आठ फीट खोदाई के बाद जेसीबी का हुक किसी भारी चीज से टकराया। जिसके बाद लोगों ने वहां आसपास फावडे़ से खोदाई की, तो छह मूर्तियां निकलीं। ग्रामीण इसे शिव परिवार और हनुमान जी की मान रहे हैं। खोदाई में मूर्तियां निकलने पर देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी है।
इस तरह तराशे हुए हैं पत्थर
- फोटो : अमर उजाला
पहली या दूसरी सदी की हो सकती हैं मूर्तियां
खोदाई में एक शिवलिंग जैसा पत्थर भी निकला है। साथ ही कुछ प्रतिमाएं भी हैं। लाल पत्थर पर आकृति भी बनी हुई हैं। जानकारों का अनुमान है कि इसका निर्माण पहली-दूसरी सदी में हुआ होगा। क्योंकि गुप्त काल में लाल पत्थर पर कलाकृति का साक्ष्य मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि इन मूर्तियों की स्थापना की जाएगी। पूर्व में यहां कोई विरासत रही होगी। फिलहाल ग्रामीणों ने मूर्तियों को तालाब के किनारे बने वनखंडी महादेव मंदिर के पास रख दिया है।
खोदाई में एक शिवलिंग जैसा पत्थर भी निकला है। साथ ही कुछ प्रतिमाएं भी हैं। लाल पत्थर पर आकृति भी बनी हुई हैं। जानकारों का अनुमान है कि इसका निर्माण पहली-दूसरी सदी में हुआ होगा। क्योंकि गुप्त काल में लाल पत्थर पर कलाकृति का साक्ष्य मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि इन मूर्तियों की स्थापना की जाएगी। पूर्व में यहां कोई विरासत रही होगी। फिलहाल ग्रामीणों ने मूर्तियों को तालाब के किनारे बने वनखंडी महादेव मंदिर के पास रख दिया है।
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खेत में मिली प्राचीन प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
जगनेर में पहले भी निकली थीं मूर्तियां
गांववाले बताते हैं कि जगनेर में 6 वर्ष पहले जुलाई माह में ही वरिगवां खुर्द केगांव खोरपुरा में 9 बालिकाओं को एक खेत में काली माता की मूर्ति के दबे होने के सपने आए थे। जिसके बाद लड़कियां खेत में जाकर बैठ गईं थी। लोग इन्हें देखने आने लगे थे। करीब 10 दिन बाद वहां एक काली माता की मूर्ति निकली थी जिसके बाद ग्रामीणों ने वहां पर काली माता का मंदिर बनवाया था।
कोरोना को देखते हुए प्रशासन है अलर्ट
थाना जगनेर के प्रभारी निरीक्षक कुशलपाल सिंह ने बताया कि मौके पर जांच के लिए पुलिस भेजी गई है। कोरोना को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
गांववाले बताते हैं कि जगनेर में 6 वर्ष पहले जुलाई माह में ही वरिगवां खुर्द केगांव खोरपुरा में 9 बालिकाओं को एक खेत में काली माता की मूर्ति के दबे होने के सपने आए थे। जिसके बाद लड़कियां खेत में जाकर बैठ गईं थी। लोग इन्हें देखने आने लगे थे। करीब 10 दिन बाद वहां एक काली माता की मूर्ति निकली थी जिसके बाद ग्रामीणों ने वहां पर काली माता का मंदिर बनवाया था।
कोरोना को देखते हुए प्रशासन है अलर्ट
थाना जगनेर के प्रभारी निरीक्षक कुशलपाल सिंह ने बताया कि मौके पर जांच के लिए पुलिस भेजी गई है। कोरोना को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
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लाल पत्थर पर उकरी हुई हैं आकृतियां
- फोटो : अमर उजाला
जगनेर में पहले भी मिल चुकी हैं प्राचीन मूर्तियां - सुगम आनंद
इतिहासकार सुगम आनंद ने बताया कि जगनेर में पहले भी प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं। वे दसवीं सदी की थी। आगरा और आसपास इससे प्राचीन मूर्तियां भी मिलती रही हैं। मथुरा में पहली और दूसरी सदी की गांधार शैली की मूर्तियां मिली थीं। जगनेर का इतिहास स्वर्णिम रहा है। यहां आल्हा-ऊदल के मामा जयपाल का राज था। उसी वंश के जगन के नाम पर इसका नाम जगनेर पड़ा। तालाब से मिली मूर्तियां भी बेहद प्राचीन हैं।
इतिहासकार सुगम आनंद ने बताया कि जगनेर में पहले भी प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं। वे दसवीं सदी की थी। आगरा और आसपास इससे प्राचीन मूर्तियां भी मिलती रही हैं। मथुरा में पहली और दूसरी सदी की गांधार शैली की मूर्तियां मिली थीं। जगनेर का इतिहास स्वर्णिम रहा है। यहां आल्हा-ऊदल के मामा जयपाल का राज था। उसी वंश के जगन के नाम पर इसका नाम जगनेर पड़ा। तालाब से मिली मूर्तियां भी बेहद प्राचीन हैं।